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गर्भावस्था के दौरान दवा का प्रयोग

गृहलक्ष्मी टीम

18th July 2019

गर्भावस्था के दौरान दवा का प्रयोग

कोई भी दवा उठा लें, उस पर चेतावनी होती है कि गर्भवती महिला डॉक्टर की राय के बिना दवा न ले। यदि आप भी कभी-कभी केमिस्ट से दवा लेकर खाती हैं तो पता कैसे लगाएँगी कि दवा सुरक्षित है या नहीं?

माना कि कोई भी दवा अपने-आप न खाना ही 100 प्रतिशत सुरक्षित है लेकिन कुछ दवाएँ ही गर्भावस्था में हानिकारक होती हैं।अनेक दवाएँ ऐसी हैं, जिनसे आपको व शिशु को कोई नुकसान होने की संभावना नहीं है।दर असल कई बार हालात ऐसे बनते हैं कि गर्भावस्था में दवा लेना जरूरी हो जाता है।

कोई भी दवा लेने से पहले उसके फायदों के साथ-साथ नुकसान का भी अंदाजा लगा लें। डॉक्टर को अपने हर फैसले में शामिल कर सकें तो बेहतर होगा। कई बार दवाओं को सुरक्षा के लिहाज से ए, बी, सी, डी, ई की श्रेणी में बाँट दिया जाता है। वैसे आप इस चक्कर में न पड़ें, बस इतना ध्यान रखें कि अपने डॉक्टर या दाई से पूछे बिना कोई भी एलोपैथी, होम्योपैथी व आयुर्वेदिक दवा न लें।

आम दवाएँ

बहुत सी दवाएँ ऐसी हैं जो गर्भावस्था में पूरी तरह से सुरक्षित हैं। वे चुटकियों में बहती नाक व सिरदर्द से आराम दिला सकती हैं। कुछ दवाएँ ऐसी हैं, जो पहली तिमाही में नुकसानदायक हो सकती हैं। कुछ दवाएँ पूरी गर्भावस्था में बिल्कुल मना होती हैं।

टाइलीनोल :- एसीटैमिनोफेन को गर्भावस्था में थोड़ा सुरक्षित माना जाता है लेकिन आप पहली बार इसकी खुराक लेते समय डॉक्टर की राय लें।

एस्प्रिन :- आपको तीसरी तिमाही में यह दवा न खाने की सलाह दी जाती है क्योंकि इससे नवजात को कठिनाई हो सकती है। डिलीवरी के दौरान अधिक रक्तस्राव हो सकता है।अध्ययनों से पता चला है कि एस्प्रिन की थोड़ी मात्रा से प्रीक्लैंपसिया में फायदा हो सकता है लेकिन इस बारे में डॉक्टर ही बताएँगे कि आपको लेनी चाहिए या नहीं। यदि इसे रक्त पतला करने वाली दवा के साथ दिया जाए तो गर्भपात का खतरा भी टल सकता है, बस अपनी अवस्था के हिसाब से व डॉक्टर की राय से चलें।

हर्बल देखभाल

माना कि गर्भावस्था में आराम दिलाने का आश्वासन देने वाली हर चीज़ अच्छी लगती है लेकिन हर कुदरती दवा को सुरक्षित नहीं मान सकते। जब भी हर्बल दवा लें तो अतिरिक्त सावधानी बरतें। उसे तभी लें,जब डॉक्टर ने लेने की सलाह दी हो।यदि आपको कुदरती इलाज इतने ही पसंद हैं तो दवाओं की बजाय वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतियों पर ध्यान दें। उनसे कोई नुकसान होने का डर नहीं है।

एडविल या मोट्रिन :- पहली व तीसरी तिमाही में इब्रूफेन का इस्तेमाल सोच-समझकर करें।इसके भी एस्प्रिन की तरह नकारात्मक प्रभाव हो सकते हैं। डॉक्टर की जानकारी के बिना इसका इस्तेमाल न करें।

एलीव : - इसे आप गर्भावस्था में बिल्कुल इस्तेमाल नहीं कर सकतीं।

नैज़ल स्प्रे :- बंद नाक से छुटकारा पाने के लिए नैज़ल स्प्रे का प्रयोग कर सकती हैं।डॉक्टर से पूछ कर सही ब्रांड का नाम नोट कर लें। इसके अलावा नैज़ल स्ट्रिप भी ठीक रहती है।

एंटीएसिड :- छाती में जलन होने पर कोई एंटीएसिड ले सकती हैं, लेकिन उसकी खुराक डॉक्टर से पूछ लें।

