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जानें कैसे पल्पिटेशन के कारण बढ़ जाता है कार्डियक अरेस्ट का खतरा

विजया मिश्रा

26th February 2018

दिल का जोर से धड़कना हमेशा प्‍यार का संकेत नहीं होता है, और न ही ये दिल की धड़कन का रुकना और बंद होना है। बल्कि तेजी से दिल का धड़कना दिल पर ध्‍यान देने का संकेत भी हो सकता है। यदि आपका स्‍वास्‍थ्‍य अच्‍छा है या खराब है तो भी चल सकता है, लेकिन अगर आपका दिल सही तरीके से नहीं धड़क रहा है तो तुरंत चिकित्‍सक से संपर्क करने की जरूरत है। इसके बारे में ज्यादा जानकारी आपको दे रही हैं —डा. वनीता अरोड़ा,  डॉयरेक्‍टर और हेड कॉर्डियक इलेक्‍ट्रोफिजियोलॉजी लैब एंड एरीदमिया सर्विसेज,वरिष्‍ठ सलाहकार – कॉर्डियक इलेक्‍ट्रोफिजियोलॉजिस्‍ट एंड इंटरनेशनल कॉर्डियोलॉजिस्‍ट मैक्‍स सुपर स्‍पेशियलिटी हॉस्पिटल।

जानें कैसे पल्पिटेशन के कारण बढ़ जाता है कार्डियक अरेस्ट का खतरा

अनियमित दिल की धड़कन, फड़फड़ाहट, घबराहट, और अन्‍य समस्‍यायें आपको संकट में डाल सकते हैं, जो सीधे दिल के दौरे से संबंधित हैं। दुर्भाग्य से, भारत में, हमारे पास हृदय संबंधी मौतों की संख्‍या का आंकड़ा नहीं है, इसलिए यह बताया नहीं जा सकता कि एससीडीज के कारण कितनी मौते होती हैं। लेकिन स्‍थूल कारकों पर नजर डालने से यह दूर हो जाता है कि भारतीयों को भी दिल संबं‍धी खतरनाक समस्‍यायें हो रही हैं। वर्ष 2016 में भारत हुए एक शोध में पता चला कि हृदय रोग (सीवीडी) के कारण सालाना 17 लाख भारतीयों की मौत होती है। दिये गये संदर्भ के अनुसार, अतलता या घबड़ाहट दिल के स्‍वास्‍थ्‍य के लिए एक खतरनाक संकेत है।

दिल की असामान्य धड़कन क्या है?

हमारे दिल की धड़कन नियमित तौर पर होती रहती है और यह तब तक होती रहती है जब तक हम जीवित रहते हैं। जब हमें कभी दिल का दौरा पड़ता तब भी यह शरीर में रक्‍त का संचार करता रहता है। हमारा दिल अंतिम क्षण तक काम करना जारी रखता है। दिल की धड़कन की एक सामान्य ताल है, जब शरीर आराम की स्थिति में होता है तब दिल की धड़कन प्रत्‍येक मिनट 60 से 100 तक होती है। जब कोई व्यक्ति अतिरिक्त शारीरिक श्रम करता है, कुछ भावनात्मक या मनोवैज्ञानिक उत्तेजनाओं के प्रभाव में होता है या वह अस्वस्थ है, तो हृदय धड़कन अलग-अलग होगी। लेकिन अतालता इससे बहुत अलग है। यह दिल की धड़कन के सामान्य पैटर्न का परिवर्तन है, जो आपके दिल को प्राप्त होने वाले इलेक्ट्रिक आवेगों के क्रम में किसी भी परिवर्तन से उत्पन्न होता है।

कैसे होती है ये समस्या

हमारे दिल की कार्यप्रणाली विद्युत गतिविधियों पर निर्भर करती है जो दिल में रक्त पंप करने के लिए आवश्यक आवेग पैदा करती है। जब सामान्‍य स्‍वरूप में विद्युत आवेग अनियमितता होने लगती है तब अतालता की समस्‍या होती है। ऐसा कई कारकों की स्थिति में हो सकता है, जिनमें कार्डियक रोग, मोटापा, रक्त में इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन, और अन्‍य कारक हो सकते हैं। यहां तक कि अनियमित दिल की धड़कन का पता सामान्‍य स्‍वास्‍थ्‍य वाले इंसान में चल सकता है। लगभग एक दर्जन जानी-पहचानी दिल की समस्‍यायें होती हैं, जो दिल में विभिन्न उत्तेजनाओं को बढ़ाती रहती हैं। हालांकि, इसमें सबसे खतरनाक स्थिति तब होती है जब दिल की धड़कन धीमी गति (ब्रैडीकार्डिया) और तेज दिल की धड़कन (टेकिकार्डिया), घबड़ाहट (फाइब्रिलेशन), दिल की धड़कन का छूटना, या समय से पहले संकुचन होना, आदि की समस्‍या होती है।

घबराहट के कारण हृदय गति रुकना

जब दिल लंबे समय तक ठीक से काम नहीं करता, तो यह ऐसी स्थिति पैदा करता है जिससे अचानक हृदय की गति रुक सकती है, जो कि दिल के दौरे से बिलकुल अलग है। विद्युत आवेग में अनियमितता होने के चलते दिल अचानक कामकाज बंद कर देता है, जिसके कारण दिल की मांसपेशियों को रक्त पंप करने में असमर्थता होती है। अचानक हृदय की गति रुकने तात्कालिक मृत्यु की संभावना रहती है। एक व्यक्ति जो लंबे समय से हृदय अतालता से पीड़ित है, उसमें दिल की धड़कन बंद होने का खतरा बढ़ रहा है क्योंकि ऐसे व्यक्ति में विद्युत आवेग सही न होने हृदय की गति रुकने की संभावना बनी रहती है। अनियमित दिल की धड़कन के विभिन्न रूपों के कुछ सामान्य लक्षणों में शामिल हैं, श्वांस लेने में समस्‍या,चक्कर आना, सीने में घरघराहट या सामान्‍य परिस्थितियों में अनियमित हृदय की गति का होना। अन्य लक्षणों में सीने में दर्द, घबड़ाहट, पसीना आना और भ्रम होना शामिल हैं। यदि लक्षणों की पहचान हो जाती है, तो रोगी को हृदय विशेषज्ञ के पास तुरंत ले जाना चाहिए।

एलर्ट रहें

 उचित दवाओं के साथ, बढ़ी हुई शारीरिक गतिविधि, आहार में बदलाव, नब्ज की समय-समय पर निगरानी, और जोखिम वाले कारकों का सही प्रबंधन करने से यह सुनिश्चित होगा कि किसी व्यक्ति का दिल स्‍वस्‍थ है और सही तरीके से काम कर रहा है।

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