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प्रसव के दौरान ट्राई करें ये मुद्राएँ 

गृहलक्ष्मी टीम

17th May 2019

प्रसव के दौरान ट्राई करें ये मुद्राएँ 

‘‘मैं जानती हूँ कि प्रसव के दौरान पीठ केबल सीधा नहीं लेट सकते लेकिन कौन सी पोजीशन ठीक रहती है?

आपको प्रसव के दौरान पीठ के बल लेटने की जरूरत नहीं है क्योंकि यह तरीका ज्यादा कारगर भी नहीं होता, इस तरह कई रक्त नलिकाएँ दबने का डर होता है और गुरुत्वाकर्षण की मदद भी नहीं मिल पाती।आप किसी भी पोजीशन में प्रसव कर सकती हैं व उसे अपनी इच्छानुसार बदल भी सकती हैं। इस तरह पोजीशन बदलने से प्रसव की गति भी तेज होती है और बेहतर नतीजे सामने आते हैं।

आप निम्नलिखित में से कोई भी आरामदायक पोजीशन चुन सकती हैं‒

खड़े होकर चलते समय :- लम्बवत होने से दर्द घटेगा और गुरुत्वाकर्षण की मदद भी मिलेगी। शिशु को नीचे तक आने में मदद मिलेगी। हालांकि जब प्रसव पीड़ा तेज होने के कारण चलना मुश्किल हो जाए तो आप लेट भी सकती हैं।

रॉकिंग :- हालांकि शिशु अभी धरती पर नहीं आया लेकिन उसे झूलने में तो आनंद अवश्य आएगा। संकुचन शुरू होने के बाद रॉकिंग कुर्सी में बैठकर आगे-पीछे झूलें। इससे श्रोणि प्रदेश खुलेगा व शिशु नीचे की ओर आएगा।इस प्रक्रिया में गुरुत्वाकर्षण की मदद भी मिलेगी।

उकडूँ मुद्रा :- जब शिशु के जन्म का समय पास आ जाए तो उकडूँ मुद्रा फायदेमंद हो सकती है। इस तरह पेल्विस खुल जाता है और शिशु को नीचे तक आने के लिए खुली जगह मिलती है। आप उकडूँ मुद्रा में बैठने के लिए साथी की मदद ले सकती हैं या वहाँ लगे डंडे को पकड़ सकती हैं। इस तरह आपकी टाँगों को भी ज्यादा थकान नहीं होगी।

बर्थिंग बॉल :- ऐसी बड़ी बर्थ बॉल पर बैठने या झुकने से पेल्विस खुलती है और आप लंबे समय तक उकडूँ मुद्रा बना सकती हैं।

बैठने की मुद्रा :- आप बिस्तर पर, साथी की बाँहों, या बर्थ बॉल का सहारा लेकर बैठ सकती हैं। इससे गुरुत्वाकर्षण की मदद मिलेगी, संकुचन का दर्द घटेगा। यदि बर्थिंग कुर्सी मिल सके तो उसका प्रयोग कर सकती हैं।

घुटनों के बल :- बैक लेबर है? घुटनों के बल कुर्सी या साथी की गोद में झुकें, खासतौर से जब शिशु का सिर आपकी रीढ़ की हड्डी पर दबाव डाल रहा हो। इससे आप पर दबाव घटेगा और शिशु आगे की ओर आएगा। इसमें जन्म के समय होने वाला दर्द भी काफी घटता है।

हाथ घुटने :- बैक लेबर में चौपाया मुद्रा भी कारगर हो सकती है। इस तरह आप आराम से पेल्विक टिल्ट कर सकती हैं साथ ही पीठ की मालिश भी की जा सकती है। प्रसव चाहे कैसा भी हो, इस मुद्रा में दर्द घटेगा व गुरुत्वाकर्षण की मदद मिलेगी।

एक ओर लेटना :- बैठ कर या उकडूँ मुद्रा में थक गई हैं? तो एक ओर करवट लेकर लेट जाएँ। इससे खास रक्त नलिकाओं पर दबाव नहीं पड़ेगा। संकुचन का दर्द घटेगा व प्रसव की प्रक्रिया भी तेज होगी।

याद रखें कि प्रसव की सबसे बेहतर पोजीशन वही है, जो आपके अनुकूल हो। जब भी मन चाहे,अपनी पोजीशन में थोड़ा बदलाव लाएँ। अगर आपकी लगातार जांच हो रही है तो चलना मुमकिन नहीं होगा लेकिन आप एक ही जगह पर कई तरह की पोजीशन बदल सकती हैं। एपीड्यूरल के दौरान भी बैठकर, करवट लेकर लेटकर, या रॉकिंग पोजीशन बनाई जा सकती है।

 

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