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जानें पीरियड्स के बारे में प्रचलित मिथ और उनकी सच्चाई

सुचि बंसल(योगा एक्सपर्ट एवं डाइटीशियन)

1st June 2018

पीरियड्स होना एक बहुत ही सामान्य और प्राकृतिक प्रक्रिया है, जो कि महिलाओं को हर महीने होती है। अमूनन ये 4-5 दिन चलते हैं जिसकी अविधि हर महिला में अलग- अलग होती है। यह हर एक सामान्य लड़की और महिला को एक निश्चित उम्र में होते हैं। लेकिन हमारी शर्म और भ्रांतियाँ इस सामान्य प्रक्रिया को असामान्य बना देती हैं।  

जानें पीरियड्स के बारे में प्रचलित मिथ और उनकी सच्चाई
पीरियड्स के बारे में ज़्यादातर भ्रांतियाँ हम महिलाओं को अपने घरों से विरासत में मिलती हैं। ये धारणाएँ पीढ़ी दर पीढ़ी चलती चली आ रही है हमें हमारी माँ से, माँ को दादी- नानी से, उनको उनके भी पैरेंट्स और ग्रांड पैरेंट्स से। लेकिन अभी कुछ समय से महिलाएं अपने प्रति जागरूक हो रही हैं वे अपने लिए आवाज उठा रही हैं। अब धीरे धीरे कई सामाजिक प्रयासों के कारण महिलायें पीरियड्स के बारे में बात करने लगी हैं। लेकिन अभी भी थोड़ी कसक बाकी रह गयी है कुछ लोग इसके बारे में बात करने में शर्म महसूस करते हैं इसका कारण पीरियड्स से जुड़ी कुछ भ्रांतियाँ हैं। आइये जानते हैं इससे जुड़ी भ्रांतियाँ और उनकी सच्चाई –
 
मिथ 1: पीरियड्स में नहाना और बाल नहीं धोने चाहिए :
 
कई लोग यह मानते हैं कि पीरियड्स में बाल धोने से आगे चलकर हैल्थ संबंधी समस्याएँ आती हैं। जबकि ऐसा नहीं है इस समय गरम पानी से स्नान करना दर्द और ऐंठन में आराम पहुंचाता है। साथ ही शरीर की साफ- सफाई भी हो जाती है। हाँ ज्यादा ठंडे पानी से नहाना कष्टदायक हो सकता है क्योंकि ठंडे पानी के प्रभाव से रक्त नलिकाएँ संकुचित हो जाती हैं जिससे ब्लड फ्लो में कमी आ जाती है और दर्द भरी ऐंठन हो सकती है।   
 
मिथ 2: इस दौरान एक्सर्साइज़ नहीं करना चाहिए :
 
इस दौरान आराम करने की सलाह दी जाती है उन्हें बिल्कुल काम नहीं करने दिया जाता; लेकिन यह गलत है। आराम करने से दर्द दूर नहीं होता बल्कि उस समय सक्रिय रहा जाए तो इस समय होने वाली ऐंठन और दर्द कम होता है। हल्का व्यायाम तो जरूर ही करना चाहिए। इससे शरीर में रक्त और ऑक्सिजन का प्रवाह सही से होता है जिससे पेट दर्द और मांसपेशियों की ऐंठन दूर होती है। 
 
मिथ 3: पीरियड्स में स्त्री अशुद्ध हो जाती है :
 
पीरियड्स को लोग सीधे तौर पर बीमारी तो नहीं कहते मगर बर्ताव बिल्कुल एक बीमार व्यक्ति की तरह करते हैं वो भी किसी छूत की बीमारी वाले बीमार व्यक्ति की तरह। किचन में नहीं जाना, मंदिर नहीं जाना, बिस्तर नहीं छूना, अचार नहीं छूना आदि न जाने कितनी तरह की हिदायतें दी जाती हैं। कई जगह तो पीरियड्स के समय उस महिला का बिस्तर तक अलग कर दिया जाता है और खाना इस तरह दूर से दिया जाता है मानों उसे छूत की बीमारी लग गयी हो और उसके जरा सा भी छू जाने से दूसरों को भी छूत हो जाएगी। ऐसा करना उस महिला के लिए बेहद पीड़ाजनक और मानसिक तनाव भरा साबित हो सकता है। इसमें निकलने वाला रक्त और सामान्य रक्त एक ही होता है इसलिए इसमें अशुद्ध होने वाली कोई बात ही नहीं है बल्कि यह एक सामान्य प्रक्रिया है।   
 

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