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कब है सर्व पितृ मोक्ष अमावस्या , जानें इसका महत्त्व

संविदा मिश्रा

26th September 2019

शास्त्रों के अनुसार पितृपक्ष का आरंभ भाद्रपद पूर्णिमा से होता है और पितृ पक्ष का समापन पितृ मोक्ष अमावस्या से हो जाता है। पूर्वजों को समर्पित 16 दिनों का समय ऐसा माना जाता है जिसमें हमारे पितर या पूर्वज धरती पर आते हैं और इसीलिए पूर्वजों को तर्पण किया जाता है। कहा जाता है कि पूर्वजों को जल इसी तर्पण के माध्यम से दिया जाता है।

कब है सर्व पितृ मोक्ष अमावस्या , जानें इसका महत्त्व
ऐसा माना जाता है कि हमारे दिवंगत पूर्वज जिस तिथि के दिन इस दुनिया से विदा होते हैं उसी तिथि को उनका श्राद्ध किया जाता है अर्थात उनके नाम से हवन एवं दान पुण्य आदि किया जाता है। लेकिन यदि आप अपने किसी प्रिय पितर या पूर्वज की तिथि भूल गए हैं तो ऐसी मान्यता है कि पितृ मोक्ष अमावस्या  के दिन उनके लिए हवन एवं श्राद्ध करवाकर पितृ पक्ष के सारे दिनों के फलों का लाभ उठाया जा सकता है। 

कब है सर्व पितृ मोक्ष अमावस्या

इस बार यह सर्व  पितृ मोक्ष अमावस्या 28 सितंबर यानि कि शनिवार के दिन पड़  रही है। खास बात यह है कि दो दशक के बाद सर्व पितृ मोक्ष अमावस्या  शनिवार को है। इस दिन का श्राद्धकर्म अनंत फलदायक होता है। ऐसा माना जाता है कि जो लोग पितृपक्ष के बाकी  दिनों में तर्पण नहीं कर पाते हैं , वो यदि अमावस्या वाले दिन तर्पण करते हैं या फिर पंडित को भोजन कराते हैं तो पूरे 16 दिनों का फल उन्हें मिल जाता है।समस्त पितरों का इस अमावस्या को श्राद्ध किए जाने को लेकर ही इस तिथि को सर्वपितृ अमावस्या कहा जाता है।

सर्व पितृ अमावस्या का महत्त्व 

यह तिथि इतनी मत्त्वपूर्ण इसलिए है क्योंकि   इस दिन सभी पितरों का श्राद्ध किया जा सकता है।  हालांकि प्रत्येक मास की अमावस्या तिथि को पिंडदान किया जा सकता है लेकिन आश्विन अमावस्या विशेष रूप से शुभ फलदायी मानी जाती है। सर्व पितृ अमावस्या होने के कारण इसे पितृ विसर्जनी अमावस्या भी कहा जाता है। मान्यता यह भी है कि इस अमावस्या को पितर  अपने प्रियजनों के द्वार पर श्राद्धादि की इच्छा लेकर आते हैं। यदि उन्हें पिंडदान न मिले तो शाप देकर चले जाते हैं जिसके फलस्वरूप घरेलू कलह बढ़ जाती है व सुख-समृद्धि में कमी आने लगती है और कार्य भी बिगड़ने लगते हैं। इसलिये श्राद्ध कर्म अवश्य करना चाहिए ।

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