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तो इसलिए विदाई के समय दुल्हन का चावल फेंकना होता है ज़रूरी

गरिमा अनुराग

3rd October 2019

तो इसलिए विदाई के समय दुल्हन का चावल फेंकना होता है ज़रूरी

हमारे यहां शादियों में कई रस्म-रिवाज़ों को पूरा किया जाता है। अकसर लोग इन रस्मों को करते तो हैं, लेकिन अब उनके बीच कोई ऐसा बड़ा जानकार नहीं होता जो उन्हें ये बता सके कि इस रस्मों की अहमियत क्या है। ऐसा ही एक रस्म है घर भरने का , जिसमें जब अपने माता-पिता के घर से नई दुल्हन पिया के घर जाने के लिए विदा होती है तो घर से निकलते वक्त अंजली में चावल भरकर पीछे की ओर  फेंकती है। 

घर भराई की रस्म
ये रस्म अधिकतर शादियों में बिदाई के समय देखी जाती है। कहते हैं कि ये रस्म एक तरह से बेटी का माता-पिता को आभार व्यक्त करने का तरीका होता है कि इतने सालों तक उन्होंने उसका इतने प्यार से पालन पोषण किया है। इस रस्म के जरिए बेटी माता-पिता के बिना शर्तों वाले प्यार को मान-सम्मान देती है और चावल पीछे फेंक कर माता पिता के घर में धन, धान्य, सुख औऱ समृद्धि के वास की कामना करती है। याद दिला दें, हिन्दू  घर्म में चावल को समृद्धि का प्रतीक माना गया है। 

सभी अहसानों  से ऋण मुक्त
हिन्दू संस्कृति में बेटियों को लक्ष्मी का प्रतीक माना गया है और देवी लक्ष्मी को सुख, संपन्नता और वैभव की देवी। इसलिए जब बेटी मायके से ससुराल के लिए जाती है तो उसके द्वारा मायके की ओर चावल फेंका जाना शुभ माना जाता है और इस बात का सूचक भी माना जाता है कि मायके में हमेशा सुख-समृद्धिऔर संपन्नता बनी रहेगी। इस रस्म के लिए ऐसी मान्यताएं भी हैं कि चावल पीछे की ओर डालकर बेटी माता-पिता द्वारा किए सभी अहसानों  से ऋण मुक्त हो जाती है और वो अपना शादीशुदा जीवन बिना किसी ऋण के शुरू कर सकती है।

तो अब अगली बार जब आप किसी शादी में दुल्हन को अपने पीछे चावल फेंकते हुए देखें तो समझ जाइएगा  कि  शादियों में होने वाले ज्यादातर रस्म जितना दिखते हैं, उससे कहीं गुणा ज्यादा महत्व भी रखते है। 

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