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जब प्रेगनेंसी के दौरान डॉक्टर दे दे बेडरेस्ट की सलाह

गृहलक्ष्मी टीम

14th September 2019

डिलीवरी के बाद होने वाली जटिलताएं-

जब प्रेगनेंसी के दौरान डॉक्टर दे दे बेडरेस्ट की सलाह

अगर आपको बैडरेस्ट की सलाह दी गई है

बिस्तर पर मैगजीन के ढेर व टी.वी. का रिमोट हाथ में थामे लेटने की कल्पना कितनी अच्छी लगती है, लेकिन ऐसा तब तक ही होता है जबकि यह बेडरेस्ट निर्देश के रूप में न हो।बिस्तर पर पड़ते ही आपको पता चल जाता है कि यह कोई मजाक नहीं है। आप सरपट भाग कर कोई काम नहीं कर सकतीं और सारा दिन आपके बिस्तर के पास मन बहलाने के लिए भी कोई नहीं होता। ऐसे में आप यह भी भूल जाती हैं कि स्वस्थ गर्भावस्था व शिशु के लिए ही डॉक्टर ने आपको यह सलाह दी है।

अधिकतर डॉक्टरों का यही मानना है कि बैडरेस्ट लेने से कई जटिल गर्भावस्था की दिक्कतें भी घट जाती हैं। इस तरह सर्विक्स पर ज्यादा दबाव नहीं पड़ता, हृदय पर दबाव पड़ने से किडनी के लिए रक्त प्रवाह बढ़ता है, जिससे फालतू तरल पदार्थ निकलने में आसानी रहती है, शिशु को पर्याप्त ऑक्सीजन व पोषक मिलता है, आपके रक्तप्रवाह में तनाव के हार्मोन घटते हैं, जिनकी वजह से संकुचन हो सकता है।

जो मॉए, 35 से ऊपर की हों, मिस कैरिज की हिस्ट्री रही हो, मल्टीपल प्रेगनेंसी हो प्रेगनेंसी में जटिलता हो या फिर कोई पुराना रोग हो, उन सबको बैडरेस्ट लेने की सलाह दी जाती है।

इससे प्रीटर्म लेबर की संभावना घटने के साथ-साथ बाकी खतरे भी घट जाते हैं। इसके अपने नुकसान भी हैं। लंबे समय तक बेडरेस्ट लेनेवाली महिलाओं को नितंबों व मांसपेशियों का दर्द सहना पड़ता है। त्वचा में जलन, सिर-दर्द या अवसाद भी हो सकता है। हिलने-डुलने की कमी की वजह से छाती में जलन, कब्ज, टांगों में सूजन या पीठ में दर्द की शिकायत हो सकती है। भूख भी खुलकर नहीं लगती जो कि शिशु की सेहत के लिए ठीक नहीं है।

आप इन टिप्स की मदद से अपनी काफी परेशानियाँ घटा सकते हैं।

  •   बिस्तर पर थोड़ा हिलें-डुलें। करवट लेकर लेटें। अपने शरीर का सही संतुलन बनाए रखने के लिए तकिए लगा लें। हर थोड़ी देर बाद करवट बदलें।
  •   डॉक्टर से पूछकर बाजू हिलाने के व्यायाम करें। बैठे-बैठे शरीर के जिन अंगों को हिला सकें उन्हें हिलाएँ।
  •   डॉक्टर से पूछें कि क्या आप स्ट्रैचिंग व्यायाम कर सकती हैं। बिस्तर पर लेटे-बैठे टांगों को धीरे से अकड़ाएँ व पांवों को घुमाएँ ताकि टांगों में खून न जमे व मांसपेशियों की मजबूत बनी रहे।
  •   ध्यान दें कि आप क्या व कितना खा रही हैं।यदि आप पोषक आहार लेने की बजाए स्नैक्स से काम चला रही हैं तो शिशु के वजन पर इसका असर हो सकता है। इनके अलावा जरूरत से ज्यादा वजन भी परेशानी की वजह हो सकता है इसलिए हमेशा कुछ न कुछ खाने की आदत न पालें।
  • आपको तरल पदार्थों की भरपूर मात्रा लेनी है ताकि अपच, कब्ज व छाती में जलन जैसी परेशानियों से बच सकें। आपके बिस्तर के पास पानी व पेय पदार्थों की भरपूर मात्रा होनी चाहिए।
  •   ज्यादा लेटने से छाती में ज्यादा जलन हो सकती है। यदि हो सके कुछ खाते समय थोड़ा बैठ जाएँ।

डिलीवरी के बाद संभलने में थोड़ा वक्त लगेगा इसलिए ज्यादा उम्मीदें न पालें। आपकी मांसपशियों की खोई मजबूती धीरे-धीरे ही वापिस आएगी। अपने-आप को संभलने का मौका दें। चहलकदमी, प्रसव के बाद योग व तैराकी से मदद मिल सकती है। आपके पास फोन पड़ा रहे ताकि अन्य दोस्तों व रिश्तेदारों से बातचीत करके मन बहला सकें। अगर लैपटॉप रख लेंगी तो ई-मेल की भी सुविधा हो जाएगी। इस तरह बिस्तर पर बैठे-बैठे आपका संपर्क सबसे रहेगा।

