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प्रेगनेंसी में बीमारियों के इलाज से बेहतर है बचाव

गृहलक्ष्मी टीम

16th July 2019

प्रेगनेंसी में बीमारियों के इलाज से बेहतर है बचाव

टॉक्सोप्लाज्मोसिस

‘‘हालांकि बिल्ली के सारे काम मेरे पति ही करते हैं लेकिन मैं बिल्ली के साथ रहती हूँ इसलिए टाम्सोप्लाजमोसिस के बारे में सोचते ही मुझे घबराहट होने लगती है। यदि मुझे यह रोग हो गया तो मुझे इसका पता कैसे चलेगा?’’

उम्मीद है कि आपको यह बीमारी नहीं होगी। यदि आप लंबे समय से बिल्ली के साथ रह रही हैं, तो हो सकता है कि आपको पहले से ही इंफैक्शन हो चुका हो और आपके शरीर में उसकी एंटीबॉडीज़ बन चुकी हों।

यदि आपको इसके लक्षण महसूस हों तोजांच करा लें। घर में इसकी जांच न करें, उसे विश्वसनीय नहीं माना जा सकता। यदि जांच में यह रोग पता चला तो आपको एंटीबायोटिक दिए जाएँगे ताकि रोग शिशु तक न पहुँचे। यदि इंफैक्शन हो तो गर्भावस्था के शुरूआती दौर में इसकी रोकथाम हो जाती है। ऐसे मामले बहुत कम हो पाते हैं कि यह रोग शिशु तक पहुँचें आजकल अल्ट्रासाउंड द्वारा भ्रूण की जांच से भी पता चल जाता है कि उस तक संक्रमण पहुँचा है या नहीं।

वैसे तो इसका सबसे बड़ा इलाज बचाव ही है।

साइटोमिगेलोवायरस (सी.एम.वी.)

‘‘मेरा बच्चा स्कूल से एक नोट लाया है कि स्कूल में साइटोमिगेलो वायरस फैला है। क्या यह मेरे गर्भस्थ शिशु को भी हो सकता है?’’

आपके बेटे से शिशु तक (सी.एम.वी.) के वायरस नहीं पहुँच सकते। आपको तो बचपन में ही यह हो चुका होगा, हालांकि यह फिर से सक्रिय भी हो सकता है। चाहे आप भी गर्भावस्था में सी. एम. वी. की चपेट में आजाएँ, फिर भी शिशु के लिए कोई खास खतरा नहीं है। यदि यह आपको दूसरी बार हो रहा है तो खतरा और भी घट जाता है। वैसे तो आपको बचाव ही रखना चाहिए। अपने बच्चे का बचा हुआ खाना न खाएँ। उसका मल साफ करने के बाद अपने हाथ अच्छी तरह धोएँ व साफ-सफाई के नियमों का पालन करें।

इस रोग के लक्षणों में बुखार, थकान,गले में दर्द, व ग्रंथियों की सूजन को शामिल कर सकते हैं। ऐसे लक्षण सामने आते ही डॉक्टर को दिखाएँ। आपको थोड़े इलाज की जरूरत होगी।

फिफ्थ डिज़ीज

‘‘मैंने सुना है कि फिफ्थ डिज़ीज से भी गर्भावस्था में परेशानी हो सकती है।’’

यह छः रोगों के समूह में से पांचवें रोग का नाम है, जिसकी वजह से बच्चों को बुखार होता है। चिकनपॉक्स व मीज़ल्स इसकी बहनें हैं और कई बार तो इसके लक्षण पता तक नहीं चलते। केवल 15 से 30 प्रतिशत मामलों में ही बुखार का पता चलता है इसके लिए लक्षणों को प्रायः रूबेला के लक्षण ही मान लिया जाता है।

हालांकि सभी बच्चों को बचपन में ही यह रोग हो चुका होता है। अतः किशोरावस्था में इसके संक्रमण की संभावना न के बराबर है। यदि आप इसकी शिकार होती हैं और भ्रूण तक संक्रमण पहुँचता है तो उसे एनीमिया हो सकता है। डॉक्टर अल्ट्रासाउंड की मदद से सारी जानकारी लेते रहते हैं। यदि गर्भावस्था के शुरूआती दौर में यह संक्रमण हो तो गर्भपात का खतरा बढ़ जाता है।

हालांकि इस संक्रमण के होने की संभावना न के बराबर होती है लेकिन गर्भावस्था में हर तरह का बचाव ही सबसे बड़ा मूलमंत्र है।

 मीज़ल्स

‘‘मुझे याद नहीं कि मैंने बचपन में मीजल्स का टीका लगवाया था या नहीं। क्या मुझे अब टीका लगवाना चाहिए?’’

