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दूसरी बार कर रही हैं प्रेगनेंसी प्लान तो पहले क्रॉनिक रोगों पर पाएं काबू क्रॉनिक रोगों पर काबू पाएं

गृहलक्ष्मी टीम

19th September 2019

दूसरे बेबी के लिए फिर से प्रेगनेंसी प्लान कर रही हैं तो पहले खुद की जांच जरूर कराएं

दूसरी बार कर रही हैं प्रेगनेंसी प्लान तो पहले क्रॉनिक रोगों पर पाएं काबू क्रॉनिक रोगों पर काबू पाएं

यदि आप दमा, मधुमेह, मिरगी, हृदय रोग आदि किसी भी लंबे रोग से ग्रस्त हैं तो गर्भधारण से पहले, डॉक्टर से पूछ कर अपने इन रोगों पर नियंत्रण पाएँ व अपना पूरा ध्यान रखने की कोशिश करें। यदि एलर्जी की कोई दवा लेने की आवश्यकता हो तो उसे भी अभी ले लें।डिप्रेशन भी आपकी राह में रुकावट बन सकता है इसलिए अपनी बड़ी योजना शुरू करने से पहले इस पर काबू पा लें।

जेनेटिक स्क्रीनिंग :- यदि आप या आपके साथी को कोई जेनेटिक डिसमॉर्डर (सिकलतैल, पैलासीमिया, हीमोफीलिया, सिस्टिमफाइब्रोसिस, प्रस्कचुलर डिस्ट्रोफी या एक्स सिंड्रोम आदि) है या डाऊन सिंड्रोम जैसी कोई दूसरी जन्मजात विकृति है, आप दोनों के वंश में पहले ऐसा कोई रोग हुआ है तो जैनेटिक विशेषज्ञ से मिलें। यदि आप कॉकेशियन हैं तो सिस्टिकफाइब्रोसिस, यहूदी-यूरोपिलन हैं तो टे-शेक,यदि फ्रेंच-कैनेडियन या आइरिश-अमरीकरन है तो सिकल-सैल, यदि ग्रीक-इटैलियन या दक्षिण पूर्वी एटिचाई या फिलीपीन मूल से हैं तो थैलासीमिया की जांच कराएँ। यदि पिछली गर्भावस्था में भी ऐसी कोई जेनेटिक परेशानी हो चुकी है तो राय अवश्य लें।

बर्थ कंट्रोल का उपाय :- यदि किसी जन्म नियंत्रण उपाय से आने वाली गर्भावस्था प्रभावित होती हो तो उसे बदल दें। यदि गर्भ निरोधक गोलियाँ लेती हैं तो योजना बनाने से काफी समय पहले से इन्हें छोड़ दें। कोशिश करें कि गर्भधारण से पहले दो मासिक धर्म नियमित रूप से आ जाएँ। यदि मासिक धर्म नियमित होने में समय लगे तो हिम्मत न हारें यदि आईयू डी इस्तेमाल करती हैं तो इसे निकलवा दें।किसी भी तरह की गर्भनिरोधक दवा का प्रयोग बंद कर दें। यदि चाहें तो रचर्मीसाइड रहित कंडोम इस्तेमाल कर सकती हैं।

आहार में सुधार :- सबसे पहली और खासबात यह है कि भोजन में फॉलिक एसिड की मात्रा बढ़ाएँ। अध्ययनों से पता चला है कि गर्भधारण से पहले व गर्भावस्था के प्रारंम्भिक चरण में इस की पर्याप्त मात्रा लेने से न्यूटल ट्यूब दोष काफी घट जाते हैं। यह साबुत अनाज व हरी पत्तेदार सब्जियों में भरपूर मात्रा में पाया जाता है। इसके साथ-साथ इसकी दवा भी ली जा सकती है।

जंक, फूड और रिफांइड शुगर की मात्रा घटा दें। साबुत अनाज, फल, सब्जियाँ व कम वसायुक्त डेयरी पदार्थ लें। सैचुरेटिड वसा की मात्रा घटा दें, इसके कारण गर्भावस्था में जी मिचलाने व उल्टी की समस्या बढ़ सकती है।गर्भधारण से पहले प्रतिदिन दो प्रोटीन तथा तीन कैल्शियम सर्विंग अवश्य लें। यदि आपकी खाने-पीने की आदतें स्वस्थ नहीं हैं या फिर किसी दूसरे तरह के ईटिंग डिस आर्डर से ग्रस्त हैं तो अपने डॉक्टर की राय से विशेष आहार लें।

