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धुएं में मत उड़ाइए अपनी हैल्थ को

डॉ. विनोद गुप्ता

17th June 2019

यदि आप सोचते हैं कि धूम्रपान केवल पुरुष ही करते हैं तो आप गलत हैं। महिलाएं भी इससे अछूती नहीं हैं। शहरी महिलाएं, खासकर युवतियां आधुनिकता का पर्याय मानकर धूम्रपान करती हैं तो ग्रामीण महिलाएं, खासतौर पर खेतों में काम करने वाली तथा शहरों में निर्माण उद्योग अथवा फैक्ट्रियों में मजदूर के रूप में कार्य करने वाली महिलाएं अपनी थकान मिटाने हेतु बीड़ी का सेवन करती हैं। यानी महिलाओं में भी धूम्रपान नशा छाया हुआ है, जो कि गंभीर चिंता की बात है। पाश्चात्य देशों में महिलाओं का धूम्रपान करना आम बात है, लेकिन हमारे देश में, खासतौर पर महानगर या मेट्रो सिटीज़ में नवयुवतियों में भी यह प्रवृत्ति तेजी से फैल रही है। महिलाएं अक्सर

धुएं में मत उड़ाइए अपनी  हैल्थ को

घरेलू तनाव के कारण इस लत का शिकार बन जाती हैं। बीड़ी-सिगरेट हो या चुरूट, चिलम, सिगार, सभी में तंबाकू का इस्तेमाल होता है। शुरू-शुरू में यह स्वाद कसैला या कड़वा लगता है, लेकिन कुछ समय बाद वह मुंह को रास आ जाता है और अच्छा लगने लगता है। वैसे तो धूम्रपान कोई भी करे, वह सेहत के लिए घातक है, लेकिन पुरुषों की तुलना में महिलाओं पर इसके अधिक घातक प्रभाव पड़ते हैं। मेडिकल एसोसिएशन द्वारा जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 10 वर्ष से बड़ी 40 प्रतिशत ऐसी लड़कियां तथा महिलाएं हैं, जो किसी न किसी रूप में तंबाकू का सेवन करती हैं। ऐसी लड़कियों तथा महिलाओं की संख्या 22 करोड़ 20 लाख है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार धूम्रपान से प्रतिवर्ष लगभग 30 लाख लोग काल के गाल में समा रहे हैं। जो लोग स्थायी रूप से धूम्रपान के शिकार हैं, उनमें 90 प्रतिशत फेफड़े के, 30 प्रतिशत कैंसर, 80 प्रतिशत ब्रोंकाइटिस, 80 प्रतिशत इंफिसीमा, 20-25 प्रतिशत घातक हृदय रोग से ग्रस्त हैं। भारत में प्रतिवर्ष अनुमानत: आठ से दस लाख लोगों की मृत्यु तंबाकू जनित बीमारियों से होती है। धूम्रपान के आदी लोगों में रोग प्रतिरोधक क्षमता धीरे-धीरे कमजोर पडऩे लगती है, जिससे उन्हें कई रोग लग जाते हैं, जो उनकी आयु को घटाते हैं। धूम्रपान करने से मुंह का स्वाद बिगड़ जाता है। परिणामस्वरूप उनकी स्वाद तंत्रिकाएं उदासीन हो जाती हैं और वे किसी भी चीज का वास्तविक स्वाद नहीं ले पातीं। दुनिया में हर वर्ष 7 लाख मामले फेफड़ों के कैंसर के प्रकाश में आते हैं। इनमें से अधिकांश धूम्रपान की देन है। धूम्रपान से 90 प्रतिशत फेफडे का कैंसर और 10 प्रतिशत अन्य प्रकार का कैंसर होता है। धूम्रपान करने वाले व्यक्तियों के धुएं से प्रभावित होने वाले व्यक्तियों की संख्या में तेजी से वृद्धि हो रही है। इस वर्ग में बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। धूम्रपान के धुएं से दूसरे व्यक्ति को भी कैंसर हो जाता है।

जापान, जर्मन तथा अमेरिका में हुए अध्ययन के अनुसार धूम्रपान करने वाले पति-पत्नी के दूसरी संगी के धूम्रपान नहीं करने वाले की अपेक्षा फेफड़े के कैंसर से प्रभावित होने की आशंका दुगुनी या तिगुनी रहती है। धूम्रपान का उन महिलाओं पर कहीं अधिक दुष्प्रभाव पड़ता है, जो महिलाएं गर्भ निरोधक गोलियों का सेवन करने के साथ-साथ धूम्रपान भी करती हैं। उन्हें दिल की बीमारियों का खतरा अधिक हो जाता है। दुनिया भर में कम से कम 30 लाख शिशु हर वर्ष अपनी माताओं की धूम्रपान की लत के कारण जानलेवा रसायनों के जाल में फंस जाते हैं।

