GREHLAKSHMI

FREE - On Google Play
OPEN

प्रेग्नेंट महिलाएं रोज करें ये आसन, स्वस्थ रहेगा बच्चा

सुचि बंसल, योगा एक्सपर्ट एवं डाइटीशियन   

10th August 2018

प्रेंग्नेंसी का समय हर होने वाली माँ के लिए खास होता है, साथ ही बेहद नाजुक भी। यह समय बहुत सारी खुशियों के साथ- साथ माँ के स्वास्थ्य के लिए कुछ परेशानियाँ लेकर भी आता है।

प्रेग्नेंट महिलाएं रोज करें ये आसन, स्वस्थ रहेगा बच्चा

शरीर में होने वाले बदलावों से माँ को कुछ दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। लेकिन योग की मदद से इन तकलीफ़ों को काफी हद तक कम किया जा सकता है, साथ ही योग के अभ्यास बच्चे के स्वास्थ्य पर भी अनुकूल प्रभाव डालते है। इन अभ्यासों को गर्भावस्था के तीसरे महीने से शुरू कर सकते है -

बटरफ्लाई पोज या तितली आसन :

 

कमर- गर्दन सीधी रखते हुए पैरों को सामने की ओर फैलाकर बैठ जाएँ। फिर पैरों को घुटनों से मोड़ते हुए ऐसे रखें कि दोनों पैरों के तलवे आपस में मिल जाएँ। यदि संभव हो तो दोनों हाथों से अपने दोनों पैरों को पकड़ने की कोशिश करें और एड़ी को अपने शरीर के जितना नजदीक हो सके लाने का प्रयास करें। सामान्य श्वास लेते हुए अपनी क्षमतानुसार अपने पैरों को तितली के पंखों के समान धीरे- धीरे ऊपर–नीचे करें। अपनी प्रेग्नेंसी की अविधि में नियमित इस आसन को करने से प्रसव के समय होने वाली पीड़ा में कमी होती है और डिलीवरी आसानी से हो जाती है।

कैट पोज या मार्जरी आसन :

 

अपने पैरों को मोड़ते हुए घुटनों के बल खड़े हो जाएँ। आगे की ओर झुककर अपनी हथेलियों को जमीन पर रखें। यदि आप चाहें तो कुशन या तकिये की मदद ले सकती हैं। श्वास लेते हुए सिर को ऊपर की ओर उठाना है, साथ साथ कमर को नीचे की ओर लाना है। फिर श्वास छोड़ते हुए सिर नीचे की तरफ तथा कमर ऊपर की ओर ले जानी है। इस अभ्यास को 5-10 बार करें। इस आसन को करने से गर्भावस्था के समय होने वाले कमर दर्द में बहुत जल्दी आराम मिलता है। इससे कमर, कंधे तथा गर्दन में लचीलापन आता है जिससे पूरी रीढ़ की हड्डी की जकड़न दूर होती है। साथ ही यह तनाव और मूड स्विंग्स को भी ठीक करता है।  

वीर भद्रासन :

 

अपने दोनों पैरों को कुछ दूरी तक फैलाएँ। अपने बाएँ पैर को बायीं ओर घुमाएँ, फिर बाएँ घुटने को 90 डिग्री तक मोड़ें। इस समय दायाँ पैर पीछे की तरफ खिचा हुआ रहेगा। दोनों हाथों को सिर के ऊपर ले जाकर प्रणाम की मुद्रा में रखें और पीठ को खिंचाव दें। 10-15 सेकेंड इसी स्थिति में रहने की कोशिश करें। फिर इसी अभ्यास को दायीं तरफ से करें। यह आसन जांघों, पिंडलियों और टखनों की मांसपेशियों को मजबूत करता है और इनमें खिंचाव लाता है। जिससे प्रसव के समय में आसानी होती है।

चेयर पोज या उत्कट आसन :

 

दोनों पैरों के बीच में कंधों के बराबर गैप रखते हुए सीधे खड़े हो जाएँ। अपने दोनों हाथों को कंधे के समानान्तर पर सामने की ओर फैलाएँ। अब धीरे- धीरे लंबी गहरी श्वास लें और अपने घुटनों को इस तरह मोड़ें कि शरीर की स्थिति इस प्रकार बन जाए जैसे आप किसी काल्पनिक चेयर पर बैठे हैं। जितनी देर इस अवस्था में रुक सकते हैं, रुकें। फिर धीरे से श्वास छोड़ते हुए वापस सामान्य स्थिति में आ जाएँ। इस आसन को 5-10 बार अपनी क्षमतानुसार कर सकते हैं। इस आसन के अभ्यास से बच्चे के जन्म के समय आसानी होती है। साथ ही जांघों और कूल्हों की मांसपेशियाँ मजबूत होती हैं। यह आसन डिलिवरी के बाद चर्बी घटाने में मदद करता है तथा हिप्स और जांघों को सुडौल बनाए रखता है।   

 

ये भी पढ़ें-

योग शुरू करने से पहले ये 10 बातें जाननी हैं बेहद जरूरी

योग आसन में है मां बनने के उपाय

डिप्रेशन की समस्या को कम करता है मूर्धासन

आप हमें फेसबुकट्विटर और यू ट्यूब चैनल पर भी फॉलो कर सकते हैं।

कमेंट करें

blog comments powered by Disqus

पोल

अगर पेपर लीक हो जाए तो क्या फिर से एग्ज़ाम होना चाहिए?

गृहलक्ष्मी गपशप

इनडोर प्लांटिंग : सुंदरता भी, फायदे भी

इनडोर प्लांटिंग...

अपने घर में पौधे लगाना जहां घर के सौंदर्य में चार...

स्मार्ट करियर गोल्स बनाने की सलाह देती हैं गृहलक्ष्मी ऑफ द डे दीपशिखा वर्मा

स्मार्ट करियर गोल्स...

गृहलक्ष्मी ऑफ द डे

संपादक की पसंद

फिक्स्ड डिपॉजिट करने के पहले जान लें ये जरूरी बातें

फिक्स्ड डिपॉजिट...

वर्तमान में कम निवेश में अधिक रिटर्न के लिए वर्तमान...

तेजाब खोखला नहीं कर पाया मेरे हौसलों को

तेजाब खोखला नहीं...

लड़कियों के चेहरे पर तेजाब डालने वालों के लिए ये कविता...

सदस्यता लें

Magazine-Subscription