  • सुबह पति के जाने से पहले ही सारा सामान बिस्तर के पास रखवा लें। आपके छोटे फ्रिज में पानी, फल, दही, चीज़ व सैंडविच हमेशा पड़े रहें। फोन, मैगजीन, किताबें व टी.वी. का रिमोट भी पास होना चाहिए।
  • पूरे दिन की रुटीन बना लें ताकि आपको बोरियत महसूस न हो और आप बेहतर महसूस कर सकें।
  • अगर आपको घर में रहकर ही थोड़ा-बहुत काम करने की इजाजत मिली हुई है तो अपने बॉस को अपनी हदें बता दें ताकि आप पर काम का जरूरत से ज्यादा बोझ न पड़े।
  • यदि आप चाहें तो बड़े मजे से शिशु के लिए ऑनलाइन खरीदारी कर सकती हैं। उसके कपड़े, पालना, पलंग व बेबी सिटर का इंतजाम भी तो आपको ही करना है।

बैडरेस्ट के प्रकार

जब डॉक्टर आपकी गतिविधियां सीमित करना चाहें तो इसे बैडरेस्ट कहते हैं वे आपको बताते हैं कि आप क्या कर सकती हैं और क्या नहीं कर सकतीं। आइए आपको इनके बारे में बताएँ।

शेड्रयूल रेस्टिंग :- कुछ मांओं को प्रतिदिन विभिन्न समय तक आराम करने की सलाह दी जाती है ताकि आगे आने वाले खतरे को टॉला जा सके। कई डॉक्टर कामकाज घटाने;सीढ़ियाँ न चढ़ने-उतरने या लंबे समय तक खड़े न रहने को कहते हैं।

मोडीफाइड बैडरेस्ट :- आपको घर का कामकाज, गाड़ी चलाना या ऑफिस जाना मना होता है। आप थोड़ा बहुत हल्का काम कर सकती हैं। बिस्तर से सोफे तक जा सकती हैं या अपने लिए सैंडविच बना सकती हैं लेकिन आपको सीढ़ियाँ चढ़ने-उतरने की इजाजत नहीं मिलेगी।

स्ट्रिक्ट बैडरेस्ट :- आपको सख्ती से आराम करने की सलाह दी गई है यानी नहाने-धोने के अलावा आप बिस्तर पर रहेंगी। आपको अपना सारा जरूरी सामान बिस्तर के आसपास हाथ की पहुंच में रखना होगा ताकि किसी की मदद न मिलने पर आपको बार-बार उठना न पड़े।

  • ऑनलाइन डिनर ऑर्डर करें ताकि शाम को पति के घर लौटने पर उन्हें सरप्राइजदिया जा सके।
  •   मेल सर्विस से डी.वीडी. मंगाएं। वे सब फिल्में देखें, जिन्हें आप समय की कमी की वजह से आज तक नहीं देख सकी थीं। इसके बाद तो आपको ऐसा समय व मौका नहीं मिलेगा।
  •   मौज-मस्ती क्यों न हो जाए। दोस्तों को बुलाकर पिज्ज़ा पार्टी करें। सफाई भी उन्हें ही करनी पड़ेगी।
  •   अपने नन्हे-मुन्ने के लिए कुछ स्वेटर व मोजे बुनें। टाइम भी पास होगा और आपको खुशी भी मिलेगी।
  •   सारे फोटो एलबम में व्यवस्थित करें अपनी फोन बुक को कंप्यूटर में डालें। शिशु के बधाई थैंक्स नोट वगैरह, सारे काम कंप्यूटर से करें।
  •   अपने मन को पूरी खुशी दें। बाल संवारें,मेकअप करें। ब्यूटी-पार्लर से किसी को घर बुलवाकर ब्यूटी केयर करवाएँ। यह न सोचें कि मुझे कौन देखने वाला है। आप अच्छी दिखेंगी तो आपके मन को भी खुशी मिलेगी।
  •   अपने बिस्तर की चादर बदलें व आसपास की हर चीज को साफ व व्यवस्थित रखने को कहें।
  •   अपने विचारों व सोच को डायरी में लिखें।ये डायरी मन को शांत करेगी व आपका टाइम भी पास होगा।
  •   जब भी मन उदास हो तो शिशु के अल्ट्रासाउंड की तस्वीरें देखें और अपने-आप को याद दिलाएँ कि उसे इस दुनिया में लाने के लिए ही आप आराम कर रही हैं।

 

अस्पताल में बैडरेस्ट :- यदि आपको लगातार रेस्ट के साथ आई.वी. की भी जरूरत है तो आपको अस्पताल में आराम करना होगा। आपके पाँव सिर से थोड़े ऊंचे कर दिए जाएंगे ताकि शिशु थोड़े समय तक कोख में टिके व अपना विकास पूरा लें। 

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