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सर्दियों में बुजुर्गों का ऐसे रखें ख्याल

अनुज

2nd January 2018

सर्दी का मौसम बुजुर्गों के लिए बेहद खतरनाक होता है। बुजुर्गों को अक्सर सर्दी में हार्ट अटैक, हाइपोथर्मिया, फ्लू और दमे की बीमारी बढ़ जाती है।

सर्दियों में बुजुर्गों का ऐसे रखें ख्याल
 
यह सच है की सर्दी के मौसम में सभी उम्र के लोग प्रभावित रहते हैं, लेकिन इस सर्द मौसम का सबसे ज्यादा असर पड़ता है वृद्ध लोगों पर यहां पर हम बुजुर्गों को होने वाली कुछ बिमारियों के कारण, लक्षण और बचाव के तरीके के बारे में जानकारियां दे रहे हैं। बुजुर्गों को इस मौसम में होने वाली कुछ बिमारियां इस प्रकार हैं-हृदय से संबंधित रोग, हार्ट अटैक, हर्निया, दम फूलना, फ्लू होना आदि।
 
हृदय से संबंधित रोग
 
वैसे तो हृदय रोग किसी को कभी भी हो सकता है पर सर्दी के इस मौसम में खासकर बुजुर्गों को लापरवाही बिल्कुल नहीं बरतनी चाहिए। इस मौसम में दिल की समस्या या दमे का अटैक का खतरा बढ़ जाता है। यही नहीं हार्ट फेल के मामले भी सर्दियों में बढ़ जाते हैं। ऐसे मौसम में लापरवाही बिल्कुल नहीं बरतनी चाहिए। हृदय रोगियों खासतौर से बुजुर्गों को छाती में दर्द हो तो डॉक्टर को दिखाएं। हृदय रोगों के लिए नियमित जांच कराएं और नियमित दवा  सांस फूलने, बाये कंधे, हाथ या सीने में दर्द होने पर तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।
 
हृदय रोग के लक्षण
 
यह रोग कभी भी हो सकता है शुरुआत में कोई भी लक्षण प्रकट नहीं होते है सिर्फ जांच से ही हृदय संबंधी समस्याओं का पता चल सकता है।
 
  • दोनों हाथों, कमर, गर्दन, जबड़े या फिर पेट और बेचैनी महसूस हो सकती है।
  • सांस फूलना और सूजन आना, लेटने पर खांसी आना और सीने में दर्द होना।
 
बरतें कुछ सावधानियां
  • उपर्युक्त लक्षण प्रकट होने पर शीघ्र ही डॉक्टर की सलाह ले।
  • हृदय और गुर्दे के रोगी तरल पदार्थ की मात्रा डॉक्टर के परामर्श के अनुसार ही ले।
  • खान पान में सावधानी बरतें, तली चीजों का परहेज करें।
  • हृदय रोगों के लिए नियमित जांच कराएं और नियमित दवा दें।
  • सांस फूलने, बांये कंधे, हाथ या सीने में दर्द होने पर तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।

 

 

हाईपोथर्मिया का रोग
 
सर्दियों के मौसम में बुजुर्गों को हाइपोथर्मिया होने का खतरा भी रहता है। इसका मतलब शरीर का तापमान कम हो जाना। बुजुर्ग और बच्चों के शरीर में गर्मी जल्दी बाहर आ जाती है यदि उपयुक्त सावधानियां ना बरती जाएं तो वह हाईपोथर्मिया के शिकार हो सकते हैं। लापरवाही बरतने पर यह समस्या जानलेवा हो सकती है।
 
हाईपोथर्मिया के लक्षण
  • शरीर का ठंडा पड़ जाना।
  • बेशुध होना।
  • हृदय गति का धीमा पड़ना।
 
बरते कुछ सावधानियां
  • बाहर जाने के पहले उपयुक्त ऊनी कपड़े पहनें।
  • एक या दो मोटे कपड़े पहनने के बजाय कई लेयर वाले पतले कपड़े पहने।
  • बीमार विकलांग या बुजुर्ग लोगों का खास ध्यान रखें यह लोग कंबल या रजाई आदि का प्रयोग करें।
  • ज्यादा ठंड में बाहर जाने से बचें।
  • गर्म पदार्थ का सेवन अधिक करें।
 
