शिशु की त्वचा की देखभाल

मोनिका अग्रवाल

20th June 2020

शिशुओं की त्वचा वयस्कों से अलग होती है,क्योंकि यह बहुत पतली और नाज़ुक होती है,और,मौसम और पर्यावरण के प्रति अति असमवेदनशील भी होती है,जिससे उन्हें संक्रमण,चकत्ते और एलेर्ज़ी आदि की समस्या हो सकती है.

शिशु की त्वचा की देखभाल
शिशुओं की त्वचा वयस्कों से अलग होती है,क्योंकि यह बहुत पतली और नाज़ुक होती है,और,मौसम और पर्यावरण के प्रति अति असमवेदनशील भी होती है,जिससे उन्हें संक्रमण,चकत्ते और एलेर्ज़ी आदि की समस्या हो सकती है.शिशु की त्वचा की देखभाल कैसे की जाय ?प्रस्तुत हैं ये टिप्स
१-बेबी स्क़िन क्लीनिंग-नवजात शिशु की त्वचा आमतौर पर बहुत कोमल होती है और इसमें मोम जैसी सफ़ेद परत होती है.यह एक प्राक़्रतिक प्रक्रिया है और समय के साथ स्वतः नौर्मल होती जाती है.इसलिए इस परत को निकालने के लिए त्वचा को रगड़ने या किसी क्रीम की आवश्यकता नहीं होती,
२-शिशु को नहलाना-आवश्यकता से अधिक बार नहलाने से बच्चे के प्राक़्रतिक तेल त्वचा से दूर हो सकते हैं.जिसके परिणामस्वरूप त्वचा,शुष्क और परतदार हो सकती है.इसलिए शुरुआत में सप्ताह में ३-४ बार नहलाना पर्याप्त होता है,इसके अतिरिक्त बच्चे को नहलाने के लिए हल्के साबुनों और हल्के गर्म पानी का उपयोग जिया जाना चाहिए.
३-बेबी को पाउडर लगाना-अक्सर बच्चे को नहलाने के बाद क्रीम और पाउडर लगाने की एक परम्परा कई वर्षों से चली आ रही है.ये मात्र एक औपचारिकता है,क्योंकि यदि नहाने के बाद शिशु के शरीर को अच्छी तरह से पोंछकर सूखा लिया जाय तो पाउडर लगाने की आवश्यकता नहीं होती,फिर भी लगाना चाहें तो बेबी पाउडर का उपयोग क़रना सुरक्षित हो सकता है
४-बेबी स्क़िन केअर फ़ॉर नैचरल प्रोडक्ट-बेबी की त्वचा की देखभाल के लिए रासायनिक उत्पादों के उपयोग से बचना चाहिए.अप्राकृतिक और कार्बनिक शिशु उत्पाद सुगंधित या जीवनुरोधी उत्पादों की तुलना में सुरक्षित विकल्प है,किसी भी 
संभावित प्रतिक्रिया से बचने के लिए बच्चे की त्वचा पर किसी भी नए उत्पादों का परीक्षण नहीं किया जाना चाहिए.
५-शिशु में डायपर रैश-लम्बे समय तक डायपर पहनने,से डायपर रैश हो सकते हैं,इस समस्या से बचने के लिए बेबी का गंदा डायपर तुरंत बदले,यदि फिर भी रेज़ेज़ समाप्त न हों तो डोक्तर से परामर्श करें,
६-बेबी स्क़िन प्रॉब्लम-कभी कभी शिशुओं की त्वचा पर छोटे छोटे दाने,एग्ज़िमा या एटालिंक ड़र्माटायटिज़ हो जाता है,जिससे त्वचा पर लाल चकत्ते दिखाई देते हैं,एग्ज़िमा को सही उपचार के साथ नियंत्रित किया जा सकता है
७-शिशु की मालिश-आपके बच्चे की हड्डियों को मज़बूत करने का सबसे अच्छा तरीक़ा मालिश है,इसके लिए आप प्राकृतिक तेलों का उपयोग कर सकते हैं,नारियल,ज़ैतून या बादाम के तेल से हल्की मालिश शिशु की हड्डियों को तो मज़बूत करती ही है त्वचा को सही पोषण देकर ,उसे स्निग्ध भी बनाती है
८-मौशचराइज़र का उपयोग करें-पेराबेंस और डाई फ़्री मौश्चराइज़र के उपयोग से शिशु को शुष्क त्वचा से राहत मिलती है,आप इसके लिए दूध या प्राकृतिक चीज़ों का उपयोग भी कर सकती है( बशर्तें बच्चे को सूट करे)शिशु को हाइड्रेट रखें,शिशु की त्वचा में नमी को बनाए रखने के लिए स्तनपान बेहद लाभदायक होता है.

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