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घूमने के शौकीन लोगों के लिए बेस्ट हैं इंडिया की ये 11 बेहतरीन रोड ट्रिप्स

स्पर्धा रानी

6th December 2017

घूमने के शौकीन लोगों के लिए बेस्ट हैं इंडिया की ये  11 बेहतरीन रोड ट्रिप्स
बैग पैक किया और निकल पड़े! ऐसा अब होने लगा है। कुछ लाइफस्टाइल में आए बदलाव और कुछ लोगों के सोचने के नजरिए ने प्री- प्लान्ड ट्रिप को दरकिनारे कर दिया है। अचानक घूमने को निकलने वाले लोग बैग को पैक करके कार में डालते हैं और निकल पड़ते हैं ऐसी ट्रेवल पर, जो बेहद खूबसूरत होती है। बैचलर्स तो बाइक को ही कार समझकर चल देते हैं। वैसे भी ट्रेन में ट्रेवल के लिए दो महीने पहले टिकट कटाना कहां अब समझदारी भरा काम रह गया है। दो महीने बाद किसने देखा ही है, ऑफिस से छुट्टी नहीं मिली तो सारी ताम- झाम बेकार ही रह जाती है। अब तो बच्चों के एग्जाम भी बताकर नहीं आते। क्या पता, जाने के समय परीक्षा या यूनिट टेस्ट ही हो जाएं। कुछ और न सही तो ससुराल के रिश्तेदार ही आ जाएं, जिन्हें मना करना यानी मुसीबत मोल ले लेना है। बढ़ती महंगाई ने फ्लाइट के लिए भी टिकट कटाने को एक- दो महीने पहले ही इजाजत दी है। जाते समय टिकट कटाना असंभव सा हो गया है।
 
तुरंत- फुरंत की इस ट्रेवल में जाहिर है सड़क से ही जाना है। फिर चाहे कार हो या बाइक। अब तो हम लोगों ने इस ट्रेवल का आनंद उठाना भी शुरू कर दिया है। अपनी गाड़ी हो तो अलग तरह के मजे हैं। दूसरे शहर जाकर न तो टैक्सी करने का झंझट है और न ही कई अन्य पचड़े। ऊपर से रास्ते की खूबसूरती और रास्ते में आने वाले अन्य पड़ाव भी देखने को मिल जाते हैं। 
 
अगर आपके अंदर भी घूमने का जुनून है, वह भी बिन योजना बनाए तो हमारे देश में ऐसे कई रोड ट्रिप हैं, जो आपके अंदर घुमक्कड़ी को लेकर नया जुनून भरने की क्षमता रखते हैं। ऐसे ही 11 रोड ट्रिप के बारे में जानिए-
 

मनाली से लेह

 
कोलकाता से दीघा मनाली से लेह जाने की खूबसूरती को शब्दों में बयान करना मुश्किल है। सड़क के किनारे बर्फ से ढके ऊंचे पहाड़ और सामने खुला नीला आसमान। ऐसा महसूस होता है मानो जन्नत यहीं है। फिल्म जब वी मेट का वह गाना याद कीजिए, जिसमें करीना कपूर ये इश्क हाय जन्नत दिखाए गाते हुए डोल रही हैं। खुली जीप या बुलेट हो तो क्या कहने! वरना बंद कार भी चलेगी। कार में बैठे खिड़की से बाहर सिर निकाले बर्फीली पहाडि़यों को देखना आपके अंदर इतनी शीतलता और कोमलता भर देगा कि मन के अंदर की सारी चिकचिक निकल जाएगी। यह रास्ता करीब 480 किलोमीटर का है और यह सड़क साल में केवल पांच महीने के लिए खुली रहती है, गर्मियों से लेकर अक्टूबर तक। इस ट्रेवल को पूरी करने में दो दिन लग जाते हैं, जिसमें आपको बीच- बीच में रुकना पड़ता है। बेहतर तो होगा कि इस खूबसूरती रास्ते पर यात्री करने के लिए आप दस दिन की छुट्टी लेकर चलें। मनाली की खूबसूरत घाटी से लेह की ऊंचाई आपके तन- मन को सराबोर कर देने के लिए काफी है। बर्फीली हवाएं और रास्ते में मिलने वाली मोनेस्ट्री आपको अध्यात्म के साथ थ्रिलिंग अनुभव दे जाएगी।
 
