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शिशु के जन्म के बाद कुछ ऐसा होता है पहला सप्ताह

गृहलक्ष्मी टीम

30th May 2019

जरूरत से ज्यादा पसीना आना

‘‘मैं रात को अचानक पसीने-पसीने होकर उठ जाती हूँ।क्या सामान्य है?’’

  यह उलझन भरा होने के बावजूद सामान्य है। नई माताओं को कई कारणों से काफी पसीना आता है। आपके हार्मोन का स्तर घटने लगता है क्योंकि अब आप गर्भवती नहीं हैं।बार-बार शौच से भी शरीर में से फालतू द्रव्य निकलते हैं। पसीना बहुत ज्यादा आता है जो कि असुविधाजनक लग सकता है। आप अपने तकिए के ऊपर तौलिया बिछा कर लेटें ताकि वह रात को भीगे नहीं और आपको अच्छी नींद आए। पसीने की इस पूर्ति के लिए भारी मात्रा में तरल पदार्थ लें चाहे आप स्तनपान करा रही हों या नहीं।

बुखार

‘‘मैं हाल ही में अस्पताल से लौटी हूं और मुझे 101 बुखार है।क्या मुझे डॉक्टर को फोन करना चाहिए?’’

अगर डिलीवरी के बाद आपकी तबियत ठीक न हो तो डॉक्टर को बताने में ही भलाई है। यह बुखार कई बार प्रसव के बाद होने वाले संक्रमण के कारण हो सकता है या फिर इसकी कोई दूसरी वजह भी हो सकती है। कई बार उत्तेजना व थकान की वजह से भी बुखार हो सकता है। वैसे तो स्तनपान के शुरूआती दिनों में भी शरीर का तापमान हल्का सा बढ़ जाता है लेकिन प्रसव के पहले तीन सप्ताह में,बुखार एक दिन से ज्यादा रहे तो डॉक्टर को दिखाएँ। तेज बुखार के साथ सर्दी या उल्टियां हों तो तत्काल इलाज की जरूरत होगी।

स्तनों का फैलाव

‘‘मेरी छातियों में दूध उतर आया है।मेरी छातियां सामान्य से तीन गुना फैल गई हैं।ये काफी सख्त हो गई हैं।छूने से इतना दर्द होता है कि मैं ब्रा तक नहीं पहन पा रही।जब तक शिशु स्तन पान करेगाऐसे ही चलता रहेगा?’’

आपके न सोचने के बावजूद छातियों का आकार बढ़ गया। वे सूज गईं और छूने से भी दर्द हो रहा है। अगर सूजन की वजह से निप्पल भी भीतर की ओर धंस गए तो आपको स्तनपान कराते समय दर्द होगा और शिशु को भी दूध पिलाने में तकलीफ होगी।

हालांकि खुशखबरी यह है कि ऐसा लंबे समय तक नहीं चलेगा। दूध की पूर्ति व माँग का संतुलन बनते ही ये परेशानियाँ मिट जाएँगी।

‘‘मैं स्तन पान नहीं कराना चाहती पर मैंने सुना है कि दूध सुखाने में काफी तकलीफ होगी?’’

  प्रसव के दो-तीन दिन के भीतर ही स्तनों में दूध उतर आता है स्तनों में दूध तभी बनता है जब आपको उसकी जरूरत होती है अगर दूध इस्तेमाल नहीं होगा तो वह बनना बंद हो जाएगा। हालांकि कई दिनों या सप्ताह तक दूध का रिसाव हो सकता है लेकिन स्तन कुछ ही दिन में सामान्य हो जाएँगे। इस समय आप आइसपैक या सहारा देने वाली ब्रा इस्तेमाल कर सकती हैं। निप्पल न मलें, दूध न निकालें या गर्म पानी से स्नान न करें। इससे दूध बनेगा और तकलीफदेह प्रक्रिया जारी रहेगी।

दूध कहां गया?

‘‘डिलीवरी के दो दिन बाद भी मेरे स्तनों में कोलोस्ट्रम तक नहीं बना है।क्या मेरा शिशु भूखा रहेगा?

नहीं, शिशु भूखा नहीं रहेगा। उसे अभी भूख भी नहीं लगी है। शिशु जन्म से ही भूखे नहीं होते। प्रसव के तीसरे-चौथे दिन तक, जब उसे भूख लगेगी तब तक आपकी छातियों में उसके लिए काफी दूध होगा।

अभी भी आपके स्तन खाली नहीं हैं।उनमें शिशु के पोषण के लिए आवश्यक कोलोस्ट्रम के अंश अवश्य होंगे। इस समय शिशु को एक चम्मच भी मिल जाए तो काफी है लेकिन जब तक स्तन पूरी तरह भर न जाए हाथों से दबाकर दूध नहीं निकाल सकते एक दिन का शिशु स्वयं स्तन चूसकर ही अपना पेटभर लेगा।

आपसी प्यार

‘‘मुझे उम्मीद थी कि शिशु को देखते ही मेरे मन में उसके लिए प्यार उमड़ आएगा लेकिन अब भी मेरे मन में ऐसी भावनाएँ पैदा नहीं हो रहीं।ऐसा क्यों होरहा है?’’

