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प्रेगनेंसी के दौरान जटिल हो सकती हैं ये बीमारियां

गृहलक्ष्मी टीम

18th July 2019

प्रेगनेंसी के दौरान जटिल हो सकती हैं ये बीमारियां

कैंसर

गर्भावस्था में कैंसर होना सामान्य नहीं है लेकिन यह हो भी सकता है। उस समय इलाज का सही संतुलन बनाना बहुत जरूरी हो जाता है। गर्भकाल, कैंसर का प्रकार,उसकी अवस्था, आपकी प्रतिरोध क्षमता आदि कई कारकों पर उसका इलाज निर्भर करता है। पहली तिमाही में कैंसर के इलाज से भ्रूण को खतरा हो सकता है इसलिए डॉक्टर दूसरी तिमाही तक इंतजार करते हैं।यदि कैंसर का बाद में पता चले तो डॉक्टर डिलीवरी के बाद इलाज करते हैं ताकि शिशु का जन्म हो जाए।

गर्भावस्था के आखिरी दिनों में यह बात थोड़ी उलझन वाली हो सकती है लेकिन यह इतनी खतरनाक नहीं होगी। बस आप इतना ध्यान दें कि इस दौरान दमे के दौरे को लंबा न खिंचने दें।

दमे का प्रसव व डिलीवरी पर क्या असर होगा? आप बिना किसी दवा के काम चला सकती हैं। एपीड्यूरल में भी कोई दिक्कत नहीं आएगी लेकिन डैमीरोल जैसे नारकोटिक दर्द निवारकों से दमे का दौरा उभर सकता है। यदि उस दौरान दवा से बात न बने तो डॉक्टर आपको आई वी स्टीरॉयड दे सकते हैं। आक्सीजिनेशन की भी जांच होगी। यदि यह कम पाई गई तो इसकी दवा दी जाएगी ऐसी माँओं के शिशुओं की जन्म के बाद काफी तेज सांस चलती है लेकिन यह परेशानी अस्थायी होती है। डिलीवरी के तीन महीने बाद दमे के वही लक्षण उभर आएँगे जो कि गर्भावस्था से पहले होने थे।

 सिस्टिक फाइब्रोसिस

‘‘मुझे सिस्टिक फाइब्रोसिस है। इससे गर्भावस्था कितनी जटिल हो सकती है?’’

आप तो पहले ही जानती हैं कि सी एफ के साथ जीना कितना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।हालांकि गर्भावस्था में यह चुनौती और भी बढ़ जाती है लेकिन आप व आपका डॉक्टर मिलकर गर्भावस्था को सुखद व सुरक्षित बना सकते हैं।

सबसे पहले तो आपको वजन बढ़ाना है।इसके लिए किसी आहार विशेषज्ञ की राय लें।आपको अपनी व शिशु के विकास की जांच के लिए डॉक्टर के पास कई बार जाना होगा।आपकी गतिविधियाँ सीमित हो सकती हैं क्योंकि यहाँ समय से पहले प्रसव का खतरा रहता है।खतरा घटाने के लिए अतिरिक्त सावधानी बरती जाती है ताकि शिशु का प्रसव समय पर हो। समय से पहले अस्पताल ले जाने की जरूरत भी पड़ सकती है।

जेनेटिक काउंसिलिंग से पता चल सकता है कि होने वाला शिशु सी एफ से ग्रस्त हैं या नहीं! यदि आपके साथी को यह बीमारी नहीं है तो शिशु को शायद न हो लेकिन यदि उसे यह परेशानी है तो खतरा थोड़ा बढ़ सकता है।

डॉक्टर इस दौरान इस बात का पूरा ध्यान रखेंगे कि आपको पल्मोनरी संक्रमण न हो।कुछ महिलाओं को गर्भावस्था में फेफड़ों का संक्रमण बढ़ जाता है। हालांकि इसका कोई स्थायी नकारात्मक प्रभाव नहीं होता। यदि डॉक्टर की पूरी देखरेख में गर्भावस्था बीते तो शिशु ही गोद में आता है और किसी तरह की कोई समस्या नहीं होती।

अवसाद (डिप्रेशन)

‘‘मुझे पिछले कुछ साल से क्रॉनिक डिप्रेशन(लंब समय तक रहने वाला अवसाद) है।तब से मुझे हल्की एंटीडिप्रेसेंट दवाएँ दी जा रही हैं। क्या गर्भवती होने पर, वे दवाएँ ली जा सकती हैं?’’

कई महिलाएँ गर्भावस्था के दौरान डिप्रेशन का सामना करती हैं। सही इलाज से उनकी गर्भावस्था सामान्य हो सकती है। दवाओं के मामले में थोड़े संतुलन से काम लेना होगा।आपको अपने डॉक्टर व मनोवैज्ञानिक से पूछकर तय करना होगा कि किस तरह की दवाएँ ली जाएँ।

शिशु की शारीरिक व आपकी भावनात्मक व्यवस्था, दोनों का ही ध्यान रखना जरूरी है।गर्भावस्था हार्मोन शुरूआत में आपकी भावनात्मक अवस्था को प्रभावित कर सकते हैं जिन महिलाओं के मूड में कभी उतार-चढ़ावन आया हो, वे भी इन हार्मोनों की वजह से अवसाद की शिकार हो जाती हैं। जो पहले से अवसादग्रस्त हों, उनके लिए स्थिति और भी नाजुक हो सकती है। यदि वे दवाएँ लेना भी बंद कर दें तो उनकी हालत का अंदाजा आप खुद लगा सकते हैं।

यह अवसाद शिशु की सेहत पर भी बुरा असर डाल सकता है। अवसादग्रस्त माँ न तो ढंग से खाती-पीती हैं और न ही शिशु की सेहत पर ध्यान दे पाती हैं। वह मदिरा व धूम्रपान के शिकंजे में भी होती है। अधिक तनाव व दबाव की वजह से कई बार शिशु का जन्म समय से पहले हो जाता है, जन्म से ही वजन में कमी होती है व जन्म के बाद भी कई तरह की समस्याएं पैदा हो सकती हैं। यदि डिप्रेशन का सही तरीके से इलाज हो जाए तो माँ अपना व शिशु का पूरा ध्यान रख सकती है।

अपनी दवाएँ छोड़ने से पहले दो बार सोचें। अपने डॉक्टर से पूछ कर तय करें कि कौन सी एंटी डिप्रेसेंट दवाएं, इस समय आपके लिए ठीक रहेंगी। डॉक्टर आपको बिल्कुल सही जानकारी देंगे क्योंकि वे दिन-रात इसी तरह के मामले सुलझाते हैं। यदि किन्हीं दवाओं का थोड़ा-बहुत असर हो भी तो उसे नजरंदाज किया जा सकता है क्योंकि अवसाद का इलाज न होने पर दीर्घकालीन परिणाम सामने आ सकते हैं।

कई बार दवा के साथ-साथ मनोचिकित्सा भी सहायक होती है। वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतियाँ भी कारगर हैं। व्यायाम, ध्यान व पौष्टिक आहार भी अपना महत्व रखते हैं इसलिए इन्हें नजरंदाज न करें।

 

 

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