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शिशु के जन्म के बाद कुछ ऐसा होता है पहला सप्ताह

गृहलक्ष्मी टीम

30th May 2019

शिशु के जन्म के बाद कुछ ऐसा होता है पहला सप्ताह

प्रसव और शिशु के जन्म के पश्चात का पहला सप्ताह

बधाई हो! आप चालीस सप्ताह से जिस पल की प्रतीक्षा में थीं, वह पहुँचा है।गर्भावस्था के लंबे दौर प्रसव पीड़ा को भी आप काफी पीछे छोड़ आई हैं। अब आप अधिकारिक रूप से माँ हैं और खुशियों की नन्हीं-सी पोटली, पेट से निकलकर बाँहों में पहुंची है। लेकिन यह दौर शिशु के अलावा और बहुत कुछ अपने साथ लाता है, कई नई तरह के लक्षण (प्रेगनेंसी की विदाई से जुड़े दर्द, तकलीफें आदि) कई नए तरह के सवाल (पसीना इतना क्यों रहा है? डिलीवरी के बाद भी संकुचन क्यों हो रहा है। क्या मैं दोबारा कभी बैठ पाऊंगी? अभी भी मुझे 6 महीने का गर्भ जैसा क्यों दिखता है? ये छातियां किसकी हैं? उम्मीद है कि आपके पास पहले से इनमें से कई सवालों के जवाब होंगे क्योंकि एक बार मम्मा बनने के बाद पढ़ने की फुर्सत किसे होती है?

आप क्या महसूस कर रही होंगी?

डिलीवरी के प्रकार के अनुसार ही प्रसव के बाद पहले सप्ताह की स्थिति निर्भर करती है। इसके अलावा कुछ व्यक्तिगत लक्षण भी हो सकते हैं

शारीरिक लक्षण :-

  •   छातियों में काफी तकलीफ व रक्त संकुलता
  •   लाल आँखें, आंखों के आसपास काले धब्बे
  •   कब्ज, पहले कुछ दिन शौच में कठिनाई
  •   उठते-बैठते समय दर्द व चुभन
  •   सी-सैक्शन के बाद पैरीनियल बेचैनी
  •   थकान
  •   योनि से रक्तस्राव (मासिक धर्म की तरह) पेट के निचले हिस्से में ऐंठन (गर्भाशय संकुचन के कारण)
  •   टांकों वाली जगह खिंचाव, दर्द व बेचैनी
  •   चीरे के आसपास दर्द या सुन्नपन
  •   एक-दो दिन मूत्र शौच में कठिनाई
  •   पूरे शरीर में दर्द
  •   रात को बहुत पसीना आना
  •   स्तनपान के दौरान निप्पलों में दर्द या दरारें

  भावनात्मक लक्षण

  •   शारीरिक, भावनात्मक चुनौतियों को बाधा
  •   शिशु की देखरेख के लिए तनाव
  •   दोनों के बीच मूड में उतार-चढ़ाव
  •   स्तनपान शुरू कराने में कठिनाई होने पर कुंठा
  •   शिशु के साथ नया जीवन आरंभ करने की उत्तेजना

 आप क्या सोच रही होंगी?

‘‘मैंने डिलीवरी के समय थोड़े रक्तस्राव की अपेक्षा की थी लेकिन जब मैं पहली बार बिस्तर से उठी तो तब भी रक्तस्राव हो रहा था, मैं घबरा सी गई’’

अपने पास पैड रखें और निश्चिंत हो जाएं। गर्भाशय से निकलने वाला रक्त, म्यूकस व उत्तक, ‘लोकिया’ कहलाते है। ये मासिक धर्म से अधिक मात्रा में निकलते हैं। शुरू-शुरू में लेटकर उठने पर तेज बहाव पता चलता है। यह स्राव पहले कुछ दिनों में गाढ़े लाल रंग का होता है फिर धीरे-धीरे गुलाबी, भूरा, फिर सफेद हो जाता है। बहाव रोकने के लिए टैंपून की बजाए पैड इस्तेमाल करें। ये तकरीबन 6 सप्ताह तक इस्तेमाल करने पड़ सकते हैं। कुछ महिलाओं में तीन माह तक हल्का स्राव होता रहता है। हर किसी का बहाव अलग-अलग होता है।

स्तनपान या ऑक्सीटोसिन के कारण यह स्राव घटता है डिलीवरी के बाद होने वाला संकुचन, गर्भाशय को सही आकार में लौटाने के लिए सहायक होता है। यदि अस्पताल में ही आपको लगे कि रक्तस्राव ज्यादा हो रहा है तो नर्स को बताएँ। यदि घर में असामान्य रक्तस्राव हो तो डॉक्टर को बताने में देर न करें या आपातकालीन कक्ष में जाए।

दर्दों के बाद

‘‘जब मैं स्तनपान कराती हूं तो पेट के निचले हिस्से में ऐंठन के साथ दर्द क्यों महसूस होता है?’’

