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मेंटल हेल्थ की दिशा में डॉ. प्रकृति पोद्दार फैला रही हैं जागरुकता

गरिमा अनुराग

3rd July 2019

मेंटल हेल्थ की दिशा में डॉ. प्रकृति पोद्दार फैला रही हैं जागरुकता
देश की मेंटल हेल्थ को दुरुस्त रखने और इस दिशा में लोगों में जागरुकता फैलाने
की दिशा में काम कर रहीं डॉ. प्रकृति पोद्दार 'माइंड ओवर इमेज' की संस्थापक 'पोद्दार फाउ ́डेशन' की मैनेजिंग ट्रस्टी हैं और पोद्दार वेलनेस लिमिटेड की निदेशक भी हैं। मेंटल हेल्थ की दुनिया में अपनी पहचान बना चुकीं प्रकृति के लिए इस दिशा में आना इतना आसान नहीं था। उस वक्त इस तरह की बातें लोग कम करते व सुनते थे। दूसरा, वे ऐसे परिवार में पली-बढ़ी थीं, जहां सभी बैठकर थे और बड़े होते हुए उनके पापा प्रकृति के लिए भी यही चाहते थे, लेकिन धीरे-धीरे प्रकृति की रुचि अपनी नानी, जो कि एक फेथ हीलर थीं, के काम में भी बढ़ने लगी। हालांकि उनके करियर की शुरुआत तो पापा की पसंद के अनुसार ही हुई, लेकिन प्रकृति तब ज्यादा अच्छा महसूस करती थीं, जब वे किसी से बात करती थी, किसी की परेशानी सुनती थीं और उसे कुछ सुझाव देतीं या फिर उसकी कोई मदद कर पाती थीं।
 
बैंकिंग छोड़, वेलनेस से जुड़ी
कनाडा में कई साल रहने के बाद स्वदेश लौटकर प्रकृति ने कॉर्पोरेट और पर्सनल वेलनेस के क्षेत्र में काम करना शुरू किया। कुछ समय बाद उन्होंने माइंड ओवर इमेज कंसल्टिंग की स्थापना की। ये एक ऐसा संस्थान है, जो व्यक्ति की मेंटल हेल्थ से जुड़ी परेशानियों पर तो काम करता ही है, उसे कॉर्पोरेट काउंसेलिंग, सॉफ्ट स्किल डेवलपमेंट और लाइफ कोचिंग भी देता है। ये देश का एकमात्र ऐसा वेलनेस केंद्र है, जहां लोगों की पारंपरिक और आधुनिक तरीके से काउंसलिंग व मेंटल हेल्थ में सुधार किया जाता है। प्रकृति यहीं पर नहीं रुकीं। उन्होंने गहन हीलिंग के लिए कई नई तकनीकों का विकास और प्रयोग किया और आज वे एक प्रामाणित न्यूरोफीडबैक टेक्नीशियन हैं।
 
जरूरतमंदों के लिए शुरू किया काम
बड़े कॉर्पोरेट हाउसेज़ व पढ़े-लिखे उच्च मध्यमवर्गीय परिवारों के साथ काम करने के बाद प्रकृति ने ऐसे जरूरतमंद लोगों के लिए काम करना शुरू किया, जिनकी मेंटल हेल्थ पर किसी का ध्यान नहीं जाता था। इन्हीं लोगों के लिए काम करते हुए उन्होंने 'पोद्दार फाउंडेशन' की नींव रखी। बतौर मैनेजिंग ट्रस्टी वे हमेशा नए तरीकों से लोगों को उन परिस्थितियों से बचाने की कोशिश करती हैं, जो उनके मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करते हैं। 'साइलेंस तोड़ो' संस्था की ऐसी ही एक पहल है, जिसमें लोगों के मन में मानसिक रोगों के प्रति मौजूद कुंठा को कम करने की कोशिश की जाती है। आज वे अपनी संस्था से ग्राम पंचायत, आंगनवाड़ी की सदस्यों के साथ-साथ देश के कई स्कूल्स और गांवों में भी लोगों को मानसिक रोगों के प्रति जागरूक करती हैं।
 
पा चुकी हैं कई सम्मान
मानसिक रोगों के प्रति ऐसे समय से काम करने की शुरुआत करना, जब लोग इसके बारे में बात करने से भी हिचकिचाते थे, प्रकृति ने ये पहल की और आज उनकी मेहनत के लिए कई बार उन्हें सम्मानित भी किया जा चुका है। वे अक्सर अंतर्राष्ट्रीय व राष्ट्रीय मंचों पर अपने विचार रखती रही हैं।
 
 
 

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