GREHLAKSHMI

FREE - On Google Play
OPEN

गणेश जी क्यों कहलाए एकदंत धारी, जानिए इसके पीछे की पौराणिक मान्यताएं

Sunil Juyal

2nd September 2019

देवो के देव भगवान गणेश भक्तजनो के बीच गणपती, दामोदर, विनायक जैसे कई सारे नामों से जाने जाते हैं... इन्ही उपनामों में से एक है एकदंतधारी। जी हां, भगवान गणेश की प्रतिमा या छवि में आपने देखा होगा कि गणेश जी का एक दांत टूटा हुआ है,

गणेश जी क्यों कहलाए एकदंत धारी, जानिए इसके पीछे की पौराणिक मान्यताएं

देवो के देव भगवान गणेश भक्तजनो के बीच गणपती, दामोदर, विनायक जैसे कई सारे नामों से जाने जाते हैं... इन्ही उपनामों में से एक है एकदंतधारी। जी हां, भगवान गणेश की प्रतिमा या छवि में आपने देखा होगा कि गणेश जी का एक दांत टूटा हुआ है, जिसके चलते वो एकदंतधारी कहलाते हैं। वैसे गणेश जी के इस दांत टूटने के पीछे भी कई तरह की पौराणिक मान्यताएं प्रचलित हैं और आज हम आपको ऐसी ही कुछ प्रचलित मान्यताओं से परिचित कराने जा रहे हैं। तो चलिए जानते हैं कि उन प्रसंगो के बारे में जिनके चलते भगवान गणेश एकंदतधारी कहलाएं।

 

महाभारत को रचना के दौरान

दरअसल, भगवान गणेश के दांत टूटने के बारे में सबसे प्रचलित मान्यता के अनुसार ऐसा महाभारत को रचना के दौरान हुआ था। असल में, मान्यता है कि जब वेदव्यास जी महाभारत की रचना कर रहे थे, तो उसके लेखन के लिए उन्हें किसी कुशल लेखक की आवश्यकता थी और देवताओं में सबसे विद्वान और अग्रणी गणेश जी माने जाते थें। ऐसे में उन्हें गणेश जी से इस शर्त के साथ लेखन के लिए आग्रह किया कि जब वेदव्यास महाभारत का कथावाचन करेंगे तो वो बीच में नहीं रूकेंगे और गणेश जी को वेदव्यास के बोलने के रफ्तार के अनुसार ही लिखना जारी रखना होगा।

 

गणेश जी ने वेदव्यास जी की ये शर्त मान ली और महभारत का लेखन कार्य शुरू हुआ, वेदव्यास ने पूरी रफ्तार से कथा वाचन शुरू किया, ऐसे में तेजी से लिखते हुए गणेश जी का कलम बीच में ही टूट गया। पर चूंकि शर्त लग चुकी थी, कि गणेश जी को लेखन का कार्य बीच मेों नहीं रोकना है, इसलिए उन्होने अपना एक दांत तोड़ उसे कलम बनाकर लिखना शुरू कर दिया।ऐसे में जब वेदव्यास ने ये देखा तो वो गणेश जी के प्रति कृतज्ञ हो गए और तभी से गणेश जी एकदंतधारी बन गए।

 

 परशुराम से युद्ध के दौरान 

वहीं एक दूसरी मान्यता के अनुसारपरशुराम से युद्ध के दौरान गणेश जी का दांत टूटा था। असल में, प्रसंग कुछ ये है किएक बार परशुराम जी, भगवान शिव से मिलने के लिए कैलाश पर्वत पहुंचे थें, पर वहां द्वार गणेश जी पहरा दे रहे थें और उन्होनेपरशुराम को अंदर जाने से रोक दिया। ऐसे में पहले तोपरशुराम ने गणेश जी से विनती की वो उन्हें अंदर जाने दें, पर जब गणेश जी ने नहीं सुना तो वो परशुराम ने गणेश जी को युद्ध े लिए चुनौती दे डाली। जिसे गणेश जी ने स्वीकार कर लिया और फिर दोनो में भीषण हुआ और इसी युद्ध के दौरान परशुराम जीके फरसे के वार से गणेश जी काएक दांत टूट गया और वो हमेशा के लिए एकदंत धारी बन गए।ये भी पढ़ें -

क्या आप जानते हैं, आखिर क्यों की जाती है सर्वप्रथम गणेश जी की पूजा

क्यों मनाया जाता है गणेश चतुर्थी का पर्व

गणेश जी को क्यों प्रिय हैं मोदक, जानिए इसके पीछे की पौराणिक मान्यता

आप हमें फेसबुकट्विटरगूगल प्लस और यू ट्यूब चैनल पर भी फॉलो कर सकती हैं।

 

कमेंट करें

blog comments powered by Disqus

संबंधित आलेख

default

गणेश जी को क्यों प्रिय हैं मोदक, जानिए इसके...

default

इस राशि की महिलाएं होती हैं सबसे बुद्धिमान...

default

रिलेशनशिप में होने वाले लड़ाई-झगड़ों के भी...

default

जानिए भगवान गणेश के 108 नाम और उनके अर्थ...