गर्भावस्था में धूम्रपान करने से धुएं का विष मां की वाहिनी कोशिकाओं के द्वारा भ्रूण में पहुंच कर उसके हृदय, गुर्दे, गले और मस्तिष्क शिराओं में जमा होने लगता है। इससे बच्चे के मृत पैदा होने की आशंका रहती है। गर्भवती माताओं पर किए गए परीक्षणों से पता चलता है कि धूम्रपान करने वाली महिलाओं के बच्चे समय से पूर्व जन्म लेते हैं। इन शिशुओं का वजन तथा लंबाई अन्य शिशुओं की अपेक्षा कम होती है। जन्म के समय सामान्य बच्चे की तुलना में इन बच्चों का वजन लगभग 200 ग्राम कम तथा लंबाई लगभग 2 इंच कम होती है। जिन महिलाओं को धूम्रपान की लत होती है, उनमें धूम्रपान न करने वाली महिलाओं की अपेक्षा गर्भपात होने का प्रतिशत दुगना है। समय से पूर्व प्रसव में अत्यधिक कष्ट और गर्भपात की संभावना बराबर बनी रहती है। अगर ऐसे में बच्चे को बचा भी लिया जाता है तो वह भी स्वस्थ रूप में जन्म नहीं लेता है। धूम्रपान करने वाली महिलाओं के गर्भपात होने और मानसिक रूप से कमजोर शिशु पैदा होने या जन्म के तुरंत बाद ही शिशु की मृत्यु की संभावनाएं बढ़ जाती है। यही वजह है कि ऐसी माताओं के 30 प्रतिशत बच्चे जन्म के प्रथम सह्रश्वताह में ही काल कवलित हो जाते हैं। हर साल हजारों बच्चे केवल इसलिए मर जाते हैं, क्योंकि उनकी माताएं धूम्रपान करती हैं।

अध्ययनों से यह भी पता चलता है कि जो महिलाएं गर्भकाल में अत्यधिक धूम्रपान करती हैं, उनकी संतान को श्वास एवं हृदय रोग होने की संभावना बहुत बढ़ जाती है। जिन बच्चों की माताएं अगर एक पैकेट सिगरेट रोज पीती हों तो उन्हें ब्रोंकाइटिस तथा निमोनिया होने की दुगुनी आशंका होती है। धूम्रपान करने वाली जच्चा के बच्चे बड़े ही चिड़चिड़े और साधारणतया रोगी हुआ करते हैं।

 

यदि गर्भवती स्वयं सिगरेट नहीं पीती, लेकिन उनके साथी या पति धूम्रपान करते हैं और उन्हें एक दिन में दो-तीन घंटे तक उस धुएं में रहना पड़ता है तो इसका भी भ्रूण पर असर पड़ता है। सिगरेट का सेवन करने से मां के दूध में निकोटिन बढ़ जाता है और विटामिन सी घट जाता है। यह स्तनपान करने वाले शिशु के लिए घातक है।

धूम्रपान से महिलाओं में बांझपन का खतरा बढ़ जाता है, प्रजनन क्षमता पर प्रतिकूल असर पड़ता है। अत्यधिक धूम्रपान करने वाली महिलाओं की प्रजनन क्षमता पर इसका विपरीत असर पडऩे से उनमें बच्चे पैदा करने की शक्ति क्षीण हो जाती है। इससे महिलाओं में प्रतिमाह बनने वाले डिंब पर असर होता है। ज्यादा सिगरेट पीने वाली महिलाओं की संतानोत्पत्ति आयु सीमा भी प्रभावित होती है।

अत्यधिक धूम्रपान के सेवन से महिलाओं में समय से पूर्व रजोनिवृत्ति हो सकती है, जिससे अनेक विकार जन्म ले सकते हैं। अधिक मात्रा में सिगरेट पीने वाली महिलाएं जब मां बनने को होती हैं तो गर्भावस्था के अंतिम चरण में समय से पूर्व प्रसव पीड़ा आरंभ हो जाती है।

धूम्रपान करने से समय से पूर्व चेहरे पर झुॢरयां आने लगती हैं और समय से पूर्व ही बुढ़ापा आ जाता है। बीड़ी-सिगरेट में अनेक प्रकार के घातक विष होते हैं, जिनमें प्रमुख हैं- निकोटिन, कार्बन मोनो-ऑक्साइड, पायकोलियन, पायरीडिन, कोलीडीन, मार्शगैस, अमोनिया, साइजोजने, परफैरोल, पैसिक एसिड, फुरफरल कार्बलिक एसिड, सेकोलिन, एजीलिन, कोलतार, नाइट्रोमाइंस और वैजीपाथरीन।

