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मां की जान की बाज़ी होता है शिशु का जन्म

दामिनी यादव

17th June 2019

मई के महीने में 8 तारीख़ का अपना अलग ही महत्त्व होता है। 8 मई, यानी मदर्स डे। पूरी दुनिया में इस दिन को खास एहसास से जोड़ा जाता है। यूं तो स्त्री का हर रूप ही अपनी मिसाल आप है, फिर भी मां के रूप को ईश्वर का दूसरा रूप कहा जाता है, क्योंकि ईश्वर से मिली जि़ंदगी को जन्म वही देती है। एक बच्चे को जन्म देने के लिए औरत अपनी जान तक को जोखिम में डालती है, इसलिए तो कहा जाता है कि एक बच्चे के जन्म के साथ उस मां को भी दूसरा जीवन मिलता है।

मां की जान की बाज़ी होता है शिशु का जन्म

ये बात किस हद तक गंभीर है, इस बात का पता इसी बात से लगाया जा सकता है कि भारत में हर साल प्रसव के दौरान लगभग पैंतालीस हज़ार महिलाएं अपनी जान गंवा देती हैं। इसी के चलते भारत दुनिया का पहला ऐसा देश है, जिसने 1800 संगठनों के गठबंधन वाली संस्था डब्ल्यू आर एआई के अनुरोध पर वर्ष 2003 में 11 अप्रैल को कस्तूरबा गांधी की जन्मतिथि को 'राष्ट्रीय सुरक्षित मातृत्व दिवस के रूप में घोषित किया। इस बारे में लोगों में जागरुकता की अभी भी भारी कमी है।

दरअसल इसका कारण ये है कि नौ महीने की प्रक्रिया से गुज़रकर होने वाले बच्चे के जन्म को भी बहुत से लोग आंख बंद करके रामभरोसे छोड़ देते हैं, बजाय ईश्वर के दिए दिमाग और सूझबूझ का इस्तेमाल करने के। ये जानते हुए भी कि न सिफऱ् बच्चे का जन्म, बल्कि पूरे नौ महीने का एक-एक पल किसी महिला के लिए बहुत संकट से भरा होता है, लोग इस मामले में पहले से ज़रूरी तैयारी की ज़रूरत नहीं समझते। जिसका नतीजा ही हैं हर साल प्रसव के दौरान होने वाली ये हज़ारों मौतें। मुख्य रूप से मातृ मृत्यु की ये वजहें सामने आती हैं-

  • उचित पोषण के कारण कमज़ोरी का बहुत अधिक होना
  • असुरक्षित गर्भपात
  • अवरूद्ध प्रसव
  • प्रसव के दौरान बहुत अधिक रक्तस्राव
  • गंभीर संक्रमण
  • गर्भावस्था के दौरान अप्रत्यक्ष रक्तचाप
  • ज़रूरी चिकित्सकीय सुविधाएं समय

पर न मिलना

वैसे तो यह विषय बहुत सारी बातों पर निर्भर गर्भवती होना अथवा बहुत कम उम्र में होना, अशिक्षा, जागरुकता की कमी, जानकारी का अभाव, समुचित स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव, बिना तैयारी के गर्भधारण करना और कुपोषण मातृत्व मृत्यु के प्रमुख कारणों में शामिल हैं। इसके चलते गहन भावनाओं से जुड़ा मातृत्व का मीठा एहसास अनेक महिलाओं के लिए कई संकटों से घिरा रहता है।

अगर समय रहते ही कुछ बातों को ज़ेहन में रखा जाए तो इस स्थिति की जटिलता को कम किया जा सकता है। प्रसव के समय मां की जान पर कोई संकट न हो, इसके लिए यहां बताई गई कुछ बातों का ध्यान रखना मददगार साबित हो सकता है-

