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जीवन के बदलावों के लिए ऐसे करें वुड बी डैड्स खुद को तैयार

गृहलक्ष्मी टीम

10th July 2019

जीवन के बदलावों के प्रति उत्कंठा, मन में उठने वाले सवालों के जवाब पढ़े यहां-

जीवन के बदलावों के लिए ऐसे करें वुड बी डैड्स खुद को तैयार

‘‘अल्ट्रासाउंड देखने के बाद मैं बेटे के जन्म को लेकर काफी उत्साहित हूँ लेकिन मुझे इस बात की चिंता भी है कि उसके आने के बाद हमारे जीवन में कितना गहरा बदलाव जाएगा।’’

इसमें कोई शक नहीं कि छोटे शिशु अपने साथ बड़े-बड़े बदलाव लाते हैं सभी भावी पिता इस विषय में चिंतित होते हैं। जब वे गर्भावस्था की प्रक्रिया में भावनात्मक रूप से जुड़ जाते हैं तो उनके मन में यह डर नहीं रहता। वे इन बदलावों को अपनाने लगते हैं।आप भी धीरे-धीरे इस जिंदगी की हकीकतों को जानने लगेंगे हमें लगता है कि आप निम्नलिखित के विषय में चिंतित होंगे‒

क्या मैं एक अच्छा पिता साबित होऊँगा? :- आपको इस भय से उबर कर अपने-आप को यकीन दिलाना है कि आपके अलावा, शिशु के लिए कोई बेहतर पिता हो ही नहीं सकता।

क्या संबंधों में बदलाव आएगा? :- हर नए माता-पिता के संबंधों में थोड़ा बदलाव तो आता ही है। सबको प्रसव के बाद होने वाली उलझनों व व्यस्तताओं से जूझना पड़ता है।

साथ रहें

पिता के रूप में नए जीवन की शुरूआत करने जा रहे हैं तो शिशु के साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताने की कोशिश करें।हो सके तो ऑफिस से छुट्टी ले लें। यदि ऐसा न हो सके तो घर में ऑफिस का काम न लाएँ। ओवरटाइम न करें। घर का वक्त सिर्फ पत्नी व नवजात के लिए ही हो। आपका निजी काम कितना भी मुश्किल क्यों न हो, नवजात की देखभाल का जिम्मा उससे भी बड़ा होता है। घर के काम में हाथ बंटाएँ।

शिशु के साथ-साथ अपनी पत्नी पर भी ध्यान दें। उसे एहसास दिलाएँ कि ऑफिस जाने पर भी आप उसे याद करते हैं। ऑफिस से घर पर फोन करें। दवा लेना याद दिलाएं। उसे फूल देकर या किसी मनपसंद रेस्त्रां में ले जाकर सरप्राइज़ दें।

शिशु के घर में कदम रखते ही रोमांस एक किनारे हो जाता है और आप उसकी जरूरतों का सामान जुटाने में लग जाते हैं। उन दिनों शिशु के खान-पान, नींद व शौच के अलावा कुछ और नहीं सूझता लेकिन जब आप दोनों इस रूटीन में रम जाएँगे तो अपने लिए समय निकालना आ जाएगा। जब उसे दूसरे बच्चे खिलाएं या वह रात को सो जाए तो अपने लिए समय निकालें। इस तरह आपका संबंध पहले से भी कहीं गहरा, मजबूत व प्यारा हो जाएगा।

बच्चे की देखभाल का जिम्मा :- शिशु की देखभाल के लिए माता-पिता दोनों को ही आगे आना पड़ता है। शिशु का पहला डायपर बदलते समय इस बारे में बहस करने की बजाय अभी से यह जिम्मेवारी बाँटना शुरू कर दें। इस बातचीत से आप दोनों का मन हल्का होगा और आपको व्यावहारिक रूप से समझ आएगा कि शिशु के लिए कौन-कौन से काम करने पड़ेंगे।

काम कैसे प्रभावित होगा? :- यह आपके काम के रुटीन पर निर्भर करता है यदि आप लंबे घंटों तक काम करते हैं तो पिता की जिम्मेदारी निभाने के लिए शिशु की देखभाल को प्राथमिक बनाना होगा। घर के काम-काज में हाथ बंटाना सीखें। ऑफिस के काम को घर लाने का लालच न करें। शिशु जन्म से पहले या कुछ दिन बाद तक किसी यात्रा पर न जाएँ।यदि हो सके तो शिशु जन्म के बाद कुछ दिन तक छुट्टी लें।

जीवन शैली में बदलाव लाना होगा? :- माना आपको अपनी सामाजिक गतिविधियों को पूरी तरह से अलविदा नहीं कहना होगा लेकिन थोड़े-बहुत समझौते तो करने पड़ सकते हैं। एक नया शिशु सबके आकर्षण का केंद्र होता है। हो सकता है कि आपको अस्थायी तौर पर अपनी पुरानी जीवनशैली से विदा लेनी पड़े। कैंडल लाइट डिनर या फिर मनपसंद खेल की बजाय आपको शिशु की छोटी-मोटी जरूरतों में व्यस्त रहना होगा। दोस्तों का दायरा भी बदल सकता है क्योंकि आप नन्हे शिशुओं के माता-पिता से ज्यादा दोस्ती रखना चाहेंगे।प्राथमिकताएँ तय होने के बाद आप फिर से अपनी पुरानी जीवन शैली में लौट सकते हैं।

क्या मैं बड़े परिवार को संभाल सकूँगा :- शिशु के बढ़ते खर्चों के बारे में सोचकर कई भावी पिताओं की रातों की नींद उड़ जाती है लेकिन आप कई तरह से इन खर्चों में कटौती कर सकते हैं । यदि माँ शिशु को स्तनपान कराए तो बोतल व डिब्बे के दूध का खर्च घटेगा। अपने मित्रों व रिश्तेदारों से शिशु के काम का सामान लाने को कहें। उसके ममेरे-चचेरे भाई बहनों के सामान व कपड़ों से काम चलाएँ। अतिरिक्त काम करके चार पैसे बचाने के चक्कर में न पड़ें व शिशु के साथ प्यार भरा समय बिताएँ। यह नुकसान कोई ज्यादा नहीं होगा।

सबसे खास बात तो यह है कि आप उसके बारे में सोचना शुरू कर दें कि आपके जीवन में कोई खास आने वाला है। वह आपके जीवन को बेहतरी के लिए बदल देगा।

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