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वीकेंड भी और कृष्णजन्माष्टमी भी तो क्यों न करें वृन्दावन ट्रिप का प्लान

शिखा जैन

14th August 2018

2 सितम्बर 2018 को पड़ने वाली कृष्णजन्माष्टमी को रविवार का दिन है। इस वीकेंड पर क्यों न भगवान के दर्शन किये जाए और वृन्दावन नगरी में कृष्णजन्माष्टमी के उत्सव का आनंद लेना एक अलग ही अनुभव हो सकता है।

वीकेंड भी और कृष्णजन्माष्टमी भी तो क्यों न करें वृन्दावन ट्रिप का प्लान
वृंदावन और उसके आसपास के इलाके में भगवान श्रीकृष्ण और राधारानी के अनगिनत मंदिर हैं। जहां हमेशा श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। इनमें से कुछ मंदिर एकदम खास हैं जिनके दर्शन करने लोग खासतौर पर आते हैं। वैसे मंदिरों के अलावा भी यहं काफी कुछ है जैसे कई घाट है और शापिंग के लिए बहुत कुछ है। दूसरे शब्दों में कहें तो लोग वीकेंड पर यहां का ट्रिप करते हैं जिसमें भगवान के दर्शनों के साथ साथ पूरे रास्ते खाते-पीते पिकनिक मनाते हुए एन्जाॅय करते हैं।  
बांके बिहारी मंदिर- वृंदावन में बांके बिहारी मंदिर में श्रद्धालु प्रभु की कृपा पाने आते हैं। दर्शन के लिए भक्तों की भीड़ लगी रहती है। हर कोई प्रभु की एक झलक पाने को ललायित रहता हैं। इस मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति मन को मोह लेती है।
वृंदावन निधि वन- इसमें श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलरामजी की प्रतिमा विशेष रूप से दर्शनीय है जो भी वृंदावन आता है वह निधिवन के दर्शन किए बगैर नहीं लौटता. ऐसी मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण आज भी रात के वक्त राधारानी के साथ रास रचाने यहां पधारते हैं। रात को निधिवन पूरी तरह से खाली हो जाता है।तब यहां कोई पशु पक्षी भी नहीं रहते लेकिन फिर भी यदि कोई छिपकर रासलीला देखने की कोशिश करता है तो वह पागल हो जाता है।
 
