गिलोय की कहानी गिलोय की जुबानी

मोनिका अग्रवाल

20th July 2020

गिलोय नाम से चौक गए होंगे आप। वैसे इतने चौक में की बात भी नहीं है क्योंकि कोरोना देवी की कृपा से आजकल सब जगह गिलोय की धूम है

गिलोय की कहानी गिलोय की जुबानी

गिलोय

गिलोय नाम से चौक गए होंगे आप। वैसे इतने चौक में की बात भी नहीं है क्योंकि कोरोना देवी की कृपा से आजकल सब जगह गिलोय की धूम है ।वैसे एक बात पूछूं जानते भी हैं कि मैं हूं कौन ?नहीं तो चलो हम खुद ही आपको अपने बारे में थोड़ा सा इंट्रो दे ही देते हैं। मैं हूं एक जिद्दी , बेशर्म सा पौधा ! बेशर्म इसलिए क्योंकि मेरी लताएं कभी भी कहीं भी किसी भी पेड़ के साथ आपको चिपकी हुई दिख जाएंगी।अगर आपको अपनी भागदौड़ वाली इस मनहूस जिंदगी से थोड़ी सी फुर्सत मिले तो ,जरा गौर फरमाइएगा ।मैं आपके आसपास कहीं पर भी उगा हुआ दिख ही जाऊंगा। मैं तो कड़वे से कड़वे पेड़ की टहनियों को भी गले लगाए रखता हूं। तभी तो मैं नीम के साथ भी दिख जाता हूं।

 

लेकिन हमारे जिद्दी पन  का मतलब यह नहीं है कि मैं अकेले नहीं उग सकता। सिर्फ दूसरे के सहारे ही उगता हूं।आप मेरा पौधा अलग से भी अपनी बगिया में उगा सकते हैं। वैसे मुझे बहुत प्यारे प्यारे नामों से भी बुलाया जाता है जैसे 'गुड्डूची' या 'अमृता' । अमृता नाम से याद आया ,चलिए आपके सामने अपनी थोड़ी सी और तारीफ कर देता हूं। पौराणिक कथाएं तो आपको जरूर मालूम होगी? याद है ना असुर और सुर अमृत मंथन की कहानी। तो मैं वही अमृता हूं जिसके लिए इतना बड़ा समुद्र मंथन हुआ।आखिर मेरे अंदर गुण ही इतने सारे हैं। यह बात अलग है कि इतनी सदियों से मैं गुमनाम जिंदगी जी रहा था ।वह तो भला हो उस बाबा का जो मुझे औषधि के रूप में बेच बेचकर आज कुबेर पति हो गया । समझ रहे हो ना मैं किसकी बात कर रहा हूं। 

 

खैर छोड़ो मुझे क्या ,मैं तो अपनी बात करता हूं ।आप तो मेरे गुणों को जानो ।मेरी खूबियां पहचानो। भविष्य में छोटी-छोटी परेशानियों के लिए केमिस्ट के चक्कर लगाना बंद कर दो। और मुझे अपनी जिंदगी का हिस्सा बना लो।

 

अच्छा आगे बढ़ने से पहले मैं एक बात और जानना चाहता हूं ।मान लो ,आप मुझे ढूंढने के लिए घर से बाहर निकल भी गए तो आप मुझे पहचानोगे कैसे? सही पकड़ा है ना !हो गए ना कंफ्यूज?

 

सुनो,मेरा विकास बेल के रूप में होता है और मेरी पत्त‍ियां पान के पत्ते की तरह होती हैं । लेकिन आकार में कुछ बड़ी। मतलब यह कि मैं सिर्फ गुणों का ही धनी नहीं हूं ,मैं रूप से भी सुंदर हूं। मेरी तारीफ सुनकर आप जल तो नहीं रहे ना।मैं जानता हूं अपने मुंह मियां मिट्ठू बनना अच्छी बात नहीं ।लेकिन आज का चलन तो यही है जो अपने मुंह जितनी तारीफ करेगा, उसको उतनी ही पहचान मिलेगी।

 

और  यदि तारीफ करने से मेरा कुछ भला होता हो तो आपको बुरा क्यों लग रहा है? आपको मालूम है मेरी पत्तियां कितनी ज्यादा गुणी होती हैं कि इनमें  कैल्शि‍यम, प्रोटीन, फॉस्फोरस पर्याप्त मात्रा में होता है। इसके अलावा मेरे तनों में भी स्टार्च की काफी अच्छी मात्रा होती है। तभी तो मेरा इस्तेमाल कई तरह की बीमारियों में किया जाता है। जानना नहीं चाहोगे वह बीमारियां कौन-कौन सी हैं। शुगर मोटापा ब्लड प्रेशर गठिया, डेंगू , चिकनगुनिया और ना जाने कौन-कौन सी बीमारियां। चौंक गए ना! दरअसल मैं हूं ही इतना फायदेमंद। डायबिटीज शुगर में मेरे सेवन से बहुत जल्दी ब्लड शुगर कंट्रोल हो जाती है और पाचन तंत्र सुधर जाता है यानी कि जो काम एकदम से डॉक्टर की दवा नहीं कर पाती वह मैं कर देता हूं। तभी तो डॉक्टर मेरे नाम से कतराते हैं। शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ानी हो या मोटापा दूर करना हो, तो आप मेरा सेवन कर सकते हो।मैं अपने फायदे , किसी की दुकान बंद करवाने के लिए नहीं गिनवा रहा हूं। इसलिए आप दिल पर ना लें। हां मेरा सेवन किस तरह करना चाहिए यह भी मैं बता दूं।

 

बुखार में मेरा सेवन पाउडर, काढ़ा या रस के रूप में करना चाहिए। बुखार हो या डेंगू या फिर गठिया नीरज सेवन कीजिए मैं कम होती प्लेटलेट्स को ठीक कर देता हूं। क्या मजाल कि मेरे होते हुए प्लेटलेट्स कम हो जाएं। ं मेरे पत्ते और तने को एक साथ सुखाकर पाउडर बनाया जाता है। वैसे इतनी मेहनत ना करनी हो तो मैं बताये देता हूं, बाजार में मेरी गोलियां भी मिलती हैं। अब आप इतने प्रभावित भी ना हो की आंख बंद कर मेरा सेवन करना शुरू कर दें यदि आप बाजार से गोली लाकर खा रहे हैं तो सिर्फ 1 दिन में 1 ग्राम गोली खाएं ज्यादा नहीं। वरना बाद में कहेंगे कि मैं नुकसान पहुंचा रहा हूं।

अब कुछ आवश्यक बातें भी हो जाएं। यदि आपका ब्लड शुगर अकाउंट कम है तो भूल कर भी आप मुझे ना खाएं। यदि आपका पेट खराब है तब भी मेरा सेवन ना करें वरना परेशान हो जाएंगे। अति हर चीज की बुरी है जानते हैं ना ।इसलिए ज