सुबह- सुबह निकल पडि़ए और कोलाघाट में ब्रोकफास्ट कीजिए।  रास्ते भर अपने पसंदीदा मोबाइल फोन या कैमरा से तस्वीरें क्लिक करते रहिए। कहने को तो दीघा छोटी सी जगह है लेकिन यहां के समुद्र तट, समुद्री भोजन और आलस भरा दिन आपको रिलैक्स महसूस करवाने के लिए पर्याप्त है। सुमद्र के तट पर टहलिए या फिर घोड़े की सवारी कीजिए। यहां दो- तीन दिन का ट्रिप मजेदार रहेगा।
 

दार्जीलिंग से पेलिंग

 
पहाड़ी रास्तों से गुजरना भला किसे अच्छा नहीं लगता! बेहद हसीन घाटियों और पहाड़ों से होते हुए आप पेलिंग तक की ट्रेवल को पूरी करेंगे। दार्जीलिंग से कलिमपोंग, मानपुर और फिर गेजिंग से होते हुए आप पेलिंग पहुंचते हैं। कलिमपोंग अपने आपमें बेहद खूबसूरत जगह है, जहां आप चाहें तो एक- दो दिन रुक सकते हैं। यह रास्ता केवल 110 किलोमीटर का है, जिसे पूरा करने में आपको तीन घंटे लगेंगे। हां, यह जरूर है कि इस रास्ते पर जाने से पहले आपको मौसम के बारे में जरूर पता कर लेना चाहिए क्योंकि खराब मौसम की वजह से यह रास्ता बंद भी हो जाता है।
 

दिल्ली से जयपुर

 
यदि आपको संस्कृति के अनोखे संगम को देखना हो तो यह रोड ट्रिप आपके लिए है। साथ ही अपने देश की ऐतिहासिक झलक और वन्यजीवन को भी देखने का सुअवसर प्रदान करता है यह रोड ट्रिप। ताजमहल देखने के लिए आगरा, बाघ भ्रमण के लिए रणथम्बौर और ऐतिहासिक इमारतें एवं किले देखने के लिए जयपुर। यह रास्ता करीब 275 किलोमीटर का है, जिसे पूरा करने में आपको पांच घंटे लगेंगे। दिल्ली से आगरा और फिर फतेहपुर सीकरी होते हुए जयपुर पहुंचते हैं। इस रोड ट्रिप पर किसी भी उम्र के व्यक्ति को मजा आएगा। परिवार के साथ जाना हो या दोस्तों के साथ या फिर पति- पत्नी को अकेले ही, यह रोड ट्रिप यादगार बन जाएगी। एनएच 11 पर होते हुए लजीज राजस्थानी भोजन के लिए शर्मा ढाबा पर जरूर रुकें।
 

अहमदाबाद से भुज

 
सफेद रेत को देखने का लोभ अधिकतर लोगों को होगा। सफेद रेत पर रंग- बिरंगे लोगों को देखना हो तो कच्छ से बेहतर दूसरी कोई अन्य जगह नहीं है। अहमदाबाद शहर से कार में निकल पडि़ए और कच्छ के रण को देखिए। साथ में वाइल्ड एस सेंचुरी (वन्य गधा अभयारण्य) और कुछ कीमती स्थानीय हैंडीक्राफ्ट्स को भी देखने का मौका इसी रास्ते में मिलेगा। यह रास्ता करीब 400 किलोमीटर का है, जिसे पूरा करने में सात घंटे लगेंगे। अहमदाबाद से विरमगम, हलवड और फिर लकाडिया होते हुए भुज पहुंचिए। रास्ते में होडको गांव में रुक कर कुछ स्थानीय हैंडीक्राफ्ट्स खरीदने से मत चूकिएगा।
 
