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रोते हुए बच्चे को इन टिप्स से कराएं शांत

गरिमा अनुराग

8th April 2019

रोते हुए बच्चे को इन टिप्स से कराएं शांत
छोटे बच्चों के रोने के पीछे कई वजह होते हैं। वो भूख से भी रोते हैं, डायपर बदलवाने के लिए भी रोते हैं और गैस या किसी अन्य परेशानी की वजह से भी रोते हैं। कभी-कभी दूध पीने के बाद डकार लेने के लिए, गोदी में चढ़ने के लिए, आसपास होने वाले शोर से परेशान होने, बहुत ठंडी या गर्मी लगने की वजह से भी वो रोते हैं। रोते हुए अगर बच्चो को सही तरह से हैंडल न किया जाए तो उनका रोना और बढ़ जाता है। बच्चों को सही से गोदी में रखकर और इन टिप्स को फॉलो करके आप आसानी से अपने रोते हुए बेबी का मूड अच्छा कर सकती हैं। 
 
ऐसे पकड़े गोदी में
 
बच्चे को अपने चेस्ट से सटाकर दोनों हाथों से गोदी में 45 डिग्री पर लें। उसके दोनों हाथों को भी अपने हाथ से सपोर्ट किए रहें। आपको बच्चे को ऐसे गोदी में लेना है कि वो आपके चेस्ट से सटा रहे और उसके दोनों हाथ उशके पूरे बॉडी से अपना कॉन्टैक्ट बनाए रखें। इस तरह गोदी लेने पर बच्चा अच्छा महसूस करता है। 45 डिग्री के एंगल पर रखने से उशे सामने दिखता भी है और ये पोश्चर आराम दायक भी होता है। इसी एंगल पर बच्चे को झूला झुलाने जैसा मूवमेंट कराएं। 
 
कपड़े या ब्लैंकेट में लपेटे
बच्चा अगर ज्यादा रो रहा हो तो उसे कपड़े या ब्लैंकेट में लपेट कर गोद में लें। ब्लैंकेट में लपेटे होने से बच्चों को मां के कोख का एहसास होता है और वो रिलैक्स महसूस करते हैं। 
करवट में लिटाएं
जन्म के पहले कोथ में बच्चे का पोजिशन साइड में लेटे हुए ही होता है, यही वजह है कि जब बच्चा नींद से बार-बार उठकर रोता है और उशे करवट दिलाकर सुलाया जाता है, तो वो आराम से देर तक सो पाता है। 
श्श्श...करके शांत कराना 
जब बच्चा मां की कोख में पल रहा होता है तो जो आवाज़े उसके कान में जाती हैं वो ऐसी ही होती हैं। इसलिए रोते बच्चों को जब ऐसी आवाज़ सुनाई पड़ती है तो वो आराम महसूस करता है। 
झुलाएं
बच्चे को गोद में लेकर झुला सकते हैं, झूले पर या रॉकिंग चेयर आदी पर झुलाने से भी उनका मूड अच्छा होता है और वो शांत होते हैं और जल्दी सोते भी हैं। लेकिन इश बात का धायान रहे कि झूला या बच्चे को गोद में झुलाते हुए सुलाने की आदत न लगने दें। इससे पेरेन्ट्स को बहुत दिक्कत आती है।
उन्हें कुछ जैसे टीथर आदी चूसने दें
बच्चे अपना हाथ चूसकर खुद को शांत करते हैं। हाथ मुंह में न डालकर आप उन्हें पैसिफायर भी दे सकती हैं। ध्यान रहे इसकी भी बच्चे को आदत न लगने दें।
मसाज करें
बच्चों के लिए भी मसाज बड़ों की ही तरह बहुत रिलैक्सिंग होती है। जब बच्चे का मूड सही न हो तो उसे मसाज दें।
बच्चे से बात करें
ये सच है कि बच्चा अभी आपकी भाषा नहीं समझ पाता, लेकिन बच्चे लिप्स पढ़ते हैं। अगर वो बोरियत की वजह से रो रहे होते हैं तो बात करने से भी वो एंटरटेन होते हैं। 
गैस का करें उपचार
ऐसे तो आजकल बच्चे के जन्म के साथ ही डॉक्टर्स उनके लिए गैस की दवा देते हैं कि अगर कुछ समझ न आए तो बच्चे को ये पिलाएं, मगर अगर आपको ऐसा लग रहा है कि बच्चा गैस से परेशान है तो उसे लिटाकर उसके घुटनों को पेट की तरफ मोड़े। बच्चे को थोड़ी देर पेट के बल पर भी लिटाएं। 

 

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