डिलीवरी के तुरंत बाद जब आपके हाथों में कपड़े की पोटली आती हैं तो उसमें लिपटे सलोने शिशु का मुखड़ा आपका मन मोह लेता है। वह आपकी ओर देखता है तो आप उसके मुख पर चुंबनों की झड़ी लगा देती हैं और उसी पल माँ और बच्चे का आपसी प्यार और भी गहरा जाता है।

हर गर्भवती माँ ऐसा ही सपना देखती है लेकिन हकीकत में ऐसा नहीं हो पाता। प्रसव की लंबी थकान के बाद लाल, झुर्रीदार चेहरे वाला या फिर सूजे हुए चेहरे वाला शिशु आपकी बांहों में दिया जाता है। आपको उसके चेहरे में अपनी कोई पहचान दिखाई नहीं देती न ही उसका चेहरा, विज्ञापनों में दिखाए गए गोल-मटोल शिशुओं जैसा होता है। आपकी लाख कोशिशों के बाद वह स्तन से दूध नहीं पी पाता और अजीब से स्वर में रोता रहता है आपको यही लगने लगता है कि क्या हमारे बीच प्यार का कोई विकल्प नहीं है।

दरअसल हर माँ व शिशु के बीच इस रिश्ते को पनपने में अलग-अलग समय लगता है। कुछ माँओं को प्रसव में कोई दिक्कत नहीं आती। वे पूरे जोश और उमंग से शिशु का स्वागत करती हैं और दूसरी ओर से प्रतिक्रिया भी मिलती है जबकि कई मामलों में माँ प्रसव के बाद इतनी निढाल हो जाती है कि शिशु को गोद में लेने की हिम्मत तक नहीं बचती।

घर वापसी

आपको व शिशु को डिलीवरी के बाद अस्पताल में कब तक रुकना है। यह आपकी स्थिति पर निर्भर करता है। यदि आप व शिशु फिट है तो डॉक्टर से पूछकर जल्दी छुट्टी ले सकते हैं। ऐसे में पहले ही तय कर लें कि आप अपने शिशु के साथ अगली जांच के लिए किस दिन व किस समय आएँगी। डॉक्टर से पता कर लें कि आने वाले दिनों में आपको किस तरह की परेशानी हो सकती है। डॉक्टर अगली जांच से पहले ही यह जानना चाहेंगे कि कहीं शिशु को पीलिया तो नहीं या उसे पर्याप्त मात्रा में स्तनपान मिल रहा है या नहीं! यदि आप 48 से 96 घंटे तक अस्पताल में रुकती हैं तो पूरा आराम लेने की कोशिश करें घर लौटकर आपको ढेर सी ऊर्जा की आवश्यकता होगी।

आपको भी अपने-आप को थोड़ा समय देना होगा। अपने शिशु की सभी जरूरतें पूरी करें। उसे बांहों में लेकर दुलारें। उसके लिए कुछ गाएँ, उससे बातें करें, उसके नन्हें हाथ-पांव की मालिश करें। धीरे-धीरे आपको उसके बदन से आती बदबू भी अच्छी लगने लगेगी।जल्दी ही आप स्वयं को एक स्नेही व परिपूर्ण माँ के रूप में देख पाएँगी।

‘‘मेरा शिशु प्रीमेच्योर था इसलिए उसे आई.सी.यू में ले जाना पड़ा।डॉक्टर ने कहा कि उसे वहाँ दो सप्ताह तक रखा जाएगा।क्या उससे प्यार का रिश्ता बनाने में देर नहीं हो जाएगी?’’

हालांकि जन्म के एक दम बाद शिशु को दुलारने का सुख ही कुछ और होता है लेकिन इस चरण को आप उसकी तबीयत संभलने के बाद भी पूरा कर सकती हैं। इससे शिशु व माता-पिता के बीच एक दीर्घकालीन संबंध पनपता है।आप शिशु को आई.सी.यू में रखने के दौरान भी छू सकती हैं, उससे बात कर सकती हैं। अस्पतालों में माता-पिता को ऐसा करने की छूट दी जाती है। वहाँ मौजूद नर्स से पूछें कि आप अपने शिशु के साथ अधिकतर समय कैसे बिता सकती हैं। या दखें कि जब आप शिशु के साथ घर में रहना शुरू करेंगी तो आपके बीच एक गहरा स्नेह विकसित होगा।

कमरे में शिशु

‘‘गर्भावस्था के दौरान तो सोचकर अच्छा लगता था कि प्रसव के बाद शिशु मेरे कमरे में रहेगा लेकिन मैं नहीं जानती थी कि उस समय मेरी थकान से क्या हालत होगी।अब मैं शिशु को दूसरी जगह ले जाने को कह रही हूँ।मैं कितनी बुरी मां हूँ’’

आप सचमुच एक अच्छी माँ हैं और माँ होने की चुनौती को पूरा करके हटी हैं। अब आप दूसरी चुनौती लेने जा रही हैं। इस दौरान थोड़ा आराम आपके लिए सामान्य है और जरूरी भी है। डिलीवरी की थकान की वजह से आप शिशु की देखरेख नहीं कर पा रहीं तो इसमें शर्मिंदा होने वाली कोई बात नहीं है।प्रसव व डिलीवरी के बाद आपका शरीर निढाल है, आप कई घंटों से सोई नहीं हैं।दवाओं का नशा सिर चढ़ रहा है। ऐसे में अगर आप कुछ समय नींद पूरी करना चाहती हैं तो कोई हर्ज नहीं है। अपने शिशु के साथ बीते घंटे नहीं समय की गुणवत्ता पर ध्यान दें। घर जाकर तो उसने सारा दिन आपके पास ही रहना है। अभी पूरा आराम ले लें क्योंकि आगे यह मौका नहीं मिलने वाला।

 

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