 
बेंगलूरु से कुर्ग
 
 
कर्नाटक के पश्चिमी घाट पर बसे कुर्ग को टलैंड ऑफ इंडियाश् नाम से जाना जाता है। बेंगलूरु से चेन्नपटना, फिर मैसूर से कुशालनगरा और फिर पहाडि़यों के बीच से होते हुए रुई जैसे बादलों के नीचे होते पहुंचिए मादिकेरी, जो पहाड़ों के बीच चिडि़या के घोसले सा प्रतीत होता है। रास्ते में आने वाले फूड ज्वाइंट्स पर स्वादिष्ट मसाला डोसा और मद्दूर वडा का आनंद उठाना मत भूलिएगा। पश्चिमी घाटों को छूते कॉफी के पौधे आपको शांति और सुकून से भरे हॉलीडे के लिए आमंत्रित करते प्रतीत होते हैं। यहां मादिकेरी से करीब 45 किलोमीटर की दूरी पर दुबारे जंगल स्थित एलीफैंट कैम्प जाकर हाथियों के झुण्ड को देख सकते हैं। मादिकेरी से ही करीब 110 किलोमीटर दूर नागरहोल वाइल्डलाइफ सेंचुरी है। पार्क के बीचोंबीच सर्पीली नदी बहती है, जिसके नाम पर इसे नागरहोल कहा जाता है। बिजोन, हाथी, हिरण, सांभर, मंगूज, लोमड़ी जैसे कई जानवर-पक्षी यहां दिख जाते हैं। रास्ते के अलावा कुर्ग से कॉफी, शहद, अंजीर, मसाले, इलायची, काली मिर्च, अन्नानस के पापड़ और संतरे खरीदना न भूलें। कुर्गी सिल्क साडि़यां भी काफी प्रसिद्ध हैं। ट्रैफिक से बचने के लिए मैसूर शहर में घुसने की बजाय श्रीरंगपटना से बायपास लीजिए, यहां की सड़कों की स्थिति काफी अच्छी है।
 

पमबन ब्रिाज, रामेश्वरम

 
क्या कभी आपने यह कल्पना की है कि आप सड़क पर चलते जा रहे हैं और आपके चारों ओर दूर- दूर तक केवल पानी है? सुनने में यह सपना सरीखा लग रहा होगा लेकिन है यह सौ फीसद सच और अपने ही देश में। सिर्फ इसी खासियत की वजह से शीर्ष के 11 रोड ट्रिप में पमबन ब्रिाज का नाम शामिल है। कहने को तो यह रास्ते बेहद छोटा है, मात्र साढ़े तेरह किलोमीटर का और इसे मात्र 20 मिनट में पूरा भी किया जा सकता है लेकिन यह जान लीजिए कि आपकी जिंदगी के ये 20 मिनट बेहद खुशनुमा और यादगार साबित होंगे। कई बार आपको अपने पैरों के नीचे असीमित समुद्र और बालों में वह विशेष नमी की जरूरत पड़ती है, जो किसी भी थेरेपी से कम नहीं है।
 

गंगटोक से नाथूला पास

 
हमारे देश के उत्तर- पूर्व में देखने को इतना कुछ है कि इसकी कोई सीमा नहीं है। रोड ट्रिप के लिहाज से भी यह जगह काफी खूबसूरत है। गंगटोक से नाथूला पास की यह ट्रेवल उत्तर- पूर्व के रोड ट्रिप्स में से सबसे हसीन है। पहाडि़यों से गुजरता रास्ता भले ही थोड़ा कठिन लगे लेकिन सच तो यह है कि किसी भी चीज की खूबसूरती कठिनाई के बाद पा लेने से अधिक उभर कर आती है। करीब 55 किलोमीटर के गंगटोक- नाथू ला हाईवे पर हनुमान जी को समर्पित एक मंदिर है, जिसे हनुमान टोक कहा जाता है। इस सड़क पर मंदिर की ओर जाते हुए गंगटोक की छटा देखते ही बनती है। मंदिर के पास से कंचनजंगा को देखा जा सकता है। यहीं पर सिक्किम के राजशाही परिवार का अंतिम कर्म भी किया गया था। रास्ते में ही चंगू लेक भी मिलता है, जहां जाकर आपको उस खुशी का अनुभव हो, जो पहले कभी नहीं हुआ होगा। इस रास्ते में आपको विभिन्न फ्लेवर वाली चाय, नक्काशीदार लकड़ी और बांस की चीजें, लेपचा बैग, तांखा पेंटिंग के अलावा सोने और चांदी जडि़त रत्न-नग वाली ड्रैगन सेट की जूलरी मिलेगी, जो यहां की खासियत है।
 

