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साईं बाबा के ये 11 वचन करते हैं हर समस्या का समाधान

शिखा पटेल

24th April 2019

कहते हैं कि जीवन में किसी भी तरह की समस्या हो तो साईं बाबा के इन ग्यारह वचनों को पढ़ना चाहिए।

साईं बाबा के ये 11 वचन करते हैं हर समस्या का समाधान
अपने भक्तों का सम्मान हैं साईं। उनकी महिमा के चर्चे हर जगह हर धर्म के लोग करते हैं। आमतौर पर साईं बाबा ने कोई पूजा पद्धति या जीवन दर्शन नहीं दिया। हमेशा एक ही ईश्वर और श्रद्धा-सबुरी पर ही उनका विशेष जोर रहा है लेकिन उनके ग्यारह वचन उनके भक्तों के लिए उनका दर्शन हैं। इन ग्यारह वचनों में जीवन की हर समस्या का समाधान छुपा हुआ है। आइए जानते हैं साईं बाबा के 11 वचन और उनके अर्थ-
 
पहला वचन
 
'जो शिरडी में आएगा, आपद दूर भगाएगा'
 
साईं बाबा की लीला स्थली शिरडी रही है इसलिए साईं कहते हैं कि शिरडी आने मात्र से समस्याएं टल जाएंगी। जो लोग शिरडी नहीं जा सकते उनके लिए साईं मंदिर जाना भी पर्याप्त होगा। 
 
दूसरा वचन
 
'चढ़े समाधि की सीढ़ी पर, पैर तले दुख की पीढ़ी पर'
 
साईं बाबा की समाधि की सीढ़ी पर पैर रखते ही भक्त के दुःख दूर हो जाएंगे। साईं मंदिरों में प्रतीकात्मक समाधि के दर्शन से भी दुःख दूर हो जाते हैं, लेकिन मन में श्रद्धा भाव का होना जरूरी है। 
 
तीसरा वचन
 
'त्याग शरीर चला जाऊंगा, भक्त हेतु दौड़ा आऊंगा'
 
साईं बाबा कहते हैं कि मैं भले ही शरीर में न रहूं लेकिन जब भी मेरा भक्त मुझे सच्चे दिल से पुकारेगा, मैं दौड़ के आऊंगा और हर प्रकार से अपने भक्त की सहायता करूंगा। 
 
चौथा वचन
 
'मन में रखना दृढ़ विश्वास, करे समाधि पूरी आस'
 
हो सकता है मेरे न रहने पर भक्त का विश्वास कमजोर पड़ने लगे। वह अकेलापन और असहाय महसूस करने लगे लेकिन भक्त को विश्वास रखना चाहिए कि समाधि से की गई हर प्रार्थना पूरी होगी। 
 
पांचवां वचन
 
'मुझे सदा जीवित ही जानो, अनुभव करो सत्य पहचानो'
 
साईं बाबा कहते हैं कि मैं केवल शरीर नहीं हूं। मैं अजर-अमर अविनाशी हूं, इसलिए हमेशा जीवित रहूंगा। यह बात भक्ति और प्रेम से कोई भी भक्त अनुभव कर सकता है। 
 
छठवां वचन
 
'मेरी शरण आ खाली जाए, हो तो कोई मुझे बताए'
 
जो कोई भी व्यक्ति सच्ची श्रद्धा लेकर मेरे पास आया है उसकी हर मनोकामना पूरी करना मेरा फर्ज है। 
 
सातवां वचन
 
'जैसा भाव रहा जिस जन का, वैसा रूप हुआ मेरे मन का'
 
जो व्यक्ति मुझे जिस भाव से देखता है, मैं उसे वैसा ही दिखता हूं। यही नहीं जिस भाव से कामना करता है, उसी भाव से मैं उसकी कामना पूरी करता हूं। 
 
आठवां वचन
 
'भार तुम्हारा मुझ पर होगा, वचन न मेरा झूठा होगा'
 
जो व्यक्ति पूरी तरह से समर्पित होगा उसके जीवन के हर भार को उठाऊंगा और उसके हर दायित्व का निर्वहन करूंगा। 
 
नौवां वचन
 
'आ सहायता लो भरपूर, जो मांगा वो नहीं है दूर'
 
जो भक्त श्रद्धा भाव से सहायता मांगेगा उसकी सहायता मैं जरूर करूंगा। 
 
दसवां वचन
 
'मुझमें लीन वचन मन काया , उसका ऋण न कभी चुकाया'
 
जो भक्त मन, वचन और कर्म से मुझ में लीन रहता है, मैं उसका हमेशा ऋणी रहता हूं। उस भक्त के जीवन की सारी जिम्मेदारी मेरी है। 
 
ग्यारहवां वचन
 
'धन्य धन्य व भक्त अनन्य , मेरी शरण तज जिसे न अन्य' 
 
साईं बाबा कहते हैं कि मेरे वो भक्त धन्य हैं जो अनन्य भाव से मेरी भक्ति में लीन हैं। ऐसे ही भक्त वास्तव में भक्त हैं। 
 
कैसे करें साईं बाबा के इन ग्यारह वचनों का जीवन में प्रयोग ?
 
  • पूजा के पहले, सोने से पहले, काम करने के पहले और सोकर उठने के बाद इन वचनों को पढ़ें। 
  • किसी भी बृहस्पतिवार को इन वचनों को पीले कागज पर लाल कलम से लिख लें। 
  • इन वचनों को अपने पूजा स्थान, शयन कक्ष और काम करने की जगह पर लगा दें। 
  • इन्हें पढ़ने के बाद साईं बाबा को दिल से याद करें, आपको साईं बाबा की कृपा जरूर मिलेगी। 

 

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