नहीं, आमतौर पर गर्भावस्था में इसका टीका नहीं लगाया जाता। ज्यादातर महिलाओं को बचपन में मीज़ल्स हो चुका होता है या उसका टीका लगा होता है। यदि आपकी मेडिकल हिस्ट्री से कुछ पता नहीं चलता या आपके माता-पिता को इस बारे में कुछ याद नहीं।डॉक्टर जांच कर सकते हैं कि आप इसके लिए इम्यून हैं या नहीं! यदि मान लें कि आपको यह संक्रमण हो भी जाता है तो डॉक्टर लक्षण दिखाई देते ही इसे संभाल लेंगे। इससे प्रीमेच्योर लेबर या गर्भपात का डर तो बढ़ता लेकिन जन्मजात विकृति का कोई डर नहीं होता। यदि प्रसव के आसपास मीज़ल्स हो तो शिशु को संक्रमण होने का डर है। गामा ग्लोब्यूलिन की मदद से संक्रमण को काफी हद तक घटा सकते हैं। वैसे इसके होने की संभावना न के बराबर है।

 मम्स

‘‘मेरी एक सहकर्मी को मम्स हैं। क्या मुझे बचाव के लिए इसका टीका लगवाना चाहिए?’’

ऐसा होना असंभव है। पूरी उम्मीद है कि आपको भी एम.एम.आर का टीका लगा होगा।इस बारे में अपने माता-पिता या परिवार के डॉक्टर से पूछ कर निश्चिंत हो सकती हैं।

यदि यह हो और आपको टीका न लगा हो तो इसे अब लगवा सकते हैं। इससे भ्रूण कोकोई नुकसान नहीं होगा। हाँ इससे समय से पहले प्रसव या गर्भपात का डर हो सकता है।इसलिए पहला लक्षण सामने आते ही संभलजाएँ। इसके लक्षण हैं ‒बुखार, भूख में कमी,कान में दर्द, चबाने पर मुँह में दर्द आदि।डॉक्टर को इस बारे में तुरंत सूचित करें ताकिकिसी तरह की कोई परेशानी न हो। सुरक्षा केलिहाज से, गर्भावस्था से पूर्व ही एम एम आरका टीका लगवाएँ।

स्वस्थ रहें

गर्भावस्था में तो बचाव ही सबसे बड़ा मूलमंत्र माना जाता है। सबसे पहले तो आप पौष्टिक आहार लें ताकि आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बनी रहे। पूर्ण नींद व व्यायाम पर ध्यान दें और तनाव को दूर रखें। बीमार लोगों से दूर रहें क्योंकि आप आसानी से संक्रमण की चपेट में आ सकती हैं। घर से बाहर मुँह व नाक ढक लें। जिसकी नाक बह रही हो उससे हाथ न मिलाएँ। हाथों से ही संक्रमण फैलता है इसलिए दिन में कई बार गुनगुने पानी से हाथ धोना न भूलें। खाने से पहले तो हाथ धोना और भी जरूरी होता है। घर में बीमार बच्चे या पति का जूठा न खाएं। उन्हें चुंबन भी न दें। उनके मैले कपड़े धोने के बाद अपने हाथ अवश्य धोएँ। उन्हें खांसते, छींकते समय मुँह पर हाथ रखने की बजाए कुहनी रखने को कहें क्योंकि हाथों से संक्रमण जल्दी फैलता है। जहाँ-जहाँ वे हाथ लगाएँ (फोन, बोर्ड, रिमोट) वहां स्प्रे करें। यदि आपके बड़े बच्चे को किसी भी संक्रमण के लक्षण दिखाई दें तो डॉक्टर को दिखाने में देर न करें। अपने पालतू जानवरों को साफ रखें व समय पर टीके लगवाएँ।