निकोटिन एक रंगहीन तरल पदार्थ होता है, जो गर्म होने पर भाप बन जाता है। इसकी अधिकता से हृदय की धड़कन तेज हो जाती है, क्योंकि वह सभी अनुकम्पी तंत्रिका तंत्र को उत्तेजित करता है। परिणामस्वरूप रक्तचाप बढ़ जाता है। कोलेस्ट्रॉल के बढऩे में भी धूम्रपान का हाथ होता है, नतीजतन दिल का दौरे पडऩे की आशंका बढ़ जाती है।

धूम्रपान करने की दर के साथ-साथ दिल का दौरा पडऩे का खतरा बढ़ता है, जो महिला एक दिन में दस सिगरेट तक पी जाती हैं, उन्हें दिल का दौरा पडऩे का खतरा धूम्रपान न करने वाली महिला की तुलना में दोगुना होता है। धूम्रपान करने वालों को अधिक गंभीर और घातक दौरा पड़ता है। धूम्रपान करने वालों में धूम्रपान परहेजियों की तुलना में कम से कम दस वर्ष पहले ही हृदय की बीमारियों की शुरुआत हो जाती है। भारत में धूम्रपान की वजह से अधिक मौतों का कारण भारतीय सिगरेटों में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा ज्यादा होती है। कार्बन मोनोऑक्साइड की वजह से ऑक्सीजन का दबाव कम हो जाता है। परिणामस्वरूप हृदय को रक्त पहुंचाने वाली धमनियां तंग होने लगती हैं, जिससे सीने में दर्द होता है। मायोकाॢडयल संक्रमण की वजह से रक्तवाहिनी एक-दूसरे से सट जाती हैं, जिससे उसके किसी भाग में निष्क्रियता आ सकती है और आकस्मिक मौत भी हो सकती है।

पायरोडिन से क्षय, एनीमिया और हिस्टीरिया जैसे रोग हो सकते हैं, क्योंकि इससे आंतों में खुश्की उत्पन्न होती है। यह खुश्की धीरे-धीरे कैंसर को जन्म देती है। कोलीलिन की वजह से सिरदर्द और चक्कर आने की शिकायत बनी रहती है, क्योंकि स्नायुतंत्र ढीले पड़ जाते हैं। पुरुषों में पुंंसत्व की कमी इसी की वजह से होती है। पैसिक एसिड से जहां थकान और उदासीनता उत्पन्न होती है, वहीं कार्बोनिक एसिड से याददाश्त कम होने लगती है। साइनजिने और एजानिल से रक्त में खराबी उत्पन्न होती है और फैराल से दांतों का क्षय होता है। धूम्रपान में निहित विषैले पदार्थों की वजह से व्यक्ति की पाचन क्रिया बुरी तरह प्रभावित होती है।

बीड़ी-सिगरेट के सेवन के समय यदि उसके धुएं को बाहर न निकाला जाए तो जीवन संकट में पड़ सकता है। धूम्रपान की वजह से ये सभी विषैले पदार्थ श्वासनली और फेफड़ों में एक प्रकार की परत बना देते हैं, जो अनेक रोगों का कारण बनती है।

कैसे छुड़ाएं धूम्रपान की आदत

यदि आप मन से कमजोर हैं या अपनी बात पर कायम नहीं रह पाती हैं तो आपके लिए अनेक थैरेपी मौजूद हैं, जो आपको इस जानलेवा लत से हमेशा के लिए मुक्ति दिला सकती है।

अब आप धूम्रपान की जानलेवा लत से मात्र आधे घंटे में हमेशा के लिए निजात पा सकती हैं। जी हां, लेजर थैरेपी से यह संभव हो सकेगा। यह थैरेपी मात्र आधे घंटे लेनी पड़ती है और इसके बाद सिगरेट पीने की चाहत हमेशा के लिए समाह्रश्वत हो जाती है। थैरेपी के प्रभाव को स्थायी बनाने के लिए बाद में दो बार आधे-आधे घंटे के लिए थैरेपी देने की जरूरत पड़ सकती है। यह बिल्कुल कष्टरहित एवं आसान है। भारत में यह थैरेपी सोसायटी फॉर होलिस्टिक एडवांसमेंट ऑफ मेडिसिन, सोहम तथा लेजर थैरेपी ऑफ अमेरिका के सहयोग से शुरू की गई है।

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