  • बच्चे के जन्म के बाद जिन चीज़ों की ज़रूरत होती है, डॉक्टर से लिस्ट बनवाकर उन सबकी व्यवस्था पहले से करके रखें, ताकि आपको भागदौड़ में समय खराब न करना पड़े।
  • प्रसव के दौरान खून की अचानक ज़रूरत पडऩा बहुत ही आम बात है। प्रसव चाहे घर पर हो रहा हो या अस्पताल में, गर्भवती महिला को खून देने के लिए ऐसे लोगों की भी पहले से ही व्यवस्था रखें, जो उसे अपना खून दान दे सकें। अस्पताल में भी खून का इंतज़ाम तो हो जाता है, लेकिन फिर उसके बदले में भुगतान या फिर कुछ लोगों को खून डोनेट करना ही पड़ता है। इस वजह से ये व्यवस्था भी बहुत ज़रूरी है। हां, इस मामले में एक बात का ज़रूर ध्यान रखें कि गर्भवती महिला को जिसका भी खून दिया जाए, पहले उसकी जांच ज़रूर हुई हो, ताकि उस महिला और होने वाले बच्चे को किसी भी संक्रमण से बचाया जा सके।
  • पूरा प्रयास तो इसी बात का होना चाहिए कि प्रसव किसी अच्छे और विश्वसनीय अस्पताल या नॄसग होम में ही करवाया जाए। यदि किसी वजह से ऐसा हो पाना संभव न हो रहा हो और प्रसव घर पर ही करवाने की स्थिति बन रही हो तो किसी पूर्णतया प्रशिक्षित आशाकर्मी या पूरी तरह से ट्रेंड और अनुभवी दाई की ही देखरेख में प्रसव करवाया जाना चाहिए।
  • जैसे ही महिला को गर्भवती होने का पता चले, तुरंत उसका पंजीकरण आंगनवाड़ी केंद्र, एएनएम या फिर नज़दीकी अस्पताल में होना चाहिए। यहां ऐसी गर्भवती महिलाओं के लिए भी सभी ज़रूरी इंतजाम होते हैं, जिनकी आर्थिक पृष्ठभूमि बहुत ज़्यादा अच्छी नहीं है। सरकार द्वारा इस विषय में अनेक योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिनकी जानकारी लेकर उनका लाभ उठाना चाहिए।
  • बच्चे के जन्म से भी पहली बात तो यही ध्यान में रखी जानी चाहिए कि एक बच्चे का जन्म कोई अचानक घटने वाली घटना नहीं, बल्कि कंसीव करने के बाद से ही शुरू होकर नौ महीने चलने वाली एक बड़ी, महत्वपूर्ण और खर्चीली घटना है। यहां तक कि बच्चे के जन्म के बाद तो ये खर्चे और भी ज़्यादा बढ़ जाते हैं, इसलिए इस प्रक्रिया की शुरुआत आंख मूंदकर नहीं, बल्कि आंख-कान और दिमाग खुले रखकर ही की जानी चाहिए। कहने का मतलब कि जब भी आप अपने परिवार में एक नन्हे मेहमान के आने की तैयारी शुरू करें तो उसके लिए सभी संभावित खर्चों की व्यवस्था पहले से ही रखें। किसी भी आपातकालीन स्थिति का इंतज़ार न करें, बल्कि अपनी बचत में पहले से ही इसे शामिल रखें।
  • गर्भवती को उसकी स्थिति को देखते हुए डॉक्टर की सलाह के हिसाब से सभी ज़रूरी सुविधाएं समय पर मिलती रहनी चाहिए, जैसेकि- पौष्टिक आहार, ज़रूरी दवाएं, टीके, आराम, समय-समय पर मेडिकल चेकअप, मानसिक शांति वगैरह। इनमें से हर बात का महत्त्व बहुत अधिक है।
  • घर पर प्रसव की व्यवस्था होने के बावजूद एक गाड़ी का पहले से इंतज़ाम करके उसे पूरी तरह तैयार करके रखें, यानी पंचर वगैरह चैक करके, पेट्रोल डलवाकर। किसी भी आपातकालीन स्थिति में इसकी तुरंत ज़रूरत पड़ सकती है।
  • बच्चे के जन्म के तुरंत बाद उसके जन्म के सही समय, स्थान आदि के आधार पर अस्पताल से उसके जन्म का प्रमाणपत्र लेना न भूलें। यदि प्रसव घर पर हुआ हो, तब भी नज़दीकी पंजीकरण कार्यालय से बच्चे का जन्म प्रमाणपत्र तुरंत बनवा लें। इसकी ज़रूरत हर जगह पड़ती है और बाद में बनवाने में बहुत परेशानी उठानी पड़ सकती है।
  • एक बच्चे का जन्म उत्सव की तरह होना चाहिए हर परिवार और महिला के लिए। ये संभव भी है, बस ज़रूरत है थोड़ी सी जागरुकता और थोड़ी सी सावधानी की।

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