  •   टूथब्रश जैसी चीज़ न बाँटें व कुल्ला करने के लिए डिस्पोजेबल कप इस्तेमाल करें।
  •   यदि आपके घर में बिल्ली है तो टॉक्सोप्लाजमोसिस से अपना बचाव करें।
  •   यदि लाइम डिजीज़ का खतरा हो तो अपना तुरंत बचाव करें।
  •   खाना साफ व पौष्टिक होना चाहिए। बाजारों में खुला बिकने वाला भोजन न करें।

 रूबेला

‘‘देश से बाहर के दौरे में रूबेला हो सकता है, क्या मुझे इस बारे में चिंता करनी चाहिए?’’

मुझे लगता है कि आपको इस बारे में ज्यादा चिंतित होने की जरूरत नहीं है। यदि आप इसके टीके के बारे में आश्वस्त नहीं हैं तो एक जांच से पता लगा लें। रूबेला एंटीबॉडीहिटर से शरीर में एंटीबॉडीज के स्तर की जांच की जाती है। डॉक्टर से पहली मुलाकात में यह जांच करवा लें। यदि अब तक आपने यह जांच नहीं करवाई तो इसे अब करवा लें।

यदि आपको गर्भावस्था में इसका संक्रमण हुआ भी तो शिशु पर इसका असर इसी बात पर निर्भर करेगा कि आपको किस समय में यह संक्रमण हुआ। पहले माह में शिशु में जन्मजात विकृति होने का डर ज्यादा है। तीसरे महीने के बाद से खतरा थोड़ा घट जाता है।

यदि आप गर्भधारण से पहले इसका टीका लगवाती हैं तो आपको एक माह तक गर्भ धारण न करने की सलाह दी जाती है।यदि इस दौरान आप गर्भधारण कर भी लें तो घबराने की कोई बात नहीं है। इसमें कोई डर नहीं है।

चिकन पॉक्स

‘‘मेरे पहले शिशु को बाहर दूसरे बच्चे से चिकन पॉक्स हो गया। क्या इससे मेरे गर्भस्थ शिशु को खतरा हो सकता है?’’

शिशु को केवल अपनी मां से ही संक्रमण पहुँच सकता है। उम्मीद है कि आपको बचपन में यह संक्रमण हो चुका होगा और उसका टीका भी लगा होगा। अपने डॉक्टर या माता-पिता से इस बारे में पता करें।यदि आपको किसी से संक्रमण हो भी जाए तो 96 घंटे के भीतर टीका लग जाना चाहिए। इस तरह आप कई तरह की जटिलताओं से बच जाएँगी। यदि आपके लक्षण ज्यादा गंभीर हुए तो बचाव के लिए एंटीवायरस दवा दे सकते हैं।

यदि गर्भावस्था के शुरूआती दौर में यह संक्रमण हुआ तो शिशु में जन्मजात विकृति हो सकती है। बाद में होने पर ऐसा कोई खतरा नहीं है। यदि डिलीवरी के आसपास संक्रमण हो तो शिशु को संक्रमण हो सकता है। जिसके लिए डॉक्टर पहले ही एंटीबॉडीज़ दे देंगे।

यदि हर्प्स जॉस्टर हो जाए तो इससे ज्यादा डर नहीं रहेगा क्योंकि आप लोगों के पहले ही एंटीबॉडीज़ दी जा चुकी होंगी।

यदि आपको इसका टीका नहीं लगा तो डिलीवरी के फौरन बाद टीक लगावाएँ ताकि आने वाली गर्भावस्थाएं सुरक्षित हों। टीका लगाने के एक महीने बाद तक गर्भ धारण न करें।

 लाइम डिज़ीज

मेरे क्षेत्र में लाइम डिजीज़ का काफी खतरा है। क्या यह गर्भावस्था में नुकसान पहुँचा सकती हैं?’’

