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गर्भावस्था में यदि हो जाए सर्दी, खांसी या जुकाम

गृहलक्ष्मी टीम

11th July 2019

हो सकता है कि आपको गर्भावस्था से जुड़े तकलीफदेह लक्षणों; अपच, उल्टी, टाँगों में ऐंठन व थकान वगैरह का सामना करना पड़े। आप खांसी जुकाम से पीड़ित रहें क्योंकि इन दिनों जुकाम और इंफैक्शन भी आपके पीछे पड़ सकते हैं। आपका रोग प्रतिरोधक तंत्र थोड़ा कमजोर पड़ जाता है। दूसरी बात यह भी है कि दो शिशुओं के साथ बीमार पड़ने पर तकलीफ थोड़ी ज्यादा महसूस हो सकती है। आप अभी तक अपनी बीमारियों के जो इलाज करती आई थीं, उन्हें अलमारियों में बंद रखना होगा। हालांकि इन छोटी-मोटी तकलीफों से आपकी गर्भावस्था पर कोई असर नहीं पड़ेगा लेकिन फिर भी इलाज से परहेज बेहतर होता है। जब परहेज से बात न बने, आपको जुकाम या फिर कोई दूसरा इंफैक्शन हो जाए तो तत्काल इलाज व डॉक्टर की देखभाल से आराम आ सकता है।

गर्भावस्था में यदि हो जाए सर्दी, खांसी या जुकाम

आप क्या सोच रही होंगी?

जुकाम-खांसी

"मैं छींक खांस रही हूँ। मेरा सिर दर्द से फट रहा है क्या इस गंदे जुकाम का असर मेरे शिशु पर भी हो सकता है?’’

गर्भावस्था में तो रोग प्रतिरोधक क्षमता दबने के कारण, आमतौर पर जुकाम हो जाता है। खुशी की बात यह है कि सिर्फ आप पर ही उनका असर होगा। शिशु का कुछ नहीं बिगड़ेगा। लेकिन आपको उन दवाओं के बारे में सावधानी बरतनी होगी, जो आप जुकाम के लिए लेने वाली हैं क्योंकि उनका असर शिशु पर हो सकता है। कोई भी दवा खाने से पहले डॉक्टर को फोन करके पूछ लें कि गर्भावस्था में कौन सी दवा लेना सुरक्षित रहेगा। वे आपको कुछ विकल्प दे देंगे, जिनमें से आप कोई भी चुन सकती हैं। यदि आपने डॉक्टर से बिना पूछे, मनमर्जी से दवा की एकाध खुराक ले ली है तो घबराने वाली कोई बात नहीं है लेकिन डॉक्टर को बताकर तसल्ली जरूर कर लें।

अगर अभी तेज जुकाम नहीं हुआ है तो इसकी हालत को बिगड़ने से पहले ही संभाल लें वरना यह काफी बुरे संक्रमण में बदल सकता है या आपको बंद व बहती नाक के साथ बिस्तर पर लेटना पड़ सकता है।

यदि जरूरत महसूस हो तो आराम करें।यदि आराम करेंगी तो जुकाम जल्दी ठीक नहीं होगा पर शरीर को आराम मिल जाएगा।आपको बुखार या खांसी भी नहीं होगी।इसके अलावा थोड़े व्यायाम से भी लाभ हो सकता है।

जुकाम की वजह से स्वयं व शिशु को भूखा न रखें। भूख न लगने पर भी पौष्टिक भोजन लें। थोड़ा मनपसंद भोजन खाने में भी कोई हर्ज नहीं है। विटामिन सी युक्त फल या जूस लेने की कोशिश करें लेकिन विटामिन सी की अतिरिक्त खुराक न लें।जिंक व एक्नीशिया के मामले में भी यही ध्यान रखें।

तरल पदार्थों की मात्रा में कमी न आने दें।बुखार, छींकों या जुकाम की वजह से आपके शरीर में तरल पदार्थों की मात्रा घट सकती है हल्के गुनगुने तरल पदार्थों से आराम आएगा। गर्म सूप पीएँ। पानी व ठंडे जूस ले सकती हैं, यह आपके स्वाद पर निर्भर करता है।

सोते समय अपना सिर को तकिया लगाकर ऊँचा कर लें। इस तरह नाक बंद होने पर भी आसानी से सांस आएगी। ‘नेसल स्ट्रिप’भी बंद नाक खोलने में मदद कर सकती है। वे बाजार में उपलब्ध हैं तथा उनमें कोई दवा नहीं होती।

अपनी नाक में सेलाइन नोज़ ड्रॉप डालकर उसे नम बनाए रखें यह भी पूरी तरह सुरक्षित है। यदि गले में दर्द या खराश हो, खांसी हो तो हल्के गुनगुने पानी से गरारे करें। यदि बुखार हो तो उसे जल्द से जल्द उतारने की कोशिश करें। डॉक्टर की बताई गई दवा जरूर लें। यह न मान लें कि गर्भावस्था में सभी दवाएँ लेना हानिकारक होता है। बीमारी का इलाज होना भी जरूरी है।

यदि जुकाम की वजह से खाने या सोने में दिक्कत हो तो या खांसी के साथ हरा-पीला कफ आए, छाती में दर्द हो, नाक में तकलीफ हो, एक सप्ताह तक यही लक्षण बने रहें तो डॉक्टर से मिलें हो सकता है कि जुकाम संक्रमण में बदल गया हो, ऐसे में आपकी व शिशु की सुरक्षा के लिए दवा लेना जरूरी होगा।

साइनसाइटिस

‘‘मुझे एक सप्ताह से जुकाम है। मेरा माथा और गाल काफी दुख रहे हैं। मुझे क्या करना चाहिए?’’

लगता है कि आपका जुकाम साइनसाइटिस में बदल गया है। इसके लक्षण यही हैं कि माथा, गला व जबड़ा भी दुखने लगते हैं व नाक से काफी गंदा हरा-पीला म्यूकस निकलता है। गर्भावस्था में अक्सर ऐसा हो जाता है क्योंकि आपके हार्मोन म्यूकस मैम्ब्रेन में भी सूजन पैदा कर देते हैं। जिससे नाक बंद होती है और कीटाणुओं को डेरा डालने का मौका मिल जाता है। इम्यून कोशिकाएँ इनके डेरे तक आसानी से नहीं पहुँच पातीं और साइनस की बीमारी लंबी खिंच जाती है। सुरक्षित एंटीबायोटिक दवाओं की मदद से इस पर काबू पा सकते हैं।

सर्दी या फ्लू

आपको इन दोनों का फर्क पता होना चाहिए। सर्दी लगने पर गले में दर्द व खराश होती है, नाक बहती है व छींकें आने लगती हैं। शरीर में हल्की हरारत व दर्द भी हो जाता है। फ्लू में 104 तक बुखार हो सकता है। मांसपेशियों में सूजन आ जाती है। थकान व कमजोरी महसूस होती है। कई बार उल्टी भी आ सकती है। छींके व खांसी भी हो जाती है। आप दवा लेकर आसानी से राहत पा सकती हैं।

फ्लू का मौसम

‘‘अगर मुझे फ्लू की बीमारी हो गई तो?क्या यह गर्भावस्था में सुरक्षित है?’’

आपको इस मौसम में बचाव के लिए फ्लू शॉट ले लेना चाहिए। गर्भावस्था में तो यह और भी जरूरी है। इस बारे में अपने डॉक्टर की राय लें। फ्लू फैलने से पहले ही उसकी रोकथाम की दवा लेनी चाहिए। हालांकि यह पूरी तरह प्रभावी नहीं होती लेकिन यह फ्लू वायरस से बचाव करती है। इस तरह आप फ्लू के खतरे से बच सकती हैं। चाहे संक्रमण न भी रोक पाए, इससे लक्षणों की गंभीरता में कमी आ जाती है।

आपको ‘नैज़ल स्प्रे वैक्सीन’ की बजाए सुई के जरिए दवा लेनी चाहिए। यदि फ्लू का अंदेशा हो तो इलाज करवाने में देर न करें वरना यह निमोनिया में बदल सकता है। इस दौरान भरपूर मात्रा में पानी पीएँ व आराम करें ताकि डीहाईड्रेशन न होने पाए।

बुखार

‘‘मुझे हल्का बुखार है। ऐसे में मुझे क्या करना चाहिए?’’

गर्भावस्था के दौरान शरीर की हल्की हरारत को ज्यादा गंभीरता से नहीं लें लेकिन इसे अनदेखा भी न करें यानि आपको बुखार उतारने के लिए फटाफट कुछ करना होगा।तापमान पर नजर रखें।

100.40 से अधिक तापमान होने पर,उसी समय अपने डॉक्टर को फोन करें। इस दौरान बुखार उतारने के लिए टाइलीनॉल लें पर अपने-आप कोई दूसरी दवा न खाएँ। स्नान,ठंडे पेय पदार्थ व हल्के कपड़ों से तापमान कम हो सकता है। गर्भावस्था में डॉक्टर की राय के बिना एस्प्रिन या इबूफेन कभी न लें।

यदि इससे पहले भी तेज बुखार हो चुका हो तो उस बारे में भी डॉक्टर को बताएँ।

स्टैप थ्रोट

‘‘मेरे तीन साल के बच्चे कोस्ट्रैप थ्रोटहो गया है। क्या इससे मुझे अजन्मे शिशु को भी संक्रमण हो सकता है?’’

बच्चों को अपने कीटाणु दूसरों तक फैलाने में देर नहीं लगती गर्भावस्था में तो आप और भी जल्दी ऐसे संक्रमण की चपेट में आ सकती हैं।

बच्चे का जूठा पानी न पीएँ या उसका बचा जूठा खाना न खाएँ। अपने हाथ बार-बार धोएँ। बढ़िया पौष्टिक खाने व आराम से अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखें।

यदि आपको संक्रमण का डर लगे तो थ्रोट कल्चर के लिए डॉक्टर के पास जाएँ।यदि सही तरह की एंटीबायोटिक ली तो शिशुको संक्रमण का डर नहीं रहेगा। घर में बच्चे या किसी दूसरे पारिवारिक सदस्य को दी गई दवा न लें।

 

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