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टीवी से फिल्मों के इस सफर में मृणाल ठाकुर को लगता है कि वो बिलकुल नहीं बदली हैं, पढ़िए

गृहलक्ष्मी टीम (मुम्बई ब्यूरो)

14th August 2019

टीवी से फिल्मों के इस सफर में मृणाल ठाकुर को लगता है कि वो बिलकुल नहीं बदली हैं, पढ़िए
मृणाल ठाकुर की हाल ही में रिलीज़ फिल्म सुपर 30 को लोगों ने खूब पसंद किया था। कई टीवी शोज़ और मराठी फिल्मों करने के बाद जब से मृणाल ने बॉलीवुड में कदम रखा है, उनके हाथ काफी अच्छी और क्रिटिक्स को पसंद आने वाली फिल्में लगी हैं। अपनी फिल्म बाटला हाउस को प्रमोट करते हुए जब वो हमारे मुम्बई ब्यूरो की टीम से मिली तो उन्होंने फिल्म के साथ-साथ और भी बातें की, पेश है उस बातचीत के कुछ अंश-
 

जॉन अब्राहम का कहना है कि आप एक डिसिप्लिन एक्ट्रेस हैं? क्या आप बचपन से ऐसी हैं?

दरअसल मुझे लगता है कि जब हम इतने सालों से जो चाहते हैं, वो होने लगता है तो ह खुद ब खुद डिसिप्लीन हो जाते हैं।टीवी भी एक एक्टर को डिसिप्लीन सिखाता है क्योंकि वहां आपको हर मौसम, तबियत खराब है, चाहे जैसे भी हालात में आप हों, आपको निर्धारित समय पर सेट में पहुंचना ही होता है। और मैं नहीं चाहती कि मैं किसी भी तरह का रिस्क लूं और तब जब आपके साथ सेट पर खुद जॉन जैसे डिसिप्लिन्ड एक्टर हों। वो सिर्फ डिसिप्लिन्ड ही नहीं हैं, वो फिल्म के प्रोसेस में पूरी तरह से इंवॉल्व रहते हैं और दूसरे एक्टर्स को भी शामिल करते हैं, उन्होंने मुझे बहुत कंफर्टेबल फील कराया।
 
पहले टीवी और अब फिल्मों में काम करना...कितना बदलाव महसूस करते हैं?
मैं तो बिलकुल नहीं बदली हूं। हां, अब मेरा वो रुटीन बदल गया है जब मैं रोज़ सुबह चार बजे उठकर पहले वर्कआउट करती थी और फिर से टीवी ते सेट पर जाकर 12 से 14 घंटे शूटिंग करती थी। अब रूटीन उस तरह से हेक्टिक नहीं है। टीवी एक्टर्स को अपना ध्यान रखने का समय नहीं मिल पाता है। बड़ा बदलाव ये आया है कि अब कई टीवी एक्टर्स  कहते हैं कि तुमने टीवी एक्टर्स के लिए बॉलीवुड का रास्ता बना दिया है क्योंकि कई ऐसे एक्टर्स हैं जो एक बार टीवी शुरू कर देते हैं तो उनके दिमाग में ये आ जाता है कि अब बॉलीवुड नहीं कर सकेंगे। 
 
टीवी और फिल्मों में काम करना..कितना अलग है?
देखिए मुम्बई में स्टेबल लाइफ जीने के लिए आपको टीवी में काम करने की जरूरत है। टीवी से मैंने सबकुछ सीखा, लोगों से डील करना, एक्टिंग करना, जबकि फिल्मों के साथ एक बार शूटिंग खत्म तो आपके पास कुछ करने के लिए नहीं रहता है और ऐसे में बहुत बेचैनी बनी रहती है। मुश्किल होता है दो ढाई साल बिना कुछ किए रहना। मैं लकी थी कि मेरी फैमिली भी मुम्बई में थी। उस दौरान मैंने अपने ऊपर काम किया। अपनी हिन्दी पर काम किया। खूब घूमीं। 
 
आपने पत्रकारिता की पढ़ाई की है। इस रोल में मदद मिली होगी?
हां, मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई की है, लेकिन मैं इसकी डिग्री नहीं ले पाई क्योंकि पढ़ते हुए ही मैंने टीवी जॉइन कर लिया था और दोनों कर पाना बहुत मुश्किल था। मैंने पांचवे सेमेस्टर की परिक्षा नहीं दी थी। लेकिन उस वक्त जो मैने सीखा वो संजीव कुमार यादव की बीवी शोभना यादव, जो कि एक टीवी एंकर हैं, का किरदार निभाते हुए मुझे बहुत काम आया। 
 
 
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