बदकिस्मती से वे दर्द भरे संकुचन, प्रसव के बाद भी खत्म नहीं होते। गर्भाशय को 2 1/3 पौंड से सिकुड़ कर कुछ औंस में आना है। प्रक्रिया में दर्द तो होगा ही। शिशु के जन्म के बाद शरीर धीरे-धीरे अपने पुराने आकार में लौटता है। आप गर्भाशय के सिकुड़ने का अंदाजा स्वयं लगा सकती हैं।

इस दर्द में तकलीफ तो होती है लेकिन यह फायदेमंद भी है। इनसे गर्भाशय तो सिकुड़ता ही है, रक्तस्राव भी घटता है। स्तनपान के दौरान यह दर्द बढ़ सकता है क्योंकि उस समय संकुचन बढ़ाने वाले ऑक्सीटोसिन का स्राव होता है।

चार से सात दिन में दर्द अपने-आप कम हो जाते हैं। तब तक टाइलीनोल से आराम आ सकता है। यदि दर्द का आराम न आए तो डॉक्टर से पूछें, कोई संक्रमण भी हो सकता है।

पैरीनियल का दर्द

‘‘मेरी एपीसिओटॅमी नहीं हुई और कोई चीरा भी नहीं आया। फिर निचले हिस्से में इतना दर्द क्यों है?’’

 आप 7 पौंड के शिशु के आगमन को नजरंदाज कर रही हैं। चाहे कोई चीरफाड़ नहीं हुई लेकिन उस हिस्से में खरोंचें, तकलीफ या सूजन तो हो ही सकती है। खांसते या छींकते समय यह दर्द बढ़ जाता है व कई दिन तक तो उठने-बैठने में भी तकलीफ होती है। आप अगले भाग में दिए गए टिप्स यहां भी आजमा सकती हैं। यह भी हो सकता है कि शिशु को धकेलने की प्रक्रिया में इस हिस्से में हीमरॉयड्स या फिशर हो गए हों जो कि काफी दर्दनाक हो सकते हैं।

‘‘डिलीवरी के दौरान मुझे टाँके आए हैं।कहीं उनमें संक्रमण तो नहीं हो जाएगा?’’

योनिस्राव से डिलीवरी होने पर या लंबी प्रसवपीड़ा के कारण पैरीनियल हिस्से में दर्द तो होता ही है लेकिन कोई टाँके आएँ तो स्थिति और भी बिगड़ जाती है। किसी भी ताजे घाव की तरह इसे भरने में 7 से 10 दिन का समय लगता है। इस समय के दौरान होने वाले दर्द का यह मतलब नहीं होता कि आपको संक्रमण है।

वैसे भी उस हिस्से की इतनी देखरेख होती है कि संक्रमण का सवाल ही नहीं पैदा होता। नर्स दिन में एक बार सूजन या लाली की जांच करती है। वह आपको संक्रमण से बचाव के निर्देश भी देती है। वहीं निर्देश सबके लिए लागू होते हैं। फिर चाहे उस हिस्से में टांके न भी हों।

हर 4 से 6 घंटों में ताजा पैड लगाएँ।

डॉक्टर के कहने पर उस हिस्से पर एंटीवायोरिट सोल्यूशन मिला गर्म पानी डालकर सेंक करें। मूत्र के बाद उस हिस्से को साफ करें। सुखाते समय पैड को आगे से पीछे की ओर ले जाएँ। इसे रगड़ने की बजाए आराम से करें।

उस हिस्से को हाथों से न छुएँ।

अगर टांकों की वजह से ज्यादा दर्द हो तोः

बर्फ लगाएं :- सूजन घटाने व राहत पाने के लिए उस हिस्से पर बर्फ मलें। सर्जिकल दस्ताने में बर्फ भरें या मैक्सीपैड में बर्फ डालकर पैक बना लें। दिन में हर दो घंटे बाद सेंक करें।

