सजगता ही बचाव है लकवा में

Poonam

16th June 2020

अच्छी देखभाल करने वाले परिवारजन और मित्रगण पुर्नवास की सफलता में सबसे महत्वपूर्ण होते हंै। पक्षाघात से बचा एंव बचाया जा सकता है सजग रहकर।

सजगता ही बचाव है लकवा में

लकवा विश्व स्तर पर मृत्यु एंव विकलांगता का एक प्रमुख कारण है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, 15 अरब लोग प्रति वर्ष लकवे से प्रभावित होते हैं। इनमें से 5 अरब लोगों की मृत्यु हो जाती है एंव 5 अरब लोग स्थायी रूप से विकलांग हो जाते हैं। पिछले कुछ दशकों में भारत में पक्षाघात रोग से प्रभावितों की लगातार वृद्धि हुई है, इसके बावजूद सामान्य जनता में पक्षाघात के लक्षणों की जागरूकता का अभाव हैं।
जनमानस में पक्षाघात के शुरूआती लक्षणों की पहचान एवं खतरे की अनुभूति की कमी, पक्षाघात के मरीजों के अस्पताल विलम्ब से पहुंचने का एक प्रमुख कारण है। डाॅ0 विजय सरदाना उतरी भारत के सबसे सम्मानित न्यूरोलोजिस्ट में से एक है। न्यू मेडिकल काॅलेज कोटा में प्राचार्य के पद पर पदस्थापित हैं।    डाॅ0 पीयूष ओझा न्यूरोलोजी विभाग, मेडीकल काॅलेज कोटा में सीनियर रेजीडेण्ट के पद पर कार्यरत है। दोनों से हुई बातचीत के  अंश पर आधारित -

लकवे को समझें
लकवे को दिमाग का दौरा भी कहते हैं। सामान्यतः मस्तिष्क में पहुँचने वाला रक्त मस्तिष्क की कोशिकाओं को आॅक्सीजन पहुंचाता है। जब भी मस्तिष्क के किसी भी हिस्से को आॅक्सीजन की आपूर्ति अवरूद्ध होती है, उस हिस्से में उपस्थित कोशिकाओं की मृत्यु हो जाती है। जिससे मस्तिष्क के उस हिस्से से सम्बंधित कार्य पर असर पड़ता है। 

लकवे के प्रकार:-
लकवा दो प्रकार से हो सकता है, इस्चेमिक स्ट्रोक - इस प्रकार का लकवा तब होता है जब कोई थक्का मस्तिष्क को रक्त पहुँचाने वाली धमनी को अवरूद्ध  कर देता है। हेमोरेजिक स्ट्रोक - इस प्रकार का लकवा तब होता है जब मस्तिष्क को रक्त पहुँचाने वाली रक्त वाहिकाएं फट जाती है जिससे रक्त का रिसाव मस्तिष्क की कोशिकाओं में हो जाता है।

इस्चेमिक स्ट्रोक
अधिकतर लकवे इस्चेमिक स्ट्रोक होते हैं और सभी तरह के लकवों का 87ः हिस्सा होते हैं। यह रात के समय या ंिफर जल्दी सुबह के समय होते हैं। इस तरह के मरीज़ों में बहुत बार पहले या तो क्षणिक लक्षण या फिर छोटे लकवे मिलते हैं जो कि बाद में होने वाले बड़े लकवे की चेतावनी होते हैं।

हेमोरेजिक स्ट्रोक
हेमोरेजिक स्ट्रोक तब होता है जब मस्तिष्क को रक्त पहुँचाने वाली धमनियां फट जाती हंै और उनसे मस्तिष्क के ऊत्तकों में रक्त का रिसाव होता है। उच्च रक्तचापः स्वाभाविक इंट्रोसेरेब्रल हेमोरेज का सबसे आम कारण। वृद्ध अवस्था में मस्तिष्क की छोटी छोटी धमनियां प्रोटीन के जमा होने से कमज़ोर हो जाती हैं कमज़ोर धमनियां कभी कभी फट जाती हैं जिससे मस्तिष्क में रक्त का रिसाव हो जाता है।

जोखिम कारक
जिनको बदला नहीं जा सकताः
55 वर्ष की उम्र के पश्चात, हर 10 वर्ष की उम्र वृद्धि होने के साथ एक सामान्य मनुष्य को लकवा होने की सम्भवना भी दुगुनी हो जाती है।
स्त्रियों की तुलना में पुरूषों में लकवा होनें की सम्भावना 2 गुना अधिक रहती है।
जिन लोगों को पहले लकवा या फिर छोटा लकवा हुआ हो, उनमे लकवा होने की सम्भावना अधिक रहती है।
अगर आपके परिवार में हदय रोग, लकवा या फिर टी आई ऐ का इतिहास हो, तो आपको लकवा होने की सम्भावना अधिक रहती है।