आदर्श वजन :- जरूरत से ज्यादा या कम वजन गर्भधारण में समस्या बन सकता है। यदि जरूरत महसूस हो तो कैलोरी की मात्रा घटाएँ।वजन घटाते समय धीरे-धीरे वजन घटाएँ चाहे गर्भधारण प्रक्रिया को दो महीने आगे ले जाना पड़े। कुपोषण के कारण भी गर्भ धारण करना मुश्किल हो जाता है। यदि आप क्रैश डाइट पर थीं तो सामान्य रूप से खाते हुए शरीर को अपने आकार में आने दें, फिर गर्भ धारण करें।

विटामिन  मिनरल एप्लीमेंट लें :- आहार में बदलाव के साथ-साथ विटामिन व मिनरल युक्त एप्लीमेंट भी अवश्य लें। अध्ययनों से पता चला है कि गर्भधारण से पहले ही विटामिन व मिनरल का एप्लीमेंट लेने वाली महिलाओं में उल्टी, जी मिचलाना या मार्निंग सिकनेस जैसी शिकायतें कम पाई गईं। जिंक लेने से भी फायदा होता है। इसके अलावा दूसरे पोषक सप्लीमेंट न लें क्योंकि इनकी अधिक मात्रा भी घातक हो सकती है।

शेप बनाएँ परआराम से :- यदि कसरत को दिनचर्या में शामिल करेंगी तो शरीर स्वस्थ रहेगा व आने वाले समय के लिए स्वयं को तैयार भी कर पाएगा। फालतू वजन भी घट जाएगा लेकिन ज्यादा मेहनत वाली कसरत न करें। कई बार शरीर का तापमान अधिक होने पर भी गर्भधारण में कठिनाई होती है अति तो किसी भी चीज की बुरी होती है इसलिए व्यायाम करें पर, आराम से!

ड्रग्स से बचें :- कोकेन, क्रेक, मरिजुआना,हेरोइन आदि ड्रग्स गर्भावस्था में खतरनाक हो सकते हैं। गर्भ धारण करने में मुश्किल होती है यदि गर्भावस्था शुरू हो भी जाए तो भी भ्रूण को नुकसान पहुँचता है। मिसकैरिज, समय से पहले शिशु के जन्म वगैरह का खतरा बना रहता है। चाहे आप कभी-कभी ही क्यों न लेती हों, इन्हें लेना बंद करें। यदि मुश्किल लगे तो व्यावसायिक मदद लें।

फालतू दवाओं से बचें :- गर्भधारण की योजना बनाने के बाद कोई भी दवा अपने डॉक्टर से पूछे बिना न खाएँ। योनि में किसी भी तरह की रखने वाली दवा भी डॉक्टर से पूछकर ही इस्तेमाल करें।

दवाओं को जाँचें :- आप अपनी किसी बीमारी के लिए जो दवा सालों से खाती आ रही हैं। पता करें कि कहीं गर्भावस्था में वह घातक तो नहीं होगी। कम से कम छः महीने पहले ऐसी किसी भी दवा का सेवन बंद कर दें। शिशु होने के बाद भी ध्यान रखें क्योंकि स्तनपान कराने से भी दवा का असर उस तक पहुँच सकता है। कई बार खुराक घटाने से बात बन जाती है। कुछ दवाएँ तो काफी खतरनाक साबित हो सकती हैं इसलिए समय-समय पर डॉक्टर की राय लेती रहें।

हर्बल या वैकल्पिक दवाएँ :- यह जरूरी नहीं कि सभी हर्बल दवाएँ सुरक्षित ही होंगीं।कुछ दवाएँ गर्भधारण में रुकावट पैदा कर सकती हैं। ऐसी कोई भी हर्बल या वैकल्पिक किसी भी रूप में हानिकारक हो सकती है इसलिए अपेक्षित सावधानी रखें।

कैफीन की मात्रा घटाएँ :- चाय, कॉफी आदि की मात्रा अभी से घटानी शुरू कर दें ताकि आगे चल कर दिक्कत न हो। कुछ अध्ययनों से पता चला है कि कॉफी की अधिक मात्रा भी आपको नुकसान पहुँचा सकती है यानी गर्भधारण करने में परेशानी हो सकती है। वैसे भी इसकी अधिक मात्रा कई अन्य तरीकों से भी शरीर को हानि पहुँचाती है।

मदिरा का सेवन  करें :- गर्भ धारण की योजना बनाने के बाद प्रतिदिन मदिरा का सेवन करना नुकसानदायक होगा। मासिक धर्म का चक्र भी गड़बड़ा सकता है इसलिए इसका सेवन बिल्कुल न करें।

धूम्रपान  करें :- तंबाकू से शिशु को भी कैंसर का खतरा हो सकता है, आपको गर्भधारण करने में परेशानी हो सकती है। अपने शिशु को धुँआ रहित पर्यावरण दें।

