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कैसे करें ट्विंस बच्चों की देखरेख

शिखा पटेल

31st May 2019

बच्चे के जन्म के बाद से ही पेरेंट्स की जिम्मेदारियां काफी बढ़ जाती हैं। वहीं बात जब जुड़वां बच्चों की हो तो चिंता होना लाज़मी है। ट्विंस की देखरेख, खानपान और उन्हें संभालने की जिम्मेदारी एक बड़ा काम है।

कैसे करें ट्विंस बच्चों की देखरेख
कभी-कभी एक बच्चे की देखभाल में भी कई समस्याएं आती हैं तो जुड़वां बच्चों की स्थिति में सारी परेशानियां दोगुनी हो जाना बड़ा आसान है। अगर कुछ जरूरी बातों को ध्यान में रखा जाए तो आपकी कुछ मुश्किलें कम हो सकती हैं। आज हम आपको जुड़वां बच्चों की देखभाल करने संबंधी कुछ tips बताएंगे।
 
अगर जुड़वां बच्चे लड़कियां हैं तो
 
आपके जुड़वां बच्चों में अगर दोनों लड़कियां हैं तो चिंता की कोई बात ही नहीं होगी, क्योंकि लड़कियां लड़कों की तुलना में थोड़ी शांत स्वभाव की होती हैं। भूख लगने पर और सोने के लिए बहुत कम रोती हैं। जुड़वां बच्चों में लड़कियां किसी भी खिलौने से संतुष्ट हो जाती हैं।
 
अगर जुड़वां बच्चे लड़के हैं
 
अगर आपके जुड़वां बच्चों में से दोनों लड़के हैं तो आपके लिए कुछ राहत की बात हो सकती है। क्योंकि दोनों की कुछ आदतें और पसंद एक जैसी हो सकती हैं। चाहे बात खिलौनों की हो या कपड़ों की, अगर दोनों की पसंद मिलती हो तो दोनों बच्चों
में आपसी समझ जरूर होगी। विशेषज्ञों का कहना है कि मां के गर्भ में रहते हुए ही जुड़वां बच्चों में आपसी समझ विकसित हो जाती है।
 
जुड़वां बच्चों में एक लड़का और एक लड़की
 
जुड़वां बच्चों के प्रकारों में सबसे ज्यादा मुश्किलें एक लड़के और एक लड़की की देखभाल में होती है, क्योंकि दोनों की पसंद और आदतें बिल्कुल एक जैसी नहीं होती, इसीलिए उन्हें ज्यादा देखरेख की जरूरत होती है।
 
ट्विंस को सुलाना
 
अगर आप यह सोचती हैं कि आपके जुड़वां बच्चे होने पर आप कभी चैन की नींद नहीं सो सकतीं तो यह गलत है। बच्चों को अलग-अलग बिस्तर पर सुलाने से आप भी चैन की नींद सो सकती हैं। कोशिश करें कि बच्चों को रोजाना एक ही समय पर सुलाएं, ताकि उनमें समय से सोने की आदत बने और आपको भी आराम करने का कुछ समय मिल सके।
 
जुड़वां बच्चों को स्तनपान कैसे कराएं
 
जब बात जुड़वा बच्चों को स्तनपान करवाने की हो तो यह बहुत ही मुश्किल भरा काम महसूस होता है। जुड़वां बच्चों को एक साथ स्तनपान कराना संभव नहीं होता, इसीलिए उन्हें बारी-बारी से ही स्तनपान कराएं। ब्रेस्टफीडिंग के लिए की पोजीशन के बारे में जान लें। याद रखिए, आप अपने जुड़वा बच्चों के लिए कोई भी पोजि़शन इस्तेमाल करें, बस आप और बच्चा उस अवस्था में आराम महसूस
करें, यही सबसे ज़रूरी है।
 
