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ये तरीके अपनाएं और बच्चों को दें अच्छी परवरिश

संविदा मिश्रा

15th July 2019

कई बार माता-पिता के बीच रिश्ता खुशहाल न हो तो बच्चे ये भी महसूस कर लेते हैं और इसका पूरा असर उनकी आने वाली जिंदगी पर पड़ता है और बच्चे भी अपने रिश्ते को लेकर असुरक्षित महसूस करने लगते हैं.....

ये तरीके अपनाएं और बच्चों को दें अच्छी परवरिश
 एक कहावत है कि बच्चे कच्ची मिट्टी की तरह होते हैं जैसा आकार दोगे उसी में ढल जाएंगे।  कोरे कागज़ की तरह हर फिक्र से अंजान  बच्चे जिनका भविष्य माता -पिता अपनी कलम से लिखते हैं वो पूरी तरह से अपने माता- पिता पर निर्भर होते हैं।  कई बार माता-पिता अपने बच्चों को नज़रअंदाज़ करते हुए अपनी समस्याओं को उनके सामने उजागर कर देते हैं जिससे उन पर बुरा असर होता है। बच्चे अपने सामने जो भी देखते हैं, वही सीखते हैं। घर में हेल्दी रिलेशनशिप  को देखकर  बच्चे हर क्षेत्र में उन्नति करते हैं। आइए आपको बताते हैं कुछ ऐसे तरीके जिनसे आप अपने  रिश्ते को खुशहाल बना सकते हैं और बच्चों को भी अच्छी परवरिश दे सकते हैं। 
 
बच्चों के सामने किसी बात पर बहस या झगड़ा न करें 
मेरे पापा अक्सर ऑफिस के टूर पर इसलिए  चले जाते हैं क्योंकि मम्मी उनसे हर बात पर बहस करती रहती है  राहुल ने  थोड़ा उदास होकर अपनी टीचर को ये बात बताई।  हम अक्सर आपसी झगडे  में उलझ जाते हैं और ये भी भूल जाते हैं कि बच्चा बहुत  ध्यान से हमारी बातें सुन रहा है। अगर पेरेंट्स  आपस में बहस करेंगे  तो बच्चा भी यही सीखता है।  कोशिश करें कि बच्चे के सामने आपस में बहस न करें और आपसी  मतभेद अकेले में सुलझाएं। 
 
एक-दूसरे की तारीफ करनी चाहिए 
कोशिश करनी चाहिए की माता-पिता बच्चे के सामने एक दूसरे  की तारीफ़ करें ,एक दूसरे के छोटे -छोटे प्रयासों की भी सराहना करें ,ये बात  बच्चा भी  तुरंत सीखता है।  यदि आप ऐसा करते हैं तो  बच्चा भी दूसरों की कोशिशों के प्रति संवेदनशील हो  जाता  है। इससे आपका अपने पार्टनर के साथ रिश्ता भी निखरेगा साथ ही साथ बच्चा भी अच्छी बातें सीखेगा। 
 
परिवार की जिम्मेदारियां बांटें
पति- पत्नी एक ही सिक्के के दो पहलू होते हैं।  इसलिए उन्हें परिवार की गाड़ी भी मिलकर ही चलानी चाहिए।  किसी एक के ऊपर किसी काम का बोझ न पड़े इसलिए मिल-जुलकर जिम्मेदारियां उठाएं। आजकल की भागदौड़ की ज़िन्दगी में जब माता-पिता दोनों वर्किंग होते हैं तो किचन से लेकर बाहर के काम भी बांटकर करने की कोशिश करें  इससे बच्चा भी मिलकर काम करने का महत्त्व  समझने लगता है।  
 
गलतियों को नज़रअंदाज़ करें 
गलतियां करना एक आम इंसान की फितरत में शुमार होता है।  ग़लतियाँ किसी  से भी हो सकती हैं लेकिन गलतियों को ज्यादा बढ़ावा न देकर   कभी-कभी उन्हें नज़रअंदाज़  भी किया जाना चाहिए। ऐसा करने से बच्चे को ये सीख मिलेगी कि गलती किसी से भी हो सकती है लेकिन हमें माफ करना आना चाहिए।  और बच्चा भी अपनी गलतियों को छिपाने की जगह माता-पिता से शेयर करेगा। 
 
 

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