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सनस्क्रीन से पाएं खूबसूरत त्वचा

बुशरा फातमा

14th June 2019

आज महिलाएं अपनी सुंदरता को लेकर बहुत सजग हो गई हैं, इसलिए गॢमयां शुरू होते ही उन्हें सबसे ज्यादा फिक्र अपनी त्वचा की होती है, जो धूप से अक्सर झुलस कर अपनी खूबसूरती खो देती है। ऐसा ना हो, इसके लिए महिलाएं गर्मी शुरू होते ही अपने कॉस्मेटिक प्रॉडक्ट में एसपीएफ युक्त सनस्क्रीन लोशन का इस्तेमाल करना शुरू कर देती हैं।

सनस्क्रीन से पाएं खूबसूरत त्वचा

अक्सर देखने में आता है कि वह जब अपने लिए किसी सनस्क्रीन या एसपीएफ लोशन को खरीदने का मन बनाती हैं तो सबसे पहले ख्याल आता है कि कौन-सा एसपीएफ युक्त प्रॉडक्ट हमारी त्वचा के अनुसार उपयुक्त रहेगा। अगर आप चाहती हैं कि गर्मी के मौसम में आपकी त्वचा मुरझाए नहीं, इसके लिए सबसे पहले जानना ज़रूरी है कि आखिर एसपीएफ है क्या और यह किस तरह हमारी त्वचा की सुरक्षा करता है।

अल्ट्रावायलेट किरणों का प्रभाव

बिना सनस्क्रीन के जब हम धूप में जाते हैं तो हमारी त्वचा के जलने, रंग बदलने और खराब होने का खतरा बना रहता है। यदि यूवी किरणों का कम एक्सपोजर होता है तो भी ये किरणें हमारी त्वचा के कोलैजन को तोड़ती हैं और हमारी त्वचा पर झुर्रियों के आने का कारण बनती हैं। मुंबई के डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. अप्रतिम गोयल के अनुसार, 'धूप में देर तक रहने से कई लोगों की त्वचा का रंग काला पड़ जाता है। कुछेक मामलों में तो त्वचा कैंसर होने का खतरा भी होता है। देर तक धूप में रहने से कुछ लोगों को एक्ने और ल्यूपस भी हो जाते हैं। अध्ययन बताते हैं कि स्किन कैंसर के 90 फीसदी मामलों की वजह यूवी किरणें होती हैं। खुशखबरी ही है कि अपने देश में स्किन कैंसर आम नहीं है।

क्या है एसपीएफ

'द नेशनल स्किन सेंटर के डायरेक्टर डॉक्टर नवीन तनेजा कहते हैं कि एसपीएफ, यानी सन प्रोटेक्शन फैक्टर हमारी त्वचा को सूर्य की हानिकारक किरणों से सुरक्षा प्रदान करते हैं। सूर्य की किरणों में अल्ट्रा वॉयलेट रेज़ होती है, जो धरती पर यूवीए और यूवीबी के रूप में पहुंचती हैं। सनस्क्रीन लोशन में पाए जाने वाले एसपीएफ ही त्वचा को सूर्य की इन हानिकारक किरणों से रक्षा प्रदान करता है। किसी प्रॉडक्ट में एसपीएफ की मात्रा उसके गुणों को दर्शाती है। यूवीए किरणें त्वचा की गहराई में पहुंचकर हानि पहुंचाती है, जिससे त्वचा पर स्थायी रूप से निशान बन जाते हैं। ये काले, भूरे दाग या फाइन लाइन बनकर त्वचा की खूबसूरती खत्म कर देते हैं। ये त्वचा के लिए इतने नुकसानदेह होते हैं कि घर के अंदर भी हमारी त्वचा को प्रभावित करते हैं। ऐसे में ज़रूरी है कि एसपीएफ का इस्तेमाल सही जानकारी के बाद अपनी त्वचा के अनुसार ही करें। हालांकि सनस्क्रीन का कार्य इस बात पर भी निर्भर करता है कि आप कितना वक्त घर के बाहर धूप में गुज़ारते हैं।

कैसे सुरक्षा करता है

धूप के सीधे संपर्क में आने से त्वचा पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है, जिससे त्वचा संबंधी कई बीमारियां हो जाती हैं, जैसे- झुर्री, सनबर्न, कैंसर आदि। सनस्क्रीन में पाए जाने वाला एसपीएफ त्वचा को इन हानिकारक किरणों से रक्षा कवच प्रदान कर होने वाले नुकसान से बचाता है। सनस्क्रीन में मौजूद तत्व जैसे- इटेनियम डाइऑक्साइड, जि़ंकऑक्साइड आदि त्वचा पर होने वाले रासायनिक प्रभाव को कम करते हैं। यह मृत त्वचा हटा कर टैनिंग भी कम करता है। सूर्य की अल्ट्रावायलेट किरणें बहुत प्रभावशाली होती हैं और ये त्वचा को तुरंत हानि पहुंचाती हैं, इसलिए एसपीएफ त्वचा को सुरक्षा देने में मददगार होता है।