गर्माहट दें :- सिज़ बाथ लें। कटिस्नान में नितबों को गर्म पानी के टब में डुबो कर बैठते हैं बाकी शरीर पानी से बाहर होता है। हर रोज 20 मिनट के गर्म सेंक से भी काफी फायदा होगा ।

सुन्न करें :-स्प्रे, क्रीम या ट्यूब के रूप में कोई दर्द निवारक दवा लगाकर उस हिस्से को सुन्न रखें। इस बारे में अपने डॉक्टर की मदद लें।भार हटाएं:-नीचे वाले हिस्से पर शरीर का कम से कम भार डालें। सीधे लेटने की बजाए करवट ले कर लेटें। बैठते समय नीचे कोई तकिया रख लें। बाजार में ऐसे ट्यूब उपलब्ध हैं, जिन पर बैठने से पैरीनियम पर दबाव नहीं पड़ता।

ढीला छोड़ें :- तंग अंतःवस्त्र न पहनें। उनकी रगड़ से भी तकलीफ बढ़ सकती है। इससे आराम आने में भी ज्यादा समय लग जाएगा।

व्यायाम करें : चाहे उस हिस्से में सुन्नपन के कारण कीगल व्यायाम करने से पता न चले लेकिन इससे फायदा जरूर होता है उस हिस्से के रक्त प्रवाह में सुधार होता है व मसल टोन भी सुधरती है।

अगर निचले हिस्से में काफी सूजन, दर्द या लाली हो या कोई बुरी गंध आए तो संक्रमण की संभावना हो सकती है। तब डॉक्टर को बताने में देर न करें।

 डिलीवरी की चोटें

‘‘ऐसा लगता है कि मैं किसी बर्थिंग रूम से नहीं, बाक्सिंग रिंग से वापिस आई हूं।ऐसा क्यों लग रहा है?’’

ऐसा लग रहा है व महसूस हो रहा है कि आपकी पिटाई हुई है प्रसव के बाद ऐसा होना स्वभाविक है। क्योंकि आपने रिंग में लड़ते मुक्केबाजों से कहीं ज्यादा मेहनत की है, तभी तो शिशु धरती पर आया है। आपने उन तेज संकुचनों व गहरे धकेलने को इस शरीर पर झेला है। हो सकता है कि आँखों के नीचे काले धब्बे आ गए हों। कहीं बाहर जाएँ तो धूप का चश्मा पहनें व दिन में कई बार ठंडा सेंक दें।छाती में दर्द या सांस लेने में भी मुश्किल हो सकती है। गर्म पानी के स्नान या हीटिंग पैड से आराम आ सकता है। टेल बोन के आसपास दर्द हो तो गरमाहट या मालिश से आराम आएगा।

 शौच (मूत्र) में कठिनाई

‘‘डिलीवरी के कई घंटे बाद भी मैं मूत्र नहीं कर पा रही।’’

प्रसव के पहले 24 घंटों में, कई महिलाओं को मूत्र में कठिनाई होती है। कई महिलाएँ मूत्र करना चाहती हैं परंतु इसके बावजूद कर नहीं पातीं। मूत्र के साथ काफी जलन और दर्द होता है। ऐसा कई कारणों से होता है‒

ब्लैंडर की रोककर रखने की क्षमता बढ़ जाती है इसलिए आपको बार-बार मूत्र की इच्छा ही नहीं होती।

ब्लैडर या मूत्राशय डिलीवरी के दौरान चोटिल हो जाता है और भरा होने पर भी खाली होने का संकेत नहीं दे पाता।

एपीड्यूरल के कारण भी मूत्राशय की संवेदनशीलता घट जाती है।

पैरीनियल की दर्द या सूजन भी मूत्र में कठिनाई पैदा करते हैं।

चीरे या टाँकों की वजह से मूत्र करते समय जलन या दर्द महसूस होते हैं। कई बार मूत्र की पोजीशन बदलने से भी जलन घट सकती है या फिर मूत्र करते समय गर्म पानी की बौछार डालने से भी आराम आता है।

यदि आपने लंबे प्रसव के दौरान कोई तरल पदार्थ नहीं लिया तो डीहाइड्रेशन की वजह से भी ऐसा हो सकता है।