गैस एड्स :- कभी-कभी गैस भगाने के लिए दवा ले सकती हैं।

एंटीहिस्टेमाइन :- कुछ एंटीहिस्टेमाइन ऐसे हैं,जिन्हें गर्भावस्था में सुरक्षित माना जाता है।बेनेड्रिल को सुरक्षित माना जा सकता है। कई डॉक्टर क्लोर-ट्रिमसेन लेने की भी सलाह देते हैं।

नींद की दवा :- गर्भावस्था में यूनीसोम,टाइलीनोल, सोमीनेक्स व नाइलीटोल जैसी दवाओं को सुरक्षित माना जाता है। डॉक्टर इन्हें कभी-कभी लेने की सलाह देते हैं।

डीकांजेस्टेंट :- यदि इस्तेमाल करना ही पड़े तो सीमित मात्रा में सूडाफेड इस्तेमाल करें।पहले अपने डॉक्टर से पूछ लें।

एंटीडायरियल :- इसमें सभी दवाएँ गर्भावस्था के लिए सुरक्षित नहीं मानी जातीं इसलिए डॉक्टर से पूछे बिना कोई दवा न लें।

एंटीबायोटिक्स :- यदि डॉक्टर ने बैक्टीरिया इंफेक्शन की वजह से एंटीबायोटिक्स दिए हैं तो वे पेंसिलीन या एंटीथ्रोमाइसिन परिवार की दवा दे सकते हैं। आप उसी डॉक्टर से एंटीबायोटिक लें, जिसे आपकी गर्भावस्था का पता हो।

एंटीडिप्रेसेंट :- यदि डिप्रेशन का सही तरीके से इलाज न हो सके तो शिशु पर बुरा असर हो सकता है। ये दवाएँ शिशु की बढ़त के हिसाब से समय-समय पर बदलनी पड़ती हैं।

एंटीनाजिया :- कुछ दवाओं के मेल से मॉर्निंगसिकनेस तो घटती है लेकिन उनकी वजह से दिन में उनींदापन छाता है इसलिए सोच-समझकर ही इस्तेमाल करें।

टॉपिकल एंटीबायोटिक्स :- वैक्टीरेसिन या नियोसपोरिन जैसे टॉपिकल एंटीबायोटिक्स सीमितमात्रा में ले सकते हैं।

टॉपिकल स्टीरॉयड्स :- टॉपिकलहाइड्रोकार्टिज़ोन की सीमित मात्रा ले सकते हैं।

गर्भावस्था के दौरान दवा का प्रयोग

यदि डॉक्टर गर्भावस्था में कोई दवा लेने की सलाह दें तो लाभ बढ़ाने व खतरे घटाने के लिए निम्नलिखित कदम उठाएँ :

डॉक्टर से पूछें कि आप कम समय के लिए थोड़ी खुराक से काम चला सकते हैं।

दवा तभी लें, जब वह ज्यादा से ज्यादा फायदा करे, जैसे सर्दी की दवा रात को सोते समय लें।

निर्देशों का पालन करें। पढ़ लें कि उसे पानी से लेना है या दूध से। उसके साइडइफेक्ट भी पता करें। यदि उस पर गर्भावस्था में न लेने की चेतावनी लिखी हो तो घबराएँ नहीं।ज्यादातर दवाओं पर ऐसा लिखा होता है पर वे सुरक्षित होती हैं। डॉक्टर भी बिना सोचे-समझे तो दवा नहीं देंगे न!

घर में एलर्जी बढ़ाने वाले पदार्थ हटाएँ और दवा लें ताकि उनका असर ज्यादा हो। हर्बल दवाएँ सुरक्षित हैं पर डॉक्टर की राय लेना जरूरी है। दवा निगलने से पहले एक घूंट पानी पीएँ ताकि वह गले से नीचे जा सके फिर पूरा गिलास पानी पीएँ ताकि वह शरीर में जाकर घुल जाए।

अपनी दवाएँ किसी एक ही दुकान से लें।दवा का नाम व खुराक जांचकर ही दवा खाएँ। एक्सपायरी डेट पढ़ लें व दवा लेने के बाद स्वयं ही नाम पढ़ें। कई बार केमिस्ट भी गलती से दूसरी दवा दे सकता है।

जब कोई दवा गर्भावस्था में पूरी तरह सुरक्षित हो तो उसे लेने में न हिचकिचाएँ।उससे शिशु को कोई नुकसान नहीं होगा और आपका इलाज हो जाएगा।

 

 

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