विशाखापटनम से अराकू घाटी

 
बंगाल की खाड़ी और पूर्वी घाट का खूबसूरत मेल विशाखापटनम में ही देखने को मिलता है। इस शहर में पहली बार आने वाला यहां की खूबसूरती से स्तब्ध रह जाएगा। जब वही व्यक्ति अराकू तक की ट्रेवल कार या बाइक में करेगा तो वह इस रास्ते की खूबसूरती में खो जाएगा। घुमावदार सड़कें, कभी ऊपर तो कभी नीचे और पहाडि़यों का अनोखा संगम, इस रोड ट्रिप को दक्षिण भारत का शानदार रोड ट्रिप बनाते हैं, जो आपने दिल में स्थायी जगह बना लेगा। यह रास्ता करीब 120 किलोमीटर का है। रास्ते में आपको बोरा गुफाएं और ततिपुड़ी जलाशय देखने को मिलेगा। यहां जाने के लिए बेहतरीन समय मार्च से लेकर अक्टूबर तक का है।
 
 
मुंबई- पुणे एक्सप्रेसवे
 
 
मुंबई से पुणे जाने वालों की कमी नहीं है। किसी को लोनावला घुमने के लिए जाना है तो कोई मुंबई के हो- हल्ले से दूर वीकेंड मनाने पुणे जाता है। यह रास्ता इतना खूबसूरत है कि कार या बस में बैठे आप केवल प्रकृति की खूबसूरती को ही निहारते रह जाएंगे और कब आपका गंतव्य आ जाएगा, आपको पता ही नहीं चलेगा। लोनावला जा रहे हैं तो अच्छी बात है, वरना लोनावला में रुक कर चिक्की खाने और अपनों के लिए पैक कराके ले जाने का आनंद ही कुछ और है। हरे- भरे पहाड़ और उसे ऊपर मंडराते काले- काले बादल नमी में लिपटे धुएं सा अहसास देते हैं। यदि आप इधर ही रहते हैं या मुंबई जाने की योजना बना रहे हैं तो इस एक्सप्रेसवे को जरूर आजमा कर देखें। यह एक्सप्रेसवे करीब 95 किलोमीटर का है, जहां टू- व्हीलर ले जाने की अनुमति नहीं है। लेकिन आप कार या बस में जाकर यहां की खूबसूरती और रोमांच का लुत्फ उठा सकते हैं। इस एक्सप्रेसवे पर यूं तो कई ढाबे हैं, जहां कोंकणी और मराठी जायके का आनंद लिया जा सकता है।
 

ओल्ड सिल्क रूट

 
ओल्ड सिल्क रूट बेहद पुराना पहाड़ी रास्ता है, जो जेलेप ला पास के जरिए तिब्बत के ल्हासा को भारत से जोड़ता है। इस रास्ते के हसीन नजारों को देखते हुए ऐसा अहसास होता है मानो हम बड़े पर्दे पर किसी विदेशी स्थल की सैर कर रहे हों। प्रकृति की असीम खूबसूरती और तीखी गुनगुनाती धूप ल्हासा की पहचान है। प्रकृति की खूबसूरती को खुले आंखों से निहारने के लिहाज से यह रोड ट्रिप बेशकीमती है। यह आने वाले व्यक्ति के दिल में यही बात बस जाएगी कि वह दोबारा कब यहां आए ताकि यहां की खूबसूरती को फिर से आंखों में भर सके। यहां से थांगका, चांदी की जूलरी, याक के ऊन, दूध के उत्पाद, तिब्बती दारू और ल्हासा की मीठी चाय जरूर खरीदकर ले जाएं। यहां जाने के लिए आपको सरकारी अधिकारियों से परमिट लेने की आवश्यकता पड़ती है। 
 
 

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