जिन्हे रोका जा सकता हैः
धूम्रपान यह आपके रक्त में थक्कों को जमने की प्रवृत्ति को बढ़ाता है। जब भी आप धूम्रपान करते है उसमे उपस्थित निकोटीन की वजह से आपकी धमनियां सिकुड़ जाती हैं और आपका रक्त चाप बढ़ जाता है। धूम्रपान छोड़ने पर लकवे की सम्भावना भी कम हो जाती है।
मधुमेह धमनियों में बनने वाले थक्कों की दर को बढ़ा देती है।
मोटापा अत्यधिक शारीरिक वजन भी लकवा होने की सम्भावना को बढ़ाता है। मोटे लोगों में अधिकतर शरीर के निचले हिस्से या फिर पेट पर अधिक वसा जमा होती है।
दिनचर्या में नियमित कसरत की कमी से इन सभी जोखिम कारकों का नियंत्रण असंतुलित हो सकता है, जिससे लकवा होने की सम्भावना में वृद्धि हो सकती हैं।
शराब का अत्यधिक सेवन भी लकवे की सम्भावना को बढ़ाता है। नशीले पदार्थों जैसे कोकेन ओर एम्फेटामिन्स, युवा अवस्था में होने वाले लकवों का प्रमुख कारण होते हैं। शारीरिक सौष्ठव बढ़ाने के लिए प्रयोग में लिए जाने वाले स्टेराॅइड्स भी लकवा होने की प्रवृत्ति को बढ़ाते हैं।
आप अधिकतर जोखिम कारकों को काबू में कर सकतेे हैं।

लक्षण एंव संकेत
शरीर के एक तरफ के आधे हिस्से (चेहरे, बाँह और पैरों) में अचानक कमज़ोरी या सुन्नपन होना।
बोलने में या फिर दूसरों की बातों को समझने में तकलीफ होना, या फिर कुछ भी बोल पाने में असमर्थ होना।
एक या दोनों आँखों से देखने मे असमर्थ होना, खासकर किसी एक तरफ देखने पर ।
अचानक से असहनीय सिरदर्द होना, बिना किसी प्रत्यक्ष कारण के ।
अचानक से चलने में सतुंलन का खोना, चाल किसी शराबी व्यक्ति की तरह प्रतीत होना ।

बचाव
लकवे से बचने का सबसे प्रभावी तरीका यही है कि लकवा करने वाले जोखिम कारकों से बचा जाए। कुछ जोखिम कारक जैसे उम्र, लिंग, जाति, पारिवारिक इतिहास अपरिवर्तनीय होते हैं, परंतु मनुष्य  अपने रहन सहन से संबंधित बहुत से जोखिम कारकों पर नियंत्रण कर सकता है । धूम्रपान न करना या फिर त्याग देना, वजन बनाये रखना, खाने में अधिक फल एवं सब्जियों का सेवन, शराब का सेवन न करना या फिर अगर करते भी हो तो अधिक सेवन न करना एवं शारीरीक रूप से सक्रिय रहना। यह सभी गतिविधियां ब्लड प्रेशर को नियंत्रण में रखती है जो की लकवे का सबसे आम कारण होता हैं। साथ ही ये गतिविधियां मुधमेह को विकसित होने से रोकने में भी मदद करती है।

बचाव में सहायक गतिविधियां
कसरत- शारीरिक गतिविधियाँ लकवा होने की सम्भावना को कम करती है। एक स्वस्थ वयस्क को मध्यम से जोरदार तीव्रता की एरोबिक शारीरिक कसरत कम से कम 30 मिनट प्रतिदिन सप्ताह में 3 से 4 बार अवश्य करनी चाहिए।
फल एवं सब्जियाँ - फल एवं सब्जियों का सेवन, ह्रदय रोग, लकवे एवं मृत्यु की सम्भावना को कम करते हैं। फल एवं सब्जियों का अधिक सेवन असामयिक मृत्यु से बचाव में भी सहायक होता है। फल पौटाशियम (माइक्रोन्यूट्रिंयटं) के एक धनी स्त्रोत होते हैं, जो लकवे की सम्भावना को कम करता है।

रेशे - रेशों से भरपूर आहार का सेवन करने से ह्रदय रोग, लकवा, कोलोन कैंसर एवं मृत्यु की सम्भावना कम होती है। महिलाओं को 25 ग्राम प्रतिदिन और पुरूषों को 38 ग्राम प्रतिदिन रेशे युक्त आहार सेवन करने की सिफारिश की जाती है। सुबह नाश्ते में उपयोग में लिए जाने वाले अनाज, फल एवं सब्जियां आहारी रेशों का एक अति उत्कृष्ट स्त्रोत होते हैं।

वसा- ऐसा भोजन, जिसमें स्वस्थ वसा अधिक मात्रा में हो एवं अस्वस्थ वसा कम मात्रा में हो, का सेवन करने से ह्रदय रोग एवं लकवे की सम्भावना कम हो जाती है।

