खोटे सिक्के ...

खोटे सिक्के - गृहलक्ष्मी कहानियां...

‘क्या है इसमें?' कड़ककर मि. खन्ना ने पूछा। आवाज़ में ऊँचे पद का गर्व बोल रहा था। ‘जी, खोटे सिक्के हैं। वहाँ मेरा बाबा खोटे सिक्के...

एक बार और - ...

एक बार और - गृहलक्ष्मी कहानियां...

‘पान खाओगी?' ‘नहीं।' ‘कुछ पिपरमेण्ट की गोलियाँ पर्स में रख लो।' ‘मुझे चक्कर नहीं आते।' ‘टिकट ठीक से रख लिया न?' ‘हूँ।' ये औपचारिक वाक्य...

असामयिक मृत्...

असामयिक मृत्यु - - गृहलक्ष्मी...

सच पूछो तो यह भी कोई उम्र है मरने की भला? कुल जमा चवालीस साल। पर मौत कौन किसी से पूछकर आती है! फिर हुआ भी तो सब-कुछ कितने आकस्मिक ढंग...

ब्यूटी पार्ल...

ब्यूटी पार्लर शरणम् गच्छामि...!!...

इस देश में मध्यम वर्गीय पति के लिए पत्नी हमेशा ही घोषित रूप में चश्मे बद्दूर होती है। इस सफेद झूठ को बोलने के पीछे संभवत: दो कारण होते...

बूढ़ा गिद्ध ...

बूढ़ा गिद्ध - हितोपदेश की रोचक...

बूढ़े गिद्ध को बहुत अच्छा लगता था। वह मन ही मन सोचता- ये पक्षी कितने दयालु हैं। अतः जब वे अपने बच्चों के लिए भोजन की तलाश में जाया...

साधु की पुत्...

साधु की पुत्री - हितोपदेश की प्रेरक...

एक दिन वे ध्यान में मग्न थे, तभी बाज की चोंच से एक चुहिया छूट कर उनके हाथों में आ गिरी। उसकी छोटी-सी पूँछ व काली चमकीली आँखें थीं।...

क्रेडिट - बच...

क्रेडिट - बचपन से पचपन तक - गृहलक्ष्मी...

मैं ने अपने जीवन में 'क्रेडिट शब्द पहली बार तब सुना जब मैं छठी कक्षा में था। हमारे मोहल्ले में किराने की एक नई दुकान खुली थी। पिताजी...

मोक्ष - गृहल...

मोक्ष - गृहलक्ष्मी कहानियां

'मां कुंभ नहाने चलोगी? काफी दिन से कह रहीं थीं कि मुझे गंगा नहला ला। इस बार तुम्हें नहला ही लाता हूं। ट्रेन से टिकट करा ली है। सुनकर...

हृदय परिवर्त...

हृदय परिवर्तन - गृहलक्ष्मी कहानियां...

'लो आज फिर देर हो गई। इन सिटी बसों में बैठना तो किसी सजा से कम नहीं है। ज्यादा सवारियां बिठाने के चक्कर में खड़ी हुई तो बस खड़ी ही रहेगी।...

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गृहलक्ष्मी गपशप

जन-जन के प्र...

जन-जन के प्रिय तुलसीदास...

भगवान राम के नाम का ऐसा प्रताप है कि जिस व्यक्ति को...

भक्ति एवं शक...

भक्ति एवं शक्ति...

शास्त्रों में नागों के दो खास रूपों का उल्लेख मिलता...

संपादक की पसंद

अभूतपूर्व दा...

अभूतपूर्व दार्शनिक...

श्री अरविन्द एक महान दार्शनिक थे। उनका साहित्य, उनकी...

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जब मॉनसून में सताए...

मॉनसून आते ही हमें डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया, जैसी...

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