रेडिएशन के अधिक सम्पर्क में  आएँ :- यदि एक्स-रे कराना जरूरी हो तो प्रजनन अंग ढककर ही करवाएँ। याद रखें कि गर्भधारण की योजना बनाने के बाद आप कभी भी गर्भवती हो सकती हैं इसलिए पहले से ही सावधानी बरतें। अपने डॉक्टर को इस बारे में सूचना दे दें ताकि वे भी इस ओर से सावधानी रखें। गर्भधारण के बाद रेडीऐशन तभी करवाएँ,जब बहुत ज्यादा जरूरी हो।

खतरनाक रसायनों से बचें :- कुछ रसायनगर्भधारण व भ्रूण के विकास में रुकावट बन सकते हैं। आप काम के दौरान इस बात का खास ध्यान रखें। मेडीसन, आर्ट, फोटोग्राफी फ्रेमिंग व लैंडस्केपिंग; हेथर ड्रैसिंग व कॉस्मेटोलॉजी, ड्राईक्लीनिंग व कारखाने आदि में विशेष रूप से सावधानी रखें। यदि हो सकते तो कुछ समय के लिए ऐसे स्थान से हट जाएँ। अपना तबादला करवा लें। कई बार लेड की अधिक मात्रा भी नुकसान करती है। यह आपके काम के अलावा घर या पानी में भी हो सकती है घरेलू जहरीले पदार्थों के भी निकट संपर्क में न आएँ। यदि आपके रक्त का स्तर अधिक है तो विशेषज्ञ की राय ले कर उसकी चिकित्सा करवाएँ ताकि शरीर में लैड की मात्रा घट सके।

वित्तीय मजबूती :- शिशु के आने से पहले ही अपना वित्तीय बजट भी बना लें क्योंकि आने वाले समय में आपको काफी धन चाहिए।अपनी हैल्थ इंश्योरेंस करवाएँ ताकि प्रसव का खर्च मिल सके। पता कर लें कि ऑफिस मेमेटरनिटी लीव मिलेगी या नहीं इस तरह आप बाद में कई तरह की परेशानियों से बच जाएँगी।

ध्यान देना शुरू करें :- एक बार सारी अपेक्षित सावधानी रखने के बाद अपनी योजना पर ध्यान देना शुरू करें। यदि आप चक्र के सबसे फर्टाहल पीरियड में शारीरिक संबंध बनाती हैं तो जल्दी से जल्दी गर्भ धारण की संभावना बढ़ जाती है। किसी डायरी में प्रत्येक मासिक चक्र का पहला दिन नोट करें। यह भी पता लगाएँ कि आप औव्यूलेट कब हुई थीं।अक्सर चक्र के बीच में ओव्यूलेशन होता है।लेकिन अनियमित चक्र वाली महिलाओं के लिए मासिक धर्म से पहले दसवें तथा बाद में सत्रहवें दिन में गर्भधारण की संभावना बढ़ जाती है। कुछ महिलाओं को ओव्यूलेशन का साफ रूप से पता चलता है तो कई इसे नहीं पहचान पातीं। इस दौरान आपकी योनि का स्राव, अंडे की सफेदी की तरह तथा लिसलिसा होता है जिसे खींचा जा सकता है। साथ ही पेट के निचले हिस्से या पीठ के एक ओर हल्का दर्द भी महसूस होता है। यदि नोट करें तो बैसलतापमान में अंतर से भी पता लगा सकती हैं इसके लिए आपको वी.वी.टी. थर्मामीटर लेना होगा। सुबह बिस्तर से उठने से पहले अपना तापमान जाँच लें। आव्यूलेशन चक्र शुरू होने से पहले यह तापमान न्यूनतम होता है और फिर तेजी से बढ़ता है यदि आप यह सब पता नहीं लगा पा रहीं, आपके चक्र अनियमित हैं या आप कोई आसान तरीका पाना चाहती हैं तो इसके लिए बाजार में होम ओव्यूलेशन प्रीडिक्टरकिट भी मिलती है। इसकी मदद से आप अपनी योजना को सफल बना सकती हैं। इस तरह डिलीवरी की सही तारीख जानने में भी आसानी होगी।

आराम करें:- जी हाँ, यह शायद सबसे अहम बात है। तनाव से तो बात और बिगड़ती ही है।रिलैक्सेशन तकनीक सीखें, ध्यान लगाएँ व तनाव से बचें।

पूरा समय दें :- किसी भी स्वस्थ गर्भावस्था को आरंभ होने में सामान्यतः 6 महीने लग सकते हैं। यदि जल्दी से बात न बने तो तनावग्रस्त न हों, डॉक्टर के पास जाने से पहले अपने-आपको पूरा समय दें। यदि आप 35 वर्ष से ऊपर की हैं तो कम से कम 6 महीने कोशिश करने के बाद ही डॉक्टर की राय लेने जाएँ।

 

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