निधि वन के अंदर ही है ‘रंग महल’ जिसके बारे में मान्यता है कि रोज रात यहां पर राधा और कन्हैया आते हैं। रंग महल में राधा और कन्हैया के लिए रखे गए चंदन की पलंग को शाम को सात बजे के पहले सजा दिया जाता है।  पलंग के बगल में एक लोटा पानी, राधाजी के क्षंगार का सामान, दातुन संग पान रख दिया जाता है. सुबह पांच बजे जब रंग महल का पट खुलता है ता बिस्तर अस्त व्यस्त, लोटे का पानी खाली, दातुन कुची हुई और पान खाया हुआ मिलता है। निधि वन में ऐसे आश्चर्य करने लायक बहुत सी चीजें हैं जिन्हें देखने भी लोग वृन्दावन आते हैं। 
केसी घाट- ऐसा माना जाता है कि वृन्दावन में ही भगवान कृष्ण ने बचपन का अधिकांश समय बिताया था। इसी मान्यता के अनुसार केसी घाट पर ही भगवान कृष्ण दुष्ट राक्षस केशी से लड़े थे और अपने मित्रों व समुदाय को उनकी दुष्टता से बचाया था. आज भी केसी घाट इस घटना को हद्रय में समाए हुए विराजमान है। 
प्रेम मंदिर- वृंदावन का प्रेम मंदिर भी अत्यंत भव्य है। रात के वक्त यहां श्रद्धालुओं की भीड़ ओर भी बढ़ जाती है क्योंकि पूरा मंदिर तब रंग बिरंगी लाइटों से जगमगा उठता है और थोड़़ी थोड़ी देर देर में इसका रंग बदलता रहता है. यहां बेहद शानदार तरीके से झांकियां सजाई गई है। यहां के मंदिर की वास्तुकला भी देखतेे हीे बनती हैं। इसकी खुदी हुई नक्काशी भी देखने योग्य है. यहां दोपहर में कुछ घंटों के लिए मंदिर बंद हो जाते हें फिर शाम को ही खुलते हैं. मंदिर सुबह 12 बजे बंद होकर शाम को 4 बजे ही खुलते हैं। 
कुसुम सरोवर- यह गोवर्धन से लगभग 2 किलोमीटर दूर राधाकुण्ड के निकट स्थापत्य कला के नमूने का एक समूह जवाहर सिंह द्वारा अपने पिता सूरजमल की स्मृति में बनवाया गया है। 1675 से पहले यह कच्चा कुंड था जिसे ओरछा के राजा वीर सिंह ने पक्का कराया उसके बाद राजा सूरजमल ने इसे अपनी रानी किशोरी के लिए बाग बगीचे का रूप दिया और इसे अधिक सुंदर और मनोरम स्थल बना दिया। 
इसके अलावा वृंदावन में दुनिया का सबसे उंचा श्री कृष्ण मंदिर बनने जा रहा है. अगले कुछ सालों में लगभग 300 करोड़ रूप्ये की लागत से इसका निमार्ण होने का अनुमान है. वृंदावन चंद्रोदय मंदिर की उंचाई 700 फुट अथवा 210 मीटर होगी. दिल्ली में 72.5 मीटर के कुतुबमीनार से इसकी उंचाई तीन गुना ज्यादा होगी। 
श्री कृष्ण बलराम मंदिर- इस मंदिर को इस्काॅन मंदिर भी कह जाता है. यहां राधेकृष्ण की प्रतिमा एकदम मनोहारी है जो भी इन्हें देखता है मुग्ध हुए बिना नहीं रहता. इस मंदिर में श्रद्धालु हमेशा झूमते गाते प्रभु की अराधना करते रहते हैं. यह मंदिर रमणरेवती स्थित व्रन्दावन दिल्ली रोड पर बन महाराज के कालेज के ठीक सामने सड़क पर ही है. मंदिर में तीन सान्निधियां है. प्रथम में दांयी और श्री गौरिनिताइ, द्वितीय में श्री कृष्ण बलराम एक तृतीय में श्री राधा कृष्ण युगल ललिता विशाखा सहित है. द्वार से प्रवेश करते ही फव्वारों की लाइन और प्रांगण में एक तमाल वृक्ष है. यह मंदिर तथा अतिथि भवन श्री कृष्ण भावना संघ द्वारा निर्मित हुआ है जिसने विदेशों में अनेक मन्दिरों का निर्माण कराया है. अनेकों अमेरिकन एवं भारतीय भक्तगण वैष्णव धर्म में दीक्षित होकर निवास करते हैं। 
शापिंग- यहां शापिंग के लिए बहुत अच्छा मार्केट हैं जहां भगवान के वस्त्र और और अन्य पूजा सामग्रियां बहुत अच्छी मिलती है. इसके साथ लकड़ी के बने हुए शोपीस भी कई तरह के मिलते हैं. इसके अलावा चूड़ियों और लाख के कड़े यहां बहुत अच्छे और सस्ते दामों पर मिलते हैं. लड़कियों के द्वारा पहने जाने वाली रैपरोन, लाॅन्ग स्कर्ट और लहंगा चोली का फैशन यहां आम है इसलिए उनकी काफी वैराईटी यहां मिलती है जोकि पर्यटकों के द्वारा काफी पसंद की जाती है। 
खानपान- सुबह ब्रेकफास्ट के लिए वृन्दावन काफी मशहूर है यहां सुबह सुबह नाश्ते में आलू की सब्जी, कचैरी काफी पसंद की जाती है इसके अलावा ढोकला, आलू की टिक्की और लस्स्ी का भी जवाब नहीं है. दिन में लंच के लिए भी काफी अच्छे शुद्ध शाकाहारी रेस्टोरेंट मौजूद हैं. वैसे ष्हां आने वाले लोग प्रसाद के रूप में ब्राउन पेड़े ले जाना भी काफी पसंद करते हैं और साथ में रबड़ी भी यहां की काफी फेमस है. 
नोट- यहां लोग सुबह सुबह आते हैं क्योंकि सभी मंदिर दोपहर 1 बजे तक बंद हो जाते हैं इसलिए लोग या तो एक दिन पहले आकर रूकते हैं या फिर सुबह जल्दी पहुंचते हैं ताकि सारे मंदिर देखे जा सके उसके बाद यह मंदिर शाम में 4 बजे खुलते हैं इस समय में लोग भोजन का आनंद लेते हैं या फिर यहां के मार्केट में शापिंग करते हैं। यहां रूकने के लिए बहुत सी धर्मशालाएं और काफी अच्छे होटल भी है। 
 
                                                                           

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