दमा का रोग
 
सर्दियों में बुजुर्गों में सांस संबंधी समस्याएं कुछ ज्यादा ही बढ़ जाती हैं। दरअसल बुजुर्गों में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने के कारण उन्हें सांस संबधी बिमारियों का ज्यादा खतरा रहता है। सर्दियों में प्रदूषण और कोहरे के बढऩे से दमा यानी अस्थमा के रोगियों को अटैक पड़ने की आशंका भी बढ़ जाती है तापमान में गिरावट, कोहरा, प्रदूषण या वायरल इंफेक्शन के कारण सर्दियों में सांस की समस्याएं ज्यादा होती हैं। इन समस्याओं में दमा (अस्थमा) प्रमुख रूप से है। डॉक्टरों का कहना है कि ठंडक दमा रोगियों के लिए नुकसानदेय है।
 
दमा के लक्षण
 
  • सांस फूलने के साथ सांय-सांय की आवाज आना।
  • पीला सफेद बलगम आना।
  • खांसी का बढ़ जाना।
  • रात को नींद ना आना।
  • सुस्ती आना।
बरतें कुछ सावधानियां
 
दमा रोगी सर्दी की शुरुआत में डॉक्टर के पास जाकर अपनी दवाई की मात्रा नए सिरे से निश्चित करवा लें। हो सकता है मौसम में बदलाव के साथ दवा की डोज बढ़ानी पड़े।
गर्म कपड़े पहने और कान को जरूर ढक कर रखें।
दवा के बारे में अपने मित्रों और सगे संबंधियों को जरूर बताएं।
खाने में हल्दी, अदरक, तुलसी, काली मिर्च और केसर आदि का प्रयोग करें।
 
 
 
फ्लू से रहें सावधान
 
फ्लू यह एक प्रकार के वायरस के कारण होने वाली बीमारी है। बुजुर्गों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है इसलिए वह संक्रमण से जल्दी प्रभावित होते हैं। ऐसे में सर्दी के मौसम में लापरवाही न बरते।
 
फ्लू के लक्षण
  • तेज बुखार और बदन दर्द।
  • सिर दर्द और गले में दर्द।
  • खांसी आना और कभी- कभी सांस लेने में समस्या होना ।
बरतें कुछ सावधानियां
 
  • फ्लू के रोगी खांसते या छींकते समय मुंह पर हाथ रखें या रूमाल का प्रयोग करें।
  • फ्लू के रोगियों द्वारा इस्तेमाल की गई वस्तुओं जैसे रूमाल व चादरों आदि को सुरक्षित विधि से साफ करें।
  • मौसम में बदलाव से पहले हर साल फ्लू का टीका लगवाएं।
  • बीमार लोगों को घर पर रह कर आराम करना चाहिए जब तक अति आवश्यक ना हो सार्वजनिक जगह पर ना जाएं।
  • पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थों का सेवन करें।
  • साफ -सफाई का ध्यान रखें।
  • फ्लू जैसी संक्रामक बीमारी के दौरान घर में रहें ताकि बीमारी को फैलने से रोका जा सके।
  • डॉक्टर की सलाह से समय रहते फ्लू और निमोनिया का टीका लगवाए।
अन्य सावधानियां
 
सर्दियों के मौसम में अच्छी तरह से गर्म पकड़े पहन कर रखें।
खाना-पीना भी मौसम के अनुसार रखें। ठंडी चीजों और जिनकी तासीर ठंडी हो ऐसी वस्तुओं से पूरी तरह से परहेज करें।
सुबह के समय ठंड में घर से बाहर न निकलें। धूप निकलने के बाद ही घूमने जाएं।
हल्का फुल्का शारीरिक श्रम अवश्य करें। इससे शरीर स्वस्थ बना रहता है।
हृदय और किडनी के मरीज मौसम में बदलाव पर अपने डॉक्टर की सलाह लें। और नियमित दवाएं लें और तरल पदार्थ की मात्रा की भी जानकारी लें।
 
 

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