स्किन के अनुरूप चुनें सनस्क्रीन

सनस् क्रीन लोशन सभी के लिए एक जैसा नहीं होता है। अगर आपका सनस् क्रीन त् वचा के अनुरूप नहीं है तो सूर्य की हानिकारक किरणें आपकी त्वचा को नुकसान पहुंचाएंगी, इसलिए सनस्क्रीन चुनते वक्त अपनी स्किन टाइप का भी ध्यान रखें, जैसे- ऑयली स्किन के लिए जैल या एक्वा बेस्ड सनस्क्रीन और ड्राई स्किन के लिए लोशन या क्रीम बेस्ड सनस्क्रीन ज्यादा कारगर होते हैं। सर्दियों में स्किन सामान्य से ज्यादा ड्राई होती है इसलिए लोशन बेस्ड सनस्क्रीन ज्यादा फायदेमंद होंगे।

करें सही सनस्क्रीन का चुनाव

चेहरे पर सनस्क्रीन लगाते समय सुनिश्चित करें कि आपके लिए कितने एसपीएफ का सनस्क्रीन लोशन उपयुक्त होगा। आमतौर पर विज्ञापनों में दिखाया जाता है कि 30 एसपीएफ वाली क्रीम लगाने से सूर्य की अल्ट्रावॉयलेट किरणों से बचा जा सकता है, जबकि सचाई यह है कि 30 एसपीएफ वाली क्रीम 97 प्रतिशत तक बचाव करती है, जबकि 15 एसपीएफ युक्त क्रीम से 93 प्रतिशत तक बचाव होता है और 50 एसपीएफ से 98 फीसदी तक सूर्य की अल्ट्रावॉयलेट किरणों से बचाव होता है। आप अपने लिए उपयोगिता के हिसाब से एसपीएफ का चयन करें। अगर आपको ज्यादा देर तक धूप में नहीं रहना है तो अपने लिए कम एसपीएफ वाली क्रीम का भी चयन कर सकती हैं।

अच्छी कम्पनी के उत्पाद ही चुनें

बाजार में मिलने वाली सभी सनस्क्रीन क्रीम एक सी नहीं होती हैं। यह कतई जरूरी नहीं है कि आपकी सहेली की स्किन टोन पर जो सनस्क्रीन सूट कर रही है, वह आप को भी सूट करेगी। अगर आपकी त्वचा पिगमेंटेड है या फिर अन्य कोई स्किन प्रॉब्लम है तो फिर त्वचा विशेषज्ञ द्वारा बताई गई सनस्क्रीन का इस्तेमाल ही बेहतर होता है, जिससे कि सूर्य की यूवीए और यूवीबी किरणों से पूरी तरह बचाव हो सके और आपकी त्वचा तरोताजा रहे। इसके अलावा अपने लिए हमेशा किसी अच्छी कम्पनी के उत्पाद का ही चयन करना चाहिए। कम नंबर वाला सनस्क्रीन लोशन या क्रीम सिर्फ सामान्य बॉडी लोशन की तरह होता है, जिसका इस्तेमाल आप सिर्फ ब्यूटी प्रॉडक्ट के तौर पर करती हैं। यह तेज धूप में कारगर नहीं होता है। इसके इस्तेमाल से ना तो आप टैनिंग और सनबर्न की समस्या से निजात पा सकती हैं, ना ही इसका प्रयोग आपको एजिंग अथवा त्वचा संबंधी समस्याओं से छुटकारा दिला सकता है।

इस्तेमाल से पूर्व जानकारी लें

विशेषज्ञों का मानना है कि वास्तव में सनस्क्रीन पर जो लेबलिंग की जाती है और जो नंबर दर्शाए जाते हैं, वे असलियत में पूरी तरह से खरे नहीं उतर पाते हैं, इसलिए सनस्क्रीन के इस्तेमाल से पहले उस पर दिए गए विवरण को समझ लेना चाहिए, ताकि जान सकें कि ज्यादा फायदे के लिए आप कितनी मात्रा में और किस तरह से सनस्क्रीन लगाएं। आप अपने लिए जिस भी कम्पनी के सनस्क्रीन का चयन करती हैं, उसके इस्तेमाल से पहले उस पर लिखी हुई जानकारी को पढऩा बेहद जरूरी है, जिससे आपको पूरा फायदा हो। सभी प्रॉडक्ट्स पर उसके इस्तेमाल से संबंधित जरूरी जानकारी दी गई होती है, लेकिन बहुत कम लोग ही ऐसे होंगे, जो उस जानकारी को पूरा पढ़ते हों। सनस्क्रीन धूप में जाने से कितनी देर पहले लगाना है या फिर वह कितनी देर तक प्रभावी होगा, इस सब बातों की जानकारी जरूरी है। आइडियल तरीका तो यही होता है कि धूप में निकलने से कम से कम पंद्रह मिनट पहले लगाएं, ताकि वह त्वचा में समा जाए

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