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धोखेबाज एनआरआई दूल्हों की अब खैर नहीं

 हर्ष अरोड़ा

5th June 2018

एनआरआई शादियों में धोखेबाजी करने वालों के लिए कड़े कदम उठाएगी सरकार।

धोखेबाज एनआरआई दूल्हों की अब खैर नहीं

हर लड़की का ख्वाब होता है कि उसकी शादी एक ऐसे राजकुमार से हो घोड़े पर बैठ कर उसे प्रिंसेस की तरह अपने साथ सात समंदर पार ले जाए। ये सात समंदर पार ले जाने वाला राजकुमार आजकल एनआरआई यानी प्रवासी भारतीय कहलाता है। इस एनआरआई के पास विदेश में घर और मोटी सम्पति देख कर लड़कियां और उनके पैरेंट्स भी पूरा जोर लगा देते हैं कि उनका रिश्ता किसी एनआरआई परिवार में ही हो।

पंजाब से पाकिस्तान तक 

जिस तरह हर चमकती चीज़ सोना नहीं होती, वैसे ही हर एनआरआई अपनी पत्नी को राजकुमारी की तरह नहीं रखता, बल्कि आजकल तो एनआरआई दूल्हों से शादी करने वाली भारतीय लड़कियों की परेशानियां साल-दर-साल बढ़ती जा रही हैं। वैसे यह चलन पंजाब से शुरू हुआ मान सकते हैं, जहां कनाडा, यूके और अमेरिकी एनआरआई पंजाबी लड़कियों को अपने साथ दुल्हन बनाकर ले जाते रहे हैं। उनकी देखा-देखी यह चलन भारत समेत पाकिस्तान में भी देखा गया। पाकिस्तान में तो इसी हाल ही में 5 मई, 2018 को एक ऐसे गैंग का पर्दाफ़ाश हुआ है, जो पाकिस्तानी लड़कियों को ब्रिटिश-पाकिस्तानी नागरिकों से शादी के नाम पर फुसलाते थे और बाद में उनकी सुहागरात का वीडियो शूट कर उन्हें ब्लैकमेल किया जाता था।   

दुल्हन नहीं मेड चाहिए

बड़ी संख्या में ऐसे मामले प्रकाश में लगातार आ रहे हैं कि भारतीय लड़कियों से शादी करके उन्हें अपने साथ विदेश ले जाने के बाद ये एनआरआई  दूल्हे उनसे घर में मेड की तरह सारा काम कराते हैं। कई तो पहले से शादीशुदा होते हैं। इन लड़कियों का बुरी तरह से मानसिक व शारीरिक शोषण भी किया जाता है। ज्यादातर मामलों में दुल्हनों के साथ घरेलू हिंसा और दहेज़ उत्पीड़न के मामले सामने आते हैं। इनके विदेश में होने के चलते लड़की के माता-पिता बेबस हो जाते हैं।  

भयावह आंकड़े धोखेबाजी के 

इस साल राष्ट्रीय महिला आयोग के एनआरआई सेल में शादी और अन्य समस्याओं से संबंधित जो शिकायतें मिली हैं, उनमें वर्ष 2015 से 2017 तक लगातार इजाफा होता रहा है। जहां इस सेल में वर्ष 2015 में देश-भर से 422 लड़कियों ने शिकायतें दर्ज कराई थीं, वहीं यह संख्या वर्ष 2016 में 468 और 2017 में 528 हो गई। जाहिर है एनआरआई के रसूख की आड़ में लड़कियों से शादी के नाम पर धोखेबाजी का खेल काफी समय से खेला जाता रहा है।

कानूनी शिकंजा और अवेयरनेस प्रोग्राम 

राहत की बात यह है कि इस बाबत केंद्र सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। अब सरकार ने कानून में बदलाव कर धोखेबाज़ एनआरआई को कानूनी शिकंजे में लाने के अलावा लोगों को इनसे बचने के लिए अवेयरनेस बढ़ाने जैसे अन्य विकल्पों पर भी जोर देने का फैसला किया है। गौरतलब है कि भगोड़े एनआरआई पतियों को कानून के शिकंजे में लाने के लिए महिला और बाल विकास मंत्रालय और विदेश मंत्रालय ने ज्वॉइंट रूप से एक प्रपोजल तैयार किया था, जिसके मुताबिक सीआरपीसी में बदलाव करने के साथ ही पासपोर्ट ऐक्ट में भी बदलाव किया जाए। इसमें पहले यह प्रस्ताव था कि शिकायत मिलने और नोटिस भेजने के बाद भी यदि संबंधित व्यक्ति पेश नहीं हुआ तो उसे भगोड़ा घोषित किया जाएगा और पासपोर्ट भी जब्त कर लिया जाएगा। हालांकि इसमें कई पेंच थे और वेबसाइट पर डाले गए नोटिस को रिसीव मानने का प्रस्ताव खारिज कर दिया गया। 

बहरहाल, अब फिर से कानून मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और महिला एवं बाल विकास मंत्रालय सजग हुआ है। इस विषय की गंभीरता को देखते हुए लोगों को जागरूक करने के बड़े प्रयास किए जाएंगे और पीड़ित परिवारों की मौजूदा कानून के ज़रिए मदद की जाएगी।

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