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शर्म छोडि़ए... बेटी से करें पीरियड्स पर बात

मोनिका अग्रवाल

15th July 2019

बदलते वक्त के साथ महिलाएं भी अब मासिक धर्म को अपनी आजादी के साथ जोड़कर देखती हैं। इस मासिक चक्र के प्रति उन्हें कोई चिंता या डर घेरे नहीं रहता, लेकिन यही डर और चिंता किशोरावस्था में पदार्पण करने वाली लड़कियों में देखने को अधिकांशत: मिल जाती है। अपने पहले पीरियड के दौरान हर लड़की का अलग-अलग रिएक्शन होता है।

शर्म छोडि़ए... बेटी से करें पीरियड्स पर बात

ये रिएक्शन आराम के रूप में या उत्साह के रूप में, यहां तक कि डर, डिप्रेशन या आत्मग्लानि के रूप में भी हो सकता है। अगर उसे पहले से पीरियड्स की जानकारी हो तो ये रिएक्शन शायद न दिखे और इस दौरान होने वाले इस तरह के भावनात्मक बदलावों पर काबू किया जा सके। तभी इस स्थिति को बेटियां बेहतर समझ सकेंगी।

कब करें चर्चा

यह न सोचें कि जब बेटी को पीरियड आएंगे, तभी आप उसे इस सब के बारे में बताएंगी, बल्कि अपनी बेटी के टीन एज होने से पहले, 9-11 साल की उम्र के आसपास ही इस विषय पर चर्चा करें, क्योंकि लड़कियां प्यूबर्टी के लिए तैयार हो चुकी होती हैं। साथ ही उसे समझाएं कि इस प्रक्रिया से हर लड़की को गुजरना पड़ता है और इस प्रक्रिया के दौरान शरीर में बहुत से प्राकृतिक बदलाव आते हैं, जिन्हें देखकर घबराना नहीं चाहिए। जैसे कि प्यूबिक हेयर ग्रोथ व वक्ष स्थल पर उभार। तभी उन्हें मेंस्ट्रुअल हाइजिन से अवगत करवा देना चाहिए। आइए जानते हैं, कैसे एक मां अपनी किशोर अवस्था में पदार्पण कर चुकी बेटी को मेंस्ट्रुअल हाइजिन से अवगत करवा सकती है।

मासिक धर्म से जुड़ी जानकारी दें

बिटिया को समझाएं कि मासिक धर्म एक सहज प्रक्रिया है, जिसमें हर 21 से 28 दिन या किसी किसी में 45 दिन के चक्र के हिसाब से गर्भाशय अपने लाइनिंग के रक्त और उत्तकों की कोशिकाओं को शरीर से बाहर निकालता है। ये रक्त कोशिकाएं सर्विक्स से गुजरते हुए योनि के द्वारा बाहर निकल जाती हैं। इस दौरान खून शरीर से बाहर निकलता है। प्रोस्टाग्लैंडीन नामक हार्मोन के कारण पीरियड के समय सूजन, पीठ दर्द और ऐंठन होना सामान्य बात है।

कपड़ा नहीं सेनेटरी पैड

मां अपनी लाडली को जरूर समझाए कि कपड़े का इस्तेमाल सुरक्षित नहीं है। यह कई गंभीर बीमारियों को जन्म दे सकता है, इसलिए ऐसे में सेनेटरी पैड या टैंपोन या किसी भी अन्य सुरक्षित और हाइजिन प्रॉडक्ट का चुनाव करें। एक मां ही अपनी बेटी को खुलकर जीने का मंत्र दे सकती है। शुरुआत में कपड़ों पर स् पॉटिंग होने का खतरा रहता है, इसलिए शुरुआती पीरियड्स के लिए उन् हें पीरियड्स पैंटी लाकर दें।

कब बदलें पैड

मां ह्रश्वयार से बेटी को समझाए की सेनेटरी पैड को इस्तेमाल करते समय किसी भी तरह की कंजूसी या हिचक ना महसूस करें। कम से कम 4 से 5 घंटे में एक सेनेटरी पैड बदलना जरूरी है। यह उसके अंदरूनी अंगों की स्वच्छता के लिए भी जरूरी है। साथ में यह भी बताएं कि यदि माहवारी का फ्लो ज्यादा है तो 2 से 3 घंटे या उससे पहले भी सेनेटरी पैड बदला जा सकता है। इस तरह से वह किसी भी तरह के इन्फेक्शन से दूर रहेगी।

सफाई का ध्यान रखें

बिटिया को बिना हिचक गुप्तांगों की सफाई के लिए भी जानकारी दें, क्योंकि गुप्तांगों की सफाई किसी भी इंफेक्शन से दूर रखती है। माहवारी के दौरान बहने वाला खून वैजाइना और उसके आसपास जमा होने से रैशेज़ और खुजली होने लगती है, जो कि इंफेक्शन को जन्म देती है। ऐसे किसी भी तरह के संक्रमण और गुप्तांगों से आने वाली दुर्गंध से बचने के लिए टिशु पेपर को इस्तेमाल करना सिखाएं। नहाने के बाद और सोने से पहले एंटीसैप्टिक ऑइंटमैंट या लोशन लगाएं।

प्राइवेट पार्ट की सफाई

मां से अच्छी सखी और गुरु बेटी के पास कोई और नहीं। एक मां ही उसको सही और गलत में फर्क समझा सकती है, इसलिए मां का फर्ज बनता है कि वह बेटी को बिना हिचक के वेजाइना को साफ करने का तरीका भी समझाएं। बेटी को समझाएं कि जब भी गुप्तांगों की सफाई करें तो योनि से गुदा की ओर सफाई करना उचित है। यदि इससे उलटी दिशा में गुप्तांगों की सफाई की जाएगी तो बैक्टीरिया योनि में जा सकते हैं, जिससे इंफेक्शन फैलता है।

(एसोसिएट प्रोफेसर और मनोवैज्ञानिक डॉ. पूजा महौर, केजीएमयू कॉलेज, लखनऊ तथा सीनियर कंसलटेंट एंड गाइनो, मालती सक्सेना, मानसी नॄसग होम से बातचीत पर आधारित।)

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