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बुनाई शुरू करने से पहले जान लीजिए ये बेसिक बातें

गृहलक्ष्मी टीम

11th January 2018

अगर आप भी चाहते हैं अपनी दादी मां की तरह स्वेटर बुनना तो गृहलक्ष्मी और वर्धमान के साथ सीखें स्टेप बाय स्टेप बुनाई ... मास्टर नीटिंग क्लासेज में ...

बुनाई शुरू करने से पहले जान लीजिए ये बेसिक बातें
 
बदलता मौसम इस बात का अहसास करा रहा है कि अब समय आ गया है स्वेटरों को बाहर निकालने व नए-नए डिजाइन बुनने का । पर ये क्या? आप तो उदास हो गई यह सोच कर कि आपको बुनाई करना तो आता ही नहीं है। अरे आपको उदास होने की जरूरत नहीं है हम आपके लिए लेकर कर आए है गृहलक्ष्मी बुनाई क्लासेज, जिसमें आपको बुनाई से संबंधित सभी प्रकार की जानकारियां मिलेंगी ताकि आप भी अपने हाथों से बने स्वेटर अपनों को पहना सकें। बुनाई शुरू करने से पहले हमें निटिंग यार्न यानि कि ऊन के बारे में जानना जरूरी है। आइए जानते हैं -
 
 
 
निटिंग यार्न खरीदते समय इन बातों का खास ध्यान रखें -
 
  • निटिंग यार्न खरीदते समय पहनने वाले की आयु, रंग और लिंग आदि का ध्यान रखकर ही यार्न खरीदें। बड़े उम्र वालों के लिए हल्के व बच्चों के लिए गहरे व चटकीले शेड ही संदर लगते हैं। 
  • इसी तरह कम उम्र की लड़कियों व महिलाओं की उम्र का ध्यान रख कर शेड खरीदें। 
  • नवजात शिशुओं के लिए आप वर्धमान के पेस्टल कलर शेड (बेबी पिंक, लाइट ब्लू, नेचुरल लाइट शेड) के यार्न चुन सकती हैं जो मुलायम व हल्के हो। फर वाली निटिंग यार्न का प्रयोग ना करें। 
  • निटिंग यार्न को हमेशा दिन में शोरूम से बाहर आकर ही देखें क्योंकि शोरूम की रोशनी में शेड में हल्का अंतर मालूम नहीं पड़ता। पर जब स्वेटर बनाने पर वह अंतर सामने आता है। 
  • हमेशा अच्छी क्वालिटी की निटिंग यार्न का चुनाव करें। कभी भी सस्ती किस्म की निटिंग यार्न न खरीदें। निटिंग यार्न को छूकर देखें, अगर निटिंग यार्न चुभती है तो कभी भी न खरीदें। हमेशा हाथों को मुलायम लगने वाली निटिंग यार्न खरीदें।  
  • निटिंग यार्न जितनी हल्की होगी उतनी ही अच्छी होगी। हल्के वजन वाली निटिंग यार्न मुलायम होती है। निटिंग यार्न का गोला हमेशा ढीला लपेटें। 
  • बुनाई शुरू करने से पहले हाथों को साबुन से अच्छी तरह से धों लें और हाथ सुखाकर ही अच्छी तरह से बुनना शुरू करें, वरना हाथों पर लगी गंदगी, चिकनाई स्वेटर को रंगहीन बना देती है।
 
सलाइयों का प्रयोग -
 
  • सलाइयां हमेशा अच्छी किस्म की ही खरीदें। सबसे अच्छी किस्म की पोनी की सलाइयां मिलती हैं।
  • छोटी सलाइयां स्वेटर और लंबी सलाइयां शाल या स्टाल के लिए प्रयोग करें।
  • गला बनाने के लिए दोनों तरफ से नोंक वाली सलाइयां ही खरीदें।
  • कंधे के फं. पीछे के फंदे उतारने के लिए पिन का प्रयोग करें।
  • घटिया क्वालिटी की सलाइयों से स्वेटर बुनते समय उनका काला रंग स्वेटर पर लग जाता है जो जल्दी नहीं उतरता।
  • सलाई अच्छी कंपनी की लें। अच्छी सलाइयों से बुनाई साफ-सुथरी होती है और निटिंग यार्न सलाई पर फंसती नहीं है क्योंकि यह चिकनी होती है।
  • गले का बार्डर 10 नं. की सलाई से बना कर 12 नं. की सलाई से बंद करें, इससे गले में सफाई आएगी।

 

 
यार्न के प्रकार -
 
  • पतला यार्न - 4 प्लाई का यार्न पतला होता है जो 10/11 नम्बर की सिलाई पर बुना जाता है। ये बच्चों के वुलन कपड़ों के लिए एकदम सही यार्न है।
  • हल्का मोटा यार्न - इस तरह का यार्न 8/10 नम्बर की सिलाई पर बुना जाता है। यह यार्न सभी आयु वर्ग के लोगों के लिए उचित है।
  • ज्यादा मोटा यार्न - बहुत ज्यादा ठंडी जगहों पर ऐसा यार्न इस्तेमाल में लाया जाता है जो 5/7 नम्बर  सिलाई पर बुना जाता है।
यह सभी यार्न 100 % एक्रिलिक, एक्रिलिक नायलॉन, एक्रिलिक वूल ब्लेंड में उपलब्ध हैं।
 
यार्न पैकेजिंग के प्रकार -
  • बॉल
  • लच्छी
 
माप -
 
  • जिसका भी स्वेटर, कार्डीगन बनाना है, इंचीटेप से उसकी चेस्ट, लंबाई, बाजू की लं. व नाप ले लें, उसी के हिसाब से फं. डालें।
  • आम प्रयोग में आने वाली 4 प्लाई की निटिंग यार्न के 6 कं. 1 के बराबर 1 मोटी निटिंग यार्न के 5 फं. और बाबा निटिंग यार्न के 8 फं. होते हैं।
  • आम प्रयोग में आने वाली 4 प्लाई की 8 सलाई, मोटी निटिंग यार्न की 5-6 सलाई और बाबा निटिंग यार्न की 10-12 सलाइयां 1 के बराबर होती है।
  • बच्चों के तथा युवाओं के स्वेटर हमेशा ढीले और माप के 2-3 इंच लंबे बुनें क्योंकि बच्चे व युवा जल्दी बढ़ते है।
  • स्वेटर बनाने में बहुत मेहनत लगती है तो हो सकें तो बच्चों के स्वेटर थोड़े बड़े बुनें ताकि बच्चें उन्हें 2-3 साल तक पहन सकें।
 
 
 
 
 
 
 
 

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