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जंगल सफारी के लिए फेमस- जिम कॉर्बेट

 शिखा जैन

2nd August 2018

दिल्ली सें 240 किलोमीटर दूर नैनीताल के पास बना यह पार्क दशर्को से रोमांचकारी यात्रा करने वालों की पहली पसंद रहा है।

जंगल सफारी के लिए फेमस- जिम कॉर्बेट
1318.54 वर्ग किलोमीटर के दायरे में फैले इस नेशनल पार्क की सीमाएं नैनीताल, पौड़ी और अल्मोड़ा जिले तक फैली हैं। इस पार्क का नाम प्रसिद्ध ब्रिटिश शिकारी पप्रकृतिवादी और फोटोग्राफर जिम काॅर्बोट के नाम पर रखा गया है। 
 
जिम कॉर्बेट पार्क में लगभग 160 बाघों का आवास है। यह रामगंगा नदी के किनारे स्थित है और यहां के आकर्षक पर्यटन स्थलों को भ्रमण करने तथा साहसिक सफारी के लिए पर्यटक यहां आते हैं। इस पार्क में शेर, हाथी, चीता, हिरण, साम्बर, पाढा, भालू, जंगली सूअर, लंगूर, रेसस बंदर शामिल है। इस पार्क में लगभग 600 प्रजातियों के रंगबिरंगे पक्षी रहते हैं जैसे कि मोर, तीतर, कबूतर, उल्लू, चक्रवाक, मैना, नाॅटहैच, सनबर्ड, बंटिंग, असेरियल कठफोड़वा, बतख, बाज, बुलबुल आदि यहां 25 प्रकार के सरीसृप और 50 से अधिक स्तनधारी प्रजाति के जानवर दिख जाएंगे। इसके अलावा यात्री यहां 51 प्रकार की झाड़ियां, 30 प्रकार के बांस और लगभग 110 प्रकार के विभिन्न वृक्ष देख सकते हैं।
           
इस पार्क में जाने के लिए आप को रामनगर से परमिट लेना होगा। परमिट के बाद ही पार्क में प्रवेश दिया जाता है। नाइट स्टे पार्क में करने के लिए अनुमति लेनी पड़ती है। पार्क के अंदर ही लकड़ी के बने घर होते हें। जिनमें ठहरना अनूठा अनुभव देता है।
 
यहां कॉर्बेट लील विलास, ढिकाला फाॅरेस्ट लाॅज, इनफिनिटी रिजाॅर्ट और रामनगर रिजाॅर्ट बेहतरीन है। इसमें कई सुविधाएं आपके टूर को यादगार बना देगी। यहां नदी के किनारे घड़ियाल, सांप भी आराम से देखे जा सकते हैं। ढिकाला के रोस्ते पर जाते हुए पक्षियों की विभिन्न प्रजातियों के देखने का अवसर मिलेगा। अनुभवी गाइड के साथ ट्रेकिंग पर जाना यहां की लोकप्रिय गतिविधि है।
                       
यहां आने वाले अधिकतर पर्यटक एलीफेंट सफारी का आनंद जरूर लेते हैं। दो घंटे की सैर में आप जंगल की इस दुनिया को करीब से देख पाएंगे। आप जीप सफारी और कैंटर सफारी से भी घूम सकते हैं। दूरबीन और कैमरा साथ ले जाएंगे तो यह टूर न सिर्फ रोमांचक हो जाएगा बल्कि हमेशा के लिए यादगार भी रहेगा। चंद किलोमीटर की दूरी से बाघ को देखना एक अलग ही अनुभव होगा।
                   
कालागढ़ बांध उद्यान के दक्षिण पश्चिम में स्थित है। यह स्थान पक्षियोें को देखने के उत्तम अवसर प्रदान करता है। ठंड के मौसम के दौरान प्रवासी पक्षी मुख्य रूप से मुरगाबी यहां सामान्य रूप से देखी जा सकती हैं।
               
कॉर्बेट नेशनल पार्क में कोसी नदी पर राफ्टिंग का अवसर मिलता है। पार्क में विभिन्न नदी राफ्टिंग के लिए आवश्यक उपकरण और सुविधाएं प्रदान करते हैं. यहां फीशिंग का मजा भी लिया जा सकता है। यहां कई रिजोर्ट भी है जो मछली पकड़ने के लिए विशेष सुविधा भी देते हैं। यहां आप जंगल सफारी जिसमें जीप सफारी शामिल है उसका भी आनंद ले सकते हैं।
                       
कॉर्बेट म्यूजियम में घुसते ही टिकट घर है। वहां जिम कॉर्बेट साहेब की एक मूर्ति लगी है। फिर आगे उनका घर बना है जहां पर उनकी बहुत सी तस्वीरें लगी हैं। उनकी मां और एक बहन की फोओ भी लगी हैं। उनका बेडरूम, स्टडी रूम, मीटिंग हाॅल सब पुरानी यादों को संजोए आज भी ऐसे ही हैं। उनकी कुछ किताबें रखी हुई हैं। यहां ऐसे बहुत से दुलर्भ चित्र देखने को मिलेंगे। 
 
कॉर्बेट वाॅटरफाॅल तक पहुंचने का रास्ता भी जंगल का ही है। यहां नील गाय भी टहलती हुई दिख जाती हैं। आगे पहुंचने पर एक झरना दिखता है और झरने के साथ एक छोटी सी नदी भी बह रही होती है। जोकि शायद झरने के पानी से बनी है वहां मछलियां भी तैर रही होती है। हां से गिरते हुए पानी की आवाज बहुत सुंदर लगती है। यह वाॅटरफुल 60 फुठ की उंचाई से गिरता है।
 
सीताबनी एक वन क्षेत्र है जो पक्षियों को देखने के लिए प्रसिद्ध है और केवल यही एक स्थान है जहां पर्यटक पैदल चल सकते हैं। इस स्थान पर पर्यटक वाल्मीकि मंदिर और एक नदी देख सकते हैं। नदी के किनारे सरीसृप की विभिन्न प्रजातियां देख सकते हैं। एक किंवंदती के अनुसार हिंदू देवी सीता ने अपने निर्वासन के कुछ वर्ष यहां बिताए थे। यह क्षेत्र कार्बेट टाइगर रिर्जव के प्रबंधन के अंतर्गत नहीं आता, बल्कि यह भारतीय पुरात्तव सर्वेक्षण द्वारा प्रबंधित किया जाता है। यह बाघ, हाथी, हिरण, सांबर, किंग कोबरा का प्राकृतिक आवास है। इस क्षेत्र में हाथी सफारी के लिए सीताबनी वन व्यवस्था करता है।
 
यहां के लिए कई टैवल एजेंसियां  3-4 दिन का टूर पैकेज भी आॅफर करती हैं। कुमाउं विकास निगम यहां आने वाले सैलानियसें के लिए कई सुविधाएं देता है।       
रामनगर के रेलवे स्टेशन से 12 किलोमीटर दूर कार्बोट नेशनल पार्क है। रामनगर रेलवे स्टेशन से छोटी गाड़ियों टैक्सियों और बसो से र्पाक तक पहुंचा जा सकता है। दिल्ली से ढिकाला तक बस भी चलती है। लाॅज पहले से बुक करा सकते हैं आप चाहेे तो यहां आने के लिए दो महीने पहले ही बुकिंग करा लें।
                                                                          
                                             
 

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