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चिकित्सा पर्यटन का केंद्र बना हमारा भारत महान

ऋचा कुलश्रेष्ठ

2nd May 2017

अमरीका, ब्रिटेन और अन्य यूरोपीय देशों की तुलना में दक्षिण एशियाई देशों, खाड़ी देशों से उपचार कराने भारत आने वाले लोगों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है।

चिकित्सा पर्यटन का केंद्र बना हमारा भारत महान

 

जहां एक ओर भारत के नागरिक देश की स्वास्थ्य सेवाओं को बदतर बताते हैं, वहीं दूसरी ओर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए ही विदेशों से मरीज लंबी दूरी तय करके यहां आते हैं, इलाज कराते हैं और स्वस्थ होकर अपने देश लौट जाते हैं। हैल्थ टूरिज्म का यह कारोबार नया नहीं, बल्कि काफी पुराना है।

अभी हाल ही में मिस्र निवासी दुनिया की सबसे मोटी 36 वर्षीय महिला ईमान अहमद अब्दुलाती बैरियामीट्रिक सर्जरी के लिए मुम्बई आई। अपने मोटापे से बेहद परेशान ईमान पिछले 25 सालों से घर से नहीं निकल सकी थीं। डायबिटीज, किडनी डिस्‍ऑर्डर, हाइपरटेंशन, थाइरॉयड, वाटर रिटेंशन और फेफड़ों की बीमारी के कारण उनका केस काफी मुश्किलों भरा था। इसके बावजूद मुंबई के बैरियाट्रिक सर्जन मुफजल लकड़ावाला ने उनका सफल ऑपरेशन किया।

दक्षिण एशियाई देशों, खाड़ी देशों के लोग तो काफी संख्या में उपचार कराने भारत आते ही हैं, अमरीका, ब्रिटेन और अन्य यूरोपीय देशों की तुलना में इलाज के लिए भारत आने वाले लोगों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। इसी वजह से हमारा देश भारत चिकित्सा पर्यटन के क्षेत्र में दुनिया के 5 शीर्ष देशों में शामिल है। मिले आंकड़ों के मुताबिक दक्षिण भारतीय राज्यों में अधिकांश मरीज ओमान, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, नाइजीरिया, केन्या और मालदीव से आते हैं। हर साल यह संख्या 25 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है।

वर्ष 2014 में करीब 2 लाख 70 हजार विदेशी इलाज कराने के लिए भारत आए थे जो इससे पिछले वर्ष की तुलना में 17 प्रतिशत अधिक थे। विदेशी स्वास्थ्य पर्यटकों के भारत आने के अनेक कारण हैं। पहला और सबसे बड़ा कारण दूसरे देशों की तुलना में भारत में इलाज काफी सस्ता होना है। विकसित देशों के मुकाबले भारत में एंजियोप्लास्टी, हेपेटाइटिस- सी, दांतों का इलाज, लेसिक जैसी चिकित्सीय सुविधाएं अन्य देशों के मुकाबले काफी सस्ती हैं।

सीआईआई, ग्रांट थॉर्नटन व्हाइट पेपर के अनुसार दुनिया के 80 प्रतिशत स्वास्थ्य पर्यटकों को आकर्षित करने का कारण लागत होती है। लागत और मान्यता प्राप्त सुविधाओं ने कुछ खास मेडिकल टूरिज्म क्षेत्रों को स्थापित किया है, जैसे सिगापुर, थाईलैंड, भारत, मलेशिया, ताईवान, मैक्सिको और कोस्टारीका। इन सभी देशों में थाईलैंड के बाद भारत के पास दूसरी सबसे ज्यादा संख्या में मान्यता प्राप्त सुविधाएं हासिल हैं। ग्रांट थॉर्नटन के भारत के नेशनल मैनेजिंग पार्टनर विशेष सी चंडोक कहते हैं कि इसी वजह से उम्मीद की जा रही है कि वर्ष 2020 में इंडियन मेडिकल टूरिज्म बाजार अपने आज के 300 करोड़ के आकार से करीब दोगुना यानी 700- 800 करोड़ का हो जाएगा। 

भारत आयुर्वेद, योग, सिद्ध, प्राकृतिक चिकित्सा आदि के एक केन्द्र के रूप में पहले से ही स्थापित है, जो अब आधुनिक चिकित्सा के क्षेत्र में भी प्रगति कर रहा है। नई-नई आधुनिक तकनीकों से युक्त अस्पतालों की नित नई श्रृंखलाएं यहां खुल रही हैं। चिकित्सा क्षेत्र में नई-नई अत्याधुनिक प्रणालियों और मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। दवाइयों के क्षेत्र में भी भारत ने प्रतिष्ठा हासिल की है।

 

 इसके अलावा दुनिया में भारतीयों और भारतीय मूल के डॉक्टरों ने अपनी विश्वसनीयता कायम की है। स्वास्थ्य पर्यटन बढऩे की एक बड़ी वजह यहां अस्पतालों में ऑपरेशन की तारीख का जल्दी मिलना या कम वेटिंग टाइम है, जबकि विदेशों में ऑपरेशन के लिए मरीजों को काफी इंतजार करना पड़ता है। इनके अलावा एक नकारात्मक पहलू भी है।

 जहां विकसित देशों में मानव अंग आसानी से नहीं मिलते, जबकि भारत में गरीबी और पैसों के लालच के चलते लोग अपने अंग आसानी से बेच देते हैं, जो विदेशियों के लिए काफी सस्ता उपाय साबित होता है। सच है कि हमारा भारत इलाज में कम लागत, अच्छे और कुशल चिकित्सकों और अच्छी सुविधाओं से युक्त मान्यता प्राप्त अस्पतालों की वजह से चिकित्सा पर्यटन का केन्द्र बन चुका है। लेकिन दरकार है कि सिर्फ विदेशी पर्यटकों या उच्च श्रेणी को ही नहीं, बल्कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को भी बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मिलें। चिकित्सा पर्यटन से हो रहे फायदे का लाभ आम भारतीय को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने में किया जाए, तो इससे बेहतर कुछ नहीं हो सकता।

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