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नियमित करें ये पाँच प्राणायाम, पाएँ सेहत का खजाना

सुचि बंसल, योगा एक्सपर्ट एवं डाइटीशियन

21st June 2018

प्राणायाम श्वास को एक विशिष्ट प्रकार से नियंत्रित करने की प्रक्रिया है। प्राणायाम कई प्रकार के होते हैं; जिन्हें करने के तरीके अलग-अलग हैं, लेकिन मकसद एक ही है प्राणों का विस्तार करना।

नियमित करें ये पाँच प्राणायाम, पाएँ सेहत का खजाना

बहुत से ऐसे रोग और शारीरिक समस्याएँ होती हैं जिनमें आसन और एक्सर्साइज़ करना संभव नहीं हो पाता है, लेकिन प्राणायाम कर सकते हैं। इसका नियमित अभ्यास करने से शरीर में ऊर्जा का संचार होता है और शरीर के अंदर की गंदगी बाहर निकलती है। साथ ही इसका रोजाना अभ्यास तनाव, चिंता और डिप्रेशन आदि से छुटकारा दिलाता है। आइये जानते हैं कौन से 5 प्राणायाम हैं जिनको रोजाना करने से वे हमें पूर्ण स्वास्थ्य देते हैं –

  1. नाड़ीशोधन प्राणायाम 

     

    इसे अनुलोम- विलोम प्राणायाम भी कहते हैं। इसे नियमित करने से सर्दी- जुखाम जैसी परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ता है। साथ ही फेफड़ों में ऑक्सीजन की सप्लाई भी ढंग से होती है, जिससे शरीर में रक्त का संचार भी सही से होता है और शरीर में उचित ढंग से ऊर्जा का प्रवाह होता है।

ऐसे करें –  

  • रीढ़ की हड्डी सीधी रखते हुए बैठें।
  • अपने दाहिने हाथ के अंगूठे से दायीं नासिका को बंद करते हुए बायीं नासिका से श्वास को अंदर की ओर खींचें, फिर बायीं नासिका को बंद कर लें और दायीं नासिका से श्वास को बाहर छोड़ें।
  • इसके बाद दायीं नासिका से श्वास लें, फिर दायीं नासिका को बंद करते हुए बायीं नासिका से श्वास छोड़ दें। इस तरह एक राउंड पूरा करके 5-10 बार करें।  

2. भ्रामरी प्राणायाम 

इस प्राणायाम से हमारे मस्तिष्क में वाइब्रेशन होती हैं, जिसका प्रभाव हमारे नर्वस सिस्टम पर पड़ता है जो तनाव और चिंता को दूर करके दिमाग शांत करता है। इसे नियमित करने से अनिद्रा की समस्या दूर होती है।

ऐसे करें -

  • कमर –गर्दन सीधी रखते हुए बैठ जाएँ।
  • हाथों के अंगूठे से अपने कानों को बंद करें तथा बाकी उँगलियों से आँखों को हल्के हाथों से बंद करें।
  • धीरे-धीरे लंबी गहरी श्वास लें, फिर श्वास छोड़ते हुए भौरे के गुंजन जैसी आवाज निकालें।
  • इस अभ्यास को 10-15 बार लगातार करें। अच्छे लाभ के लिए इसे सुबह और शाम दोनों समय करें।

3. भस्त्रिका प्राणायाम 

  

इस प्राणायाम को करने से शरीर के अंदर की गंदगी या विषाक्त तत्व बाहर निकलती है। इससे शरीर में गर्मी उत्पन्न होती है, साथ ही लंग्स की क्षमता भी बढ़ती है। उच्च रक्तचाप, हृदय रोगी, हर्निया, अल्सर से पीड़ित व्यक्ति तथा गर्भवती महिलाएं इस अभ्यास को न करें।

ऐसे करें –

  • कमर- गर्दन सीधी रखते हुए शांत होकर बैठें।
  • नाक से तेज गति से आवाज करते हुए श्वास लेना है तथा छोड़ना है। श्वास लेते समय पेट फुलाना है तथा छोड़ते समय पेट अंदर खींचना है।
  • इस प्रक्रिया में केवल पेट हिलना चाहिए और छाती स्थिर रहनी चाहिए।
  • सामान्य अवस्था में आने के लिए श्वास की गति धीमी करते जाएँ और अंत में एक गहरी श्वास लेकर फिर श्वास निकालते हुए पूरे शरीर को ढीला छोड़ें।
  • इस तरह कम से कम 20 बार करना है। 

4. उज्जायी प्राणायाम :

  

यह प्राणायाम गले की मांसपेशियों तथा श्वास नलिकाओं को उचित मसाज देता है तथा उनमें ब्लड सप्लाई को बढ़ाता है जिससे श्वास नलिकाओं का ब्लोकेज खत्म होता है। इसे लगातार करते रहने से कुछ ही दिनों में खर्राटों की समस्या दूर हो जाती है।   

ऐसे करें –

  • किसी समतल जगह पर कमर- गर्दन सीधी करके बैठें।
  • दोनों नोस्ट्रिल से लंबी गहरी सांस अंदर लें; सांस छोड़ते समय गले को संकुचित करते हुए हल्के खर्राटे लेने जैसी आवाज निकालें।
  • इस अभ्यास को दिन में दो बार कम से कम 5- 10 बार अवश्य करें।

5. शीतली प्राणायाम :

 

इसे करने से शरीर के अंदर ठंडक का अहसास होता है। यह प्राणायाम सीने की जलन, खट्टी डकारें आना और एसिडिटी को दूर करने में भी सहायता करता है। साथ ही अल्सर जैसी गंभीर समस्याओं में भी आराम पहुंचाता है।  

ऐसे करें –

  • कमर- गर्दन सीधी करके बैठें। आँखों को हल्के से बंद करें।
  • होठों को गोल करते हुए अपनी जीभ को नली की तरह मोड़कर मुंह से बाहर निकालें। मुंह से श्वास लेते हुए वायु को पानी के घूंट की तरह अंदर लें, फिर नासिका से श्वास को बाहर निकाल दें।
  • शुरुआत में यह प्राणायाम 5-10 बार करें, फिर धीरे- धीरे इसकी फ्रिक्वेन्सी बढ़ा सकते हैं।

 

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