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पिता बनने से पहले पुरुष के मन में होते हैं ये डर

गृहलक्ष्मी टीम

11th July 2019

पिता बनने से पहले पुरुष के मन में होते हैं ये डर

‘‘मैं एक अच्छा पिता बनना चाहता हूं लेकिन सोचकर ही डर जाता हूँ मैंने कभी किसी नवजात की देखभाल नहीं की।’’

कोई भी जन्म से माता-पिता नहीं होता जब शिशु आएगा तो कुदरतन आपके मन में पितृत्व की भावना पैदा होगी आपको भी पहली रात उसके साथ जागना, उसे नहलाना या डायपर बदलना चुनौती लग सकता है लेकिन धीरे-धीरे आप इन सब कामों में निपुण हो जाएंगे। थोड़ी सी रातों की नींद, मेहनत और लगन से आप एक अच्छे पिता साबित होंगे।हालांकि इस काम की पूरी ट्रेनिंग पहले से नहीं ली जा सकती। आप अपनी भूलों से ही सबक लेंगे। यदि पहले से थोड़ी बहुत जानकारी व तैयारी होगी तो काफी हद तक सब कुछ आसान होगा।

अपने किसी परिचित पिता से मिलें। उसके अनुभव जानें। उसके शिशु को खिलाएँ ताकि आपके मन का डर जाता रहे।

स्तनपान

‘‘मेरी पत्नी शिशु को स्तनपान कराने के बारे में सोच रही है हालांकि यह अच्छी बात है लेकिन मैं उससे थोड़ा परेशान हूँ।’’

माना कि आज तक पत्नी के वक्षस्थल आपके लिए कामुक थे, लेकिन वह एक कुदरती प्रक्रिया शुरू होने वाली है। स्तन सिर्फ सौंदर्य व सेक्स के लिए नहीं होते। उन्हें शिशु को दूध पिलाने का माध्यम बनाया गया है। माँ का दूध शिशु के लिए अमृत समान होता है। इससे शिशु का स्वास्थ्य भी ठीक रहता है। उसके मस्तिष्क का तेजी से विकास होता है।माँ को भी प्रसव के बाद अपनी फिगर में लौटने में ज्यादा समय नहीं लगता। बाद में ब्रेस्ट कैंसर का खतरा भी काफी हद तक टल जाता है।

बेशक स्तनपान से आपके शिशु व आपकी पत्नी के जीवन में नाटकीय बदलाव आने वाला है। यहाँ इस विषय में आपकी सहमत उसके लिए बहुत मायने रखती है। अध्ययनों से पता चला है कि जो मांएँ अपने पति की सहमति से शिशुओं को स्तनपान कराती हैं, उनके लिए यह प्रक्रिया काफी सहज और सरल होती है।इस बारे में आप भी जानकारी लें। हालांकि यह एक कुदरती प्रक्रिया है लेकिन इसे सीखने में समय लगता है। इस प्रक्रिया को सीखने में शिशु व उसकी माँ की सहायता करें। कुछ समय तक आप लोगों को इसमें थोड़ी उलझन होगी लेकिन यह प्राकृतिक सामान्य और एक खास काम दिखने लगेगा।

मेरी पत्नी पुत्र को स्तनपान कराती है।उसके और शिशु के बीच जो निकटता है।मैं उसे नहीं बाँट पाता और अकेलापन महसूस होता है।’’

आप गर्भ धारण नहीं कर सकते, शिशु को जन्म नहीं दे सकते, उसे स्तनपान नहीं करा सकते किंतु इसके बावजूद आप उसके पिता हैं। आप उसकी हर छोटी बड़ी खुशी-गम में शामिल हो सकते हैं। आप अपनी पत्नी की गर्भावस्था, प्रसव व डिलीवरी के साथ जुड़कर उसका दर्द हल्का कर सकते हैं। आपकी सक्रिय हिस्सेदारी ही काफी है।

जब शिशु स्तनपान करे :- जब शिशु स्तनपान करे तो आप कोई मदद नहीं कर सकते लेकिन कभी-कभी बोतल का दूध बनाना पड़े तो मदद के लिए आगे आएँ। इस तरह माँ को थोड़ा आराम मिलेगा और आपको शिशु की निकटता पाने का अवसर! उसे बोतल से दूध पिलाते समय अपनी शर्ट के बटन खोल दें ताकि शिशु को आपके शरीर की महक और स्पर्श मिल सके। दूध पिलाते समय बोतल सावधानी से पकड़ें व अपना पूरा ध्यान उसी पर लगाएँ।

शिशु से पहले सोएँ :- माना आप स्तनपान नहीं करा सकते लेकिन रात को उसके दूध पीते समय, उसके साथ जाग तो सकते हैं रात को उसका डायपर बदलें। दूध पिलाने के लिए माँ की गोद में लिटाएँ। जब वह सो जाए तो उसे उसके पालने में लिटाएँ।

बाकी कामों में मदद :- आप शिशु को नहलाने, धुलाने, सुलाने व खिलाने के काम में मदद कर सकते हैं।

रिश्ता

‘‘मैं अपनी बेटी के लिए काफी उत्साहित हूँ। मुझे लगता है कि मैं उस पर जरूरत से ज्यादा ध्यान दे रहा हूँ।’’

जिंदगी में प्यार व स्नेह की अति नहीं होती। आप शिशु के साथ जितना समय बिताएंगे।

 

 

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