नमक -खाने में अत्यधिक नमक का उपयोग उच्च रक्तचाप की समस्या उत्पन्न कर सकता है, जो की लकवे का सबसे बडा जोखिम कारक होता है। खाने में कम नमक (सोडियम) करने से ह्रदय रोग एवं लकवे की सम्भावना कम हो रहती है। आप अपने आहार से प्रोसेस्ड खाने को कम कर दें। आप उन सभी खाने की सामग्रियों से बचें जो की डिब्बों, बक्सों, जार अथवा थैलों में बंद आती हैं। बाहर के भोजनालयों में भी अक्सर खाना खाने से बचें। स्वस्थ संतुलित आहार अति आवश्यक एवं लकवे से बचाव में मददगार होता है।

शराब - शराब के सेवन को कम करने से भी उच्च रक्तचाप को कम करने में मदद मिलती है, आम तौर पर जितना अधिक आपका रक्तचाप होता है, उतनी ही आपको लकवा होने की सम्भावना अधिक होती है। महिलाओं में एक ड्रिंक प्रतिदिन और पुरूषों में 2 डिंªक प्रतिदिन से अधिक शराब का सेवन करने से लकवे की सम्भावना बढ़ जाती है। शराब का सेवन कम करने में परिवार का भावनात्मक समर्थन महत्वपूर्ण होता है एवं इसके लिए मनोरोग विशेषज्ञ की मदद भी ली जा सकती है।

धूम्रपान - धूम्रपान का सेवन पूरी तरह से बंद करने से, लकवा होने की सम्भावना को आधे से भी कम किया जा सकता है। निकोटीन और तम्बाकू के धुंए में तकरीबन 4000 तरह के रसायन होते हैं जो हमारे फेफ़डों में जमा हो जाते हैं या रक्त सोख लिए जाते हैं। कुछ रसायन हमारी रक्त धमनियों की अंदरूनी परतों को नुकसान पहुंचाते हैं। जिससे वे संकीर्ण हो जाती है।
धूम्रपान करने वाले लोगों में धूम्रपान न करने वाले लोगों के मुकाबले लकवा होने की सम्भावना 2-3 गुना अधिक रहती है। निष्क्रिय (पैसिव) धूम्रपान भी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक रहता है।

हाइपरटेंशन - रक्तचाप कम करने से भी लकवा होने की संभावना कम रहती है। 55 वर्ष की उम्र के पश्चात आपको अपने रक्तचाप की जांच वर्ष में कम से कम दो बार अवश्य करवानी चाहिए, आदर्श रूप से एक स्वस्थ इंसान में रक्तचाप 120/80 से कम होना चाहिए।

मधुमेह - मधुमेह को नियंत्रण में रखने से लकवा होने की सम्भावना कम हो जाती है। अपनी ब्लड शुगर की नियमित रूप से जांच करवाएं और उसे नियंत्रण में रखें, अपने खान - पान का विशेष रूप से ध्यान रखें और नियमित रूप से कसरत करें।

डिसलिपिडेमिया (कोलेस्ट्रोल एवं वसा) - खान-पान में बढे़ हुए कोलेस्ट्रोल का सेवन करने से यह धीरे-धीरे हमारी धमनियों में जमा हो जाता है और उनमें थक्के जमा हो जाते हैं। धमनियों में धीरे-धीरे एथेरोमा के जमा होने से वे संकीर्ण हो जाती हैं, जिससे लकवा होने की सम्भावना बढ़ जाती है।

लकवा एक आपातकालीन स्थिति
जो मरीज लकवे के लक्षण महसूस कर रहे होते हैं, उन्हें तुरन्त अस्पताल ले जाना चाहिए क्योंकि जितनी जल्दी इलाज चालू होगा, उतनी ही जल्दी ठीक होने की संभावना रहती है। जैसे ही लकवे से पीड़ित मरीज़ आपातकालीन विभाग में आता है, उसकी शारीरिक जाँच की जाती है जिसमें उसके रक्तचाप एवं उसके श्वसन की नियमित माॅनिटरिंग भी होती हैं कुछ जांचों से उसके लकवे का कारण एंव उसकी सीमा पता लगायी जाती है। मरीज के रक्तचाप एव ंउसके शरीर में तरल पदार्थो के संतुलन का विशेष ध्यान रखा जाता है। लकवा मरीज की किसी भी खाद्य पदार्थ को निगलने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है, इसलिए ऐसे मरीज को मुंह से कुछ नहीं देना  चाहिए जब तक आपके चिकित्सक ने आपको नहीं कहा हो। लकवा मरीज की मूत्र त्यागने की स्वाभाविक क्षमता को भी प्रभावित कर सकता है। ऐसे में मरीज को कैथेटर लगाया जा सकता  हैं।
लकवा मरीज का पुर्नवास मस्तिष्क में होने वाली क्षति की मात्रा, पुर्नवास करने वाली टीम की दक्षता एंव परिवारजनों और मित्रों के सहयोग पर निर्भर करता है। अच्छी देखभाल करने वाले परिवारजन और मित्रगण पुर्नवास की सफलता में सबसे महत्वपूर्ण होते हंै। पक्षाघात से बचा एंव बचाया जा सकता है सजग रहकर।

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