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कोई ऐसा दिन नहीं है, जब मैं पढ़ती नहीं हूं- अर्चना गरोदिया

Garima Anurag

11th November 2019

कोई ऐसा दिन नहीं है, जब मैं पढ़ती नहीं हूं- अर्चना गरोदिया
कोलकाता शहर के मारवाड़ी परिवेश में पली बढ़ी अर्चना गरोदिया के व्यक्तित्व के कई आयाम हैं और वो हमेशा अपने अनुभव और ज्ञान से समाज के उद्धार के लिए काम करती रहती हैं। वो ज्वेलरी ब्रांड टचस्टोन की संस्थापक हैं, परिक्षक और समाज सेविका हैं और लेखिका भी हैं। उन्होंने अभी तक दो किताबें द हिस्ट्री ऑफ इंडिया फॉर चिल्ड्रेन और विमेन हू रुल्ड इंडिया  लिखी है। अर्चना फिक्की के महिला शाखा से जुड़ी रहती हैं और कुछ समय पहले इसी शाखा कि पूर्व प्रेसिडेंट भी थी। हाल ही में आपने इन्हें केबीसी में एक्सपर्ट अडवाइस देते हुए भी देखा होगा।
1. किताबों से आपका जुड़ाव कब शुरू हुआ?
दरअसल किताबों से मेरा जुड़ाव बचपन से ही है। मेरे पापा को पढ़ने का बहुत शौक था और इसलिए मैं हमेशा किताबों, कला और संस्कृति से जुड़े माहौल में रही। मेरी मम्मी भी उस समय के हिसाब से सोच और विचार में बहुत आगे थी और उन्होंने और मेरे परिवार के माहौल से ही मुझे लगता है कि मेरा व्यक्तित्व एेसा बना कि मैं कुछ कर सकूं और नाम कमा सकूं। मैं आराम से कह सकती हूं कि मैंने अपनी लाइफ में हर दिन एक किताब पढ़ी है और किताब मेरी ज़िन्दगी में बहुत अहम किरदार निभाते हैं। 
2. अपने करियर में आपको किस तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ा?
देखिए मुझे लगता है कि एक वुमन, साथ में सारे मेन भी, जो लोग भी मल्टी टास्क करते हैं उनके सामने सारी जिम्मेदारियों को निभाना, फिर चाहे वो घर की हों या फिर ऑफिस की, समय को मैनेज करना ही सबसे बड़ी चुनौती होती है। व्यक्तिगत लेवल पर मुझे नहीं लगता कि मैंने कोई खास संघर्ष किया है और इसकी वजह मेरे पैरेन्ट्स और मेर पति हैं, जिन्होंने मुझे हमेशा सपोर्ट किया है। 
3. आपको काम करते हुए तीस साल हो गए हैं। यंग वुमन जो कुछ करना चाहती हैं, उन्हें आप क्या कहना चाहेंगी?
देखिए, अपनी सोच बड़ी रखना चाहिए और जो भी करना है उसके लिए ये नहीं सोचना है कि इसमें क्या दिक्कतें होगी, क्या किन्तु-परन्तु होगा। जो भी सफल लोगों का जीवनी आप पढ़ेगे, तो आप पाएंगे कि उन्होंने अपने काम के लिए ज्यादा नहीं सोचा था। वो काम करते हैं, और उसके बाद का अगला कदम क्या होगा इस बारे में सोच रहे होते थे। तो जो करना चाहते हैं उसकी तैयारी करें और अच्छा काम करें। 
4. आप और क्या करना चाहती?
हां, मैं बच्चों को हमारे देश के इतिहास और सांस्कृतिक धरोहर के बारे में बताना चाहती हूं। वैसे मैंने अभी तक महिलाओं, खासतौर से जो उद्यमी हैं, के प्रशिक्षण देने की दिशा में बहुत काम किया है और फिक्की लेडीज़ ऑर्गनाइजेशन के माध्यम से कई बड़ी कंपनियों के साथ हमने कई महिलाओं को प्रशिक्षित किया है और उनमें से ज्यादातर महिलाएं आज अपने पैर पर खड़ी हैं। 
5. केबीसी के त्रिगुणी में आप कैसे जुड़ी? 
हां, दरअसल साल 2014 में मेरे पास केबीसी से एक्सपर्ट बनने के लिए फोन आया था तो उन्होंने मुझे बताया कि थ्री वाइज़ मेन का कॉन्सेप्ट है, तो मैंने उनसे कहा कि मैं तो औरत हूं (हंसते हुए), उसके बाद ही उन्होंने शो में एक्सपर्ट्स को त्रिगुणी का नाम दिया ताकि वो महिलाओं को भी शामिल कर सके।
6. पढ़ने के अलावा आपको और क्या पसंद है?
पढ़ने और लिखने के अलावा मुझे घूमना बहुत पसंद है। मैं अभी तक पचास देश घूमने जा चुकी हूं और मुझे ऐतिहासिक महत्ता वाली जगहों को देखना बहुत पसंद है।

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