जुड़वां बच्चों की तेल मालिश
 
जब जुड़वां बच्चे मां के गर्भ में होते हैं तो उन्हें फैलने के लिए ज्यादा जगह नहीं मिल पाती, इसीलिए नवजात जुड़वां बच्चों की मालिश बेहद जरूरी होती है। इससे उनका शारीरिक विकास होता है, लेकिन जुड़वां बच्चों के साथ अगर आप अकेली हैं तो बच्चों की मालिश करते वक्त और ज्यादा सावधानियां बरतने की जरूरत
होती है। इस बात का ध्यान रखें कि जुड़वां बच्चों में संक्रमण का खतरा अधिक होता है, इसीलिए डॉक्टर के परामर्श से ही तेल को चुनें।
 

 

जुड़वां बच्चों को नहलाना
 
मालिश के बाद जुड़वां बच्चों को नहलाना सबसे अच्छा विकल्प होता है। एक-एक करके बड़ी सावधानी से दोनों बच्चों को नहलाएं। जुड़वां बच्चों के लिए एक ही टब का इस्तेमाल करें, ताकि टब में नहाने के साथ वे थोड़ी देर एक-दूसरे के साथ खेल सकें।
 
रखें ध्यान इन बातों का भी
  • तुलना करना : कभी भी दोनों बच्चों की आपस में तुलना न करें, न ही आस-पड़ोस के लोगों को करने दें। ऐसा करने से दोनों के मन में हीन भावना पनप सकती है।
  • व्यक्तित्व या स्वभाव भी एक समान हों। अपने जुड़वां बच्चों के स्वास्थ्य, स्वभाव और अन्य चीज़ों का अच्छे से निरीक्षण करें। हो सकता है कि एक बच्चा शांत हो और दूसरा बातूनी। ऐसे में अपने शांत बच्चे को ओवर प्रोटेक्ट न करें, बल्कि उसे अपना पक्ष स्वयं रखने दें।
  • पहचान: ज्यादातर लोग अपने जुड़वां बच्चों को एक जैसे कपड़े पहनाते हैं।यही नहीं, उनके नाम भी मिलते-जुलते रख दिए जाते हैं, उन्हें एक जैसे खिलौने भी दिए जाते हैं, जो उनकी पर्सनैलिटी डेवलपमेंट के लिए बिल्कुल भी सही नहीं है, इसलिए उन्हें उनके शौक के अनुसार अलग-अलग खिलौने दें। हां, उनमें शेयरिंग की भावना अवश्य विकसित करें। यही नहीं, अगर जुड़वां बच्चों को एक ही स्कूल में डाल रहे हैं तो उनके सेक्शन अलग रखें, ताकि उनके दोस्त भी अलग-अलग हों।
  • जुड़वां बच्चों को संभालना बहुत ही मुश्किल होता है। प्रेगनेंसी के बाद मां का शरीर बेहद कमजोर हो जाता है और उसे पूरे आराम की जरूरत होती है। ऐसे में घर के किसी भी मैंबर की सहायता लेने से न झिझकें। अगर कोई न हो तो किसी को अपनी हेल्प के लिए रख लें, ताकि आपको थोड़ा आराम और बच्चों को पूरी देखभाल मिल सके।
  • बच्चों को समझें: अगर बच्चे जुड़वां हैं तो इसका यह अर्थ नहीं कि दोनों के शौक, दोनों का अपना अलग-अलग व्यक्तित्व है। ऐसे में उन दोनों की ही अपनी खूबियां और कमियां हैं। उन्हें ऐसे ही अपनाएं। 
  • अपने झगड़े खुद सुलझाने दें : भाई-बहनों के बीच झगड़े होना बहुत ही आम बात है। अगर आपके जुड़वां बच्चे भी झगड़ते हैं तो परेशान न हों। दोनों के बीच होने वाले झगड़ों को उन्हें खुद ही सुलझाने दें। तब तक उनके बीच में न पड़ें, जब तक जरूरी न हो।
 
 
 

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