कई बार दर्द का डर, प्राइवेसी की कमी,बेचैनी, बैडपैन या बाथरूम में किसी के साथ जाने जैसे मनोवैज्ञानिक कारण भी उत्तरदायी होते हैं।

यदि आप डिलीवरी के 6 से 8 घंटे के दौरान मूत्र नहीं करतीं तो संक्रमण हो सकता है। नर्स आपसे यह भी आग्रह कर सकती है कि आप पहला मूत्र बैडपैन या किसी बर्तन में करें ताकि वह उसकी मात्रा नाप कर मूत्राशय की स्थिति का अंदाजा लगा सकें। इसके लिए आप निम्नलिखित उपाय आजमाएँ

अधिक मात्रा में तरल पदार्थ लें।

बिस्तर से उठकर थोड़ा टहलें ताकि मल व मूत्र की प्रक्रिया सुचारू हो सके।

यदि बाथरूम में नर्स के जाने से अजीब लगे तो उसे बाहर इंतजार करने को कहें।वह आपको पैरीनियल की साफ-सफाई के बाद में बता सकती हैं।

यदि कमजोरी की वजह से बैडपैन लेना पड़े तो उस हिस्से में गरम पानी की धार डालें ताकि मूत्र की इच्छा हो। पैन पर लेटने की बजाए बैठने की कोशिश करें। यदि कमरे में अकेली होंगी तो बेहतर होगा।

अपने निचले हिस्से को गरम या ठंडा सेंक दें।

मूत्र करते समय पानी चला दें इससे भी मूत्र में आसानी होगी।

यदि सभी उपाय फेल हो जाएँ डॉक्टर को ट्यूब से मूत्राशय खाली करना पड़ेगा।इससे बचना चाहती हैं तो हमारे उपाय ही आजमा लें।

अगर कुछ दिन बाद भी मूत्र करने में कठिनाई हो तो शायद आपको संक्रमण भी हो सकता है।

मेरा मूत्र पर नियंत्रण नहीं रहा। यह अपने-आप रिसने लगता है’’

शिशु के जन्म के समय होने वाला शारीरिक तनाव, शरीर की कई व्यवस्थाएं अनियमित कर देता है। या तो मूत्र हो नहीं पाता या फिर अपने-आप होने लगता है।पैरीनियल की मसल टोन घटने की वजह से ऐसा होता है। प्रसव के बाद कीगल व्यायाम काफी असरकारक हो सकते हैं। यदि फिर भी यह परेशानी कम न हो तो डॉक्टर की मदद लें।

प्रसव के बाद डॉक्टर को कब बुलाएँ

कुछ महिलाएँ तो` प्रसव के बाद स्वयं को शारीरिक व मानसिक रूप से काफी फिटपाती हैं और जल्दी ही संभल जाती हैं लेकिन कुछ के लिए मुश्किलों का भी अंत नहीं होता। ऐसे में डॉक्टर को कब बुलाएँ या फोन मिलाएँ‒कुछ ही घंटों में दो-दो पैड बदलने पड़ें यानी रक्तस्राव ज्यादा हो तो नर्स से फोन पर पूछें कि अस्पताल जाने की जरूरत है या नहीं यदि बात न बने तो बर्फ का सेंक भी कर सकती हैं।

प्रसव के पहले सप्ताह में गाढ़े लाल रंग का स्राव हो तो डॉक्टर को बताएँ। मासिक धर्म जैसा हल्का रक्त स्राव तो कई सप्ताह तक जारी रहेगा। स्तनपान के दौरान इसका प्रवाह बढ़ सकता है।

गंदी बदबू से भरा रक्तस्राव! इसकी गंध सामान्य मासिक धर्म जैसी ही होनी चाहिए।

रक्तस्राव में खून के बड़े थक्के आना।कभी-कभी एकाध थक्का आना तो सामान्य बात है।

पहले कुछ दिनों में बिल्कुल रक्तस्राव न होना।

बिना सूजन के दर्द, बेचैनी डिलीवरी के कुछ समय बाद पेट के निचले हिस्से में ऐंठन

पहले कुछ दिनों के बाद पैरीनियल हिस्से में लगातार दर्द

24 घंटे बाद पूरा दिन 1000 फॉरेनहाइट से ज्यादा बुखार

सिर चकराना

जी मिचलाना व उल्टी

वक्ष संक्रमण के लक्षण एवं दर्द

चीरे के आस-पास हल्की सूजन, लाली

24 घंटे बाद मूत्र में कठिनाई, दर्द, बदबूदार मूत्र। डॉक्टर तक जाने से पहले ढेर सा पानी पीएं

