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क्या आप जानते हैं क्यों बनी आनंदी गोपाल जोशी गूगल की डूडल

गृहलक्ष्मी टीम

31st March 2018

आनंदी गोपाल जोशी के 153वें जन्मदिन पर गूगल ने अपने डूडल के जरिए उन्हें सम्मान देने की कोशिश की है।

क्या आप जानते हैं क्यों बनी आनंदी गोपाल जोशी गूगल की डूडल
बेटियों को अपने शहर से दूर किसी ऐसे शहर में भेजना जहां शिक्षा और जॉब के अवसर ज्यादा हों, आजकल भले की आम हो, लेकिन एक समय था जब हमारे देश में लड़कियों के लिए ये सुविधा सीमाओं का उल्लंघन माना जाता था। और ऐसे रूढ़िवादी सामजिक वातावरण से निकलकर आनंदी गोपाल जोशी पढ़ाई करने विदेश गई और देश की पहली महिला डॉक्टर बनी।
 
बचपन में हुई शादी
आनंदी गोपाल जोशी का जन्म 31 मार्च, 1865 को महाराष्ट्र के कल्याण, थाने में हुआ था। उनके परिवार में सभी को सिर्फ संस्कृत का ज्ञान था। आनंदी की शादी मात्र 9 साल की उम्र में उनसे तीन गुणा उम्र में बड़े, लेकिन पढे़-लिखे गोपाल राव जोशी से हुई थी। पांच साल बाद उन्होंने एक बेटे को जन्म दिया, लेकिन चिकित्सा सुविधाओं के आभाव में उनके बेटे की मृत्यु हो गई। 
 
पति ने राह दिखाई
इसी के बाद पति के प्रोत्साहन से आनंदी ने डॉक्टर बनने का निश्चय किया और पति से ही संस्कृत, अंग्रेजी और हिन्दी की पढ़ाई करने लगी। सास ससुर की तरफ से कोई रोकटोक न हो इसके लिए उन्हें कोलकाता भी भेजकर पढ़ाया गया। क्योंकि उस समय देश में मेडिसिन की पढ़ाई नहीं होती थी इसलिए उन्हें विदेश भेजने का निर्णय लिया गया। लेकिन ये इतना भी आसान नहीं था, क्योंकि विदेश जाने के बारे में सुनते ही उनके अड़ोसी-पड़ोसी समेत परिवार के लोगो ने भी खूब विरोध किया था। उस समय आनंदी ने परिवार वालों को ये समझाया कि वो अमेरिका रहने नहीं जा रही हैं, और पढ़ाई खत्म करके वापस आएंगी।
 
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साल 1883 में आनंदी ने पहली बार अमरीका की ज़मीन पर कदम रखा और 19 साल की उम्र में उन्होंने अपना एम. डी खत्म कर लिया। डिग्री खत्म होने के बाद वो इंडिया वापस आ गईं। जब उन्हें डिग्री मिला, तो इस खास मौके पर महारानी विक्टोरिया ने उन्हें एक बधाई खत लिखा और बड़े भव्य अंदाज में देश में उनका स्वागत किया गया था। आनंदी के काम की सराहना केसरी पत्रिका के संपादक लोकमान्य तिलक ने भी की थी। 

जल्दी हुआ निधन
जब आनंदी वापस लौटी तो उनका उद्देश्य महिलाओं के लिए एक मेडिकल कॉलेज खोलना था। उन्हें कोल्हापुर के एल्बर्ट एडवर्ड अस्पताल में महिला वॉर्ड का कार्यभार सौंपा गया, लेकिन मात्र 22 साल की उम्र में उन्हें टीवी हो गया और उनका 26 फरवरी, 1887 में निधन हो गया। 
 
यादों में ऐसे बसी हैं आनंदी
 
  • देश की पहली महिला डॉक्टर आनंदी गोपाल जोशी की पहली बायोग्राफी साल 1888 में लिखी गई थी। 
 
  • दूरदर्शन में आनंदी गोपाल के नाम से एक धारावाहिक में उनके जीवन के विषय में लोगों को दिखाया था। 
 
  • श्री कृष्ण जनार्दन जोशी ने उनके जीवन और उपलब्धियों को दर्शाते हुए एक मराठी नॉवल भी लिखी है।
 
  • शुक्र ग्रह के तीन क्रेटरों में से एक का नाम आनंदी गोपाल के नाम पर रखा गया है।

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