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पूजा में बांधा जाने वाला कलावा सेहत के लिए भी है गुणकारी

संविदा मिश्रा

30th September 2019

अक्सर आपने देखा होगा कि पूजा के दौरान या फिर पूजा के बाद हाथ में कलावा बांधा जाता है। इसे रक्षा सूत्र या मौली भी कहा जाता है और ऐसी मान्यता है कि ये कलावा हमारी सभी बुरी चीज़ों से या बुरी नज़र से रक्षा करता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये कलावा हमारी सेहत के लिए भी बहुत ज्यादा गुणकारी है।

पूजा में बांधा जाने वाला कलावा सेहत के लिए भी है गुणकारी
किसी भी पूजा की शुरुआत या समाप्ति के बाद या फिर किसी भी शुभ काम से पहले पंडित हाथ में कलावा जरूर बांधता है और यही कलावा हमारे लिए एक रक्षासूत्र की तरह काम करता है क्योंकि ये पूजा  के प्रसाद के तौर पर हाथ में बांधा  जाता है। कलावे को हाथ में बांधने का धार्मिक कारण और महत्त्व  तो है ही साथ ही वैज्ञानिक तौर पर भी इसे हाथ में बांधना काफी उत्तम माना जाता है। धार्मिक  मान्यता के अनुसार  इसे हाथ में बांधने से शत्रु पर आपकी विजय होती है। यह कलावा हमारी सेहत के लिए भी बहुत मायने रखता है। आइए आपको बताते हैं इसके गुणों के बारे में -

वात,पित्त और कफ से मुक्ति 

शरीर विज्ञान के हिसाब से शरीर के कई प्रमुख अंगों तक पहुंचने वाली नसें कलाई से होकर जाती हैं। जब कलाई पर मौली या कलावा बांधा जाता है तो इससे इन नसों की क्रिया नियंत्रित होती हैं। इससे वात,पित्त और कफ को काबू किया जाता है। 

रक्तचाप, हृदय रोग में नियंत्रण 

ऐसा भी माना जाता है कि कलावा बांधने से रक्तचाप, हृदय रोग, हार्ट अटैक और लकवा जैसी स्वास्थ्य समस्याओं से काफी हद तक निजात पाया जा सकता है। क्योंकि रक्षासूत्र के धागे को कलाई पर बांधते ही हाथों की नसें निंयत्रित होने लगती हैं। 

मधुमेह पर नियंत्रण 

आमतौर पर देखा गया है कि पुरुषों और अविवाहित लड़कियों के दाएं हाथ में और विवाहित महिलाओं के बाएं हाथ में मौली या कलावा बांधा जाता है। हाथों पर कलावा बांधने से मधुमेह जैसा रोग पर भी  नियत्रंण पाने में सहायता करता है।

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