छाती में तेज दर्द, दिल की तेज धड़कन,पांव पसारने में दर्द। डॉक्टर तक जाने से पहले पांव ऊंचे करके रखें।

यदि अवसाद पर काबू न पा सकें। बच्चे के प्रति क्रोध, हिंसा के भाव। वैसे इस विषय में विस्तृत जानकारी दी चुकी है।

शौच में कठिनाई

‘‘डिलीवरी के दो दिन बाद भी मैं मल-त्याग नहीं कर पाई हूँ, जाने की इच्छा होने के बावजूद ऐसा लगता है कि कहीं टांके खुल जाएँ।’’

हर माँ को प्रसव के बाद इस हालात से दो-चार होना ही पड़ता है। जब तक आप इससे निकल नहीं जाएँगी। बेचैनी और डर बना रहेगा।

कई बार इसके लिए कई मनोवैज्ञानिक कारण भी उत्तरदायी होते हैं। कई बार शिशु के जन्म के समय पेट की मांसपेशियों पर ज्यादा खिंचाव पड़ने से उनकी कार्यक्षमता घट जाती है। कई बार प्रसव से पहले व बाद में भी शौच हो चुका होता है। इसके बाद आपने कुछ ठोस खाया नहीं होता इसलिए पेट साफ होता है। वैसे सबसे ज्यादा डर तो यही होता है कि मल के लिए जोर लगाने से दर्द होगा या टाँके खुल जाएँगे। ऐसा लगता है कि हीमरॉयड्स की हालत और बिगड़ जाएगी। अस्पताल में गोपनीयता की भी कमी होती है।

हालांकि आप आसानी से इन हालात का सामना कर सकती हैं, हमारे दिए गए उपाय आजमा कर देखें।

चिंता करें:- इस बारे में चिंता करने से कोई फायदा नहीं होने वाला। टांके खुलने की चिंता न करें। यदि कुछ दिन तक शौच न हो सके, तो भी घबराएं नहीं!

रेशेदार पदार्थ :- अस्पताल या बर्थ सेंटर में हैं तो अपने आहार में फल, सब्जियों व साबुत अनाज से बने खाद्य पदार्थ लें। सेब, नाशपाती,सूखे मेवे वगैरह लेने से रेशे की पूर्ति होगी।ऐसा खाना न खाएँ, जिससे कब्ज हो। बेड के किनारे पड़ा चॉकलेट का डिब्बा लुभावना तो है मगर उसे खाने से कब्ज हो सकती है।

तरल पदार्थों की मात्रा :- भारी मात्रा में तरल पदार्थ लें ताकि कब्ज न हो सके। वैसे तो पानी से बात बन जाएगी लेकिन सेब का जूस भी मददगार हो सकता है। गर्म पानी में नींबू निचोड़ कर भी पी सकती हैं।

चबाकर खाएँ :- चबा कर खाने से खाना जल्दी हजम होगा और पाचन तंत्र सही तरीके से काम करने लगेगा।

चहलकदमी करें :- माना आप डिलीवरी के बाद दौड़ने की हालत में नहीं हैं लेकिन हल्की चलहकदमी तो कर ही सकती हैं। बिस्तर में बैठे-बैठे कीगल व्यायाम करें, इससे गुदा मार्ग को भी फायदा होगा। घर में शिशु के साथ टहलें।

तनाव पालें :- तनाव न पालें, इससे टांके तो नहीं खुलेंगे पर हीमरॉयड्स की हालत और भी बिगड़ सकती है। कटि-स्नान करें। दवा लगाएँ। गर्म या ठंडा सेंक करें।

मल पतला करने की दवा :- अस्पताल मल पतला करने की दवा भी मिलती है ताकि शौच करने में कठिनाई न हो।

हालांकि पहली बार शौच में थोड़ा दर्द हो सकता है लेकिन डरें नहीं। मल नरम हो जाएगा तो आपकी तकलीफ घट जाएगी और सबकुछ पहले की तरह ठीक हो जाएगी।

 

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