आमतौर पर वनों के आसपास वाले क्षेत्रों में हिरण या चूहों व दूसरे जानवरों के साथ रहने वाले लोगों में यह रोग पाया जाता है लेकिन आप शहर में रहने पर भी इसका शिकार हो सकती हैं क्योंकि आपके घर में किसान के खेत से ही सब्जी आती है।

बचाव ही सबसे बड़ा मंत्र है। प्यास वाले मैदान में जाने से पहले लंबी पैंट, जूते व जुराबें पहनें। यह देख लें कि आपके पाँवों में कोई जोंक या टिक न चिपके। यदि यह आपको काट ले तो थकान, सिर दर्द, गर्दन में जकड़न व बुखार जैसे लक्षण उभर सकते हैं। उसी समय डॉक्टर को दिखाएँ। स्थिति बिगड़ने पर लक्षण गंभीर हो सकते हैं।

यदि सही समय पर लाइम संक्रमण कीदवा ले लेेंगी तो शिशु को कोई खतरा नहींरहेगा।

हेपेटाइटिस

‘‘शिशुगृह में एक बच्चे को हेपेटाइटिस हो गया। मैं वहाँ काम करती हूँ। क्या मेरे गर्भस्थ शिशु को कोई नुकसान हो सकता है?’’

इसके लक्षण प्रायः दिखाई नहीं देते व यह अक्सर भ्रूण तक नहीं पहुँचता। यदि आपको यह संक्रमण हुआ भी तो गर्भावस्था में कोई खतरा नहीं है पर आप बचाव ही रखें। आप उन शिशुओं की देखभाल के समय बार-बार हाथ धोएँ व कुछ खाने से पहले भी हाथ धोएं। आप इसके टीके के बारे में भी डॉक्टर से पूछ सकती हैं।

हेपेटाइटिस बी

‘‘मुझे हेपेटाइटिस बी है और मैं गर्भवती भी हूँ। क्या इससे मेरे शिशु को कोई नुकसान हो सकता है?’’

  इसका संक्रमण डिलीवरी के समय शिशु तक जाता है। उससे पहले ही डॉक्टर बचाव का कदम उठा लेंगे। आपके नवजात को जन्म के 12 घंटे के भीतर ही दवा मिल जाएगी ताकि उसे यह संक्रमण न हो। उसे जब सारे टीके लग जाएँगे वो 12 से 15 महीने के बाद एक जांच होगी ताकि पता लग जाए कि इलाज पूरा हुआ या नहीं।

हेपेटाइटिस सी

‘‘क्या मुझे गर्भावस्था मेंहेपेटाइटिस सीकी चिंता करनी चाहिए?’’

यह डिलीवरी के दौरान माँ से शिशु तक पहुँचसकता है हालांकि आपको इसके संक्रमण कीसंभावना काफी कम है। इस संक्रमण काइलाज गर्भावस्था के बाद ही हो सकता है।

बैल्स पाल्सी

‘‘सुबह उठी तो कान के पीछे दर्द था और जीभ पर सुन्नपन महसूस हुआ। मैंने चेहरा देखा तो पूरा एक हिस्सा लटका हुआ लग रहा था। यह क्या है?’’

इस अवस्था में चेहरे की मांसपेशी को नुकसान होने से एक ओर लकवा मार जाता है। गर्भावस्था की तीसरी तिमाही या प्रसव के समय इसके होने की संभावना ज्यादा होती है।यह अचानक होता है और सुबह सोकर उठने पर यह दिखाई देता है।

इस अस्थायी रोग का कारण नहीं पता।माना जाता है कि ऐसा बैक्टीरिया के संक्रमण की वजह से होता है। कई बार लकवे के साथ-साथ कान के पीछे दर्द, सिर दर्द, मुँह सूखना, या बोलने में कठिनाई जैसे लक्षण भी सामने आते हैं।

यह ज्यादा गंभीर नहीं होता। 6 माह में इलाज से सब ठीक हो जाता है। इससे शिशु को कोई खतरा नहीं होता। हालांकि आपको इस बारे में डॉक्टर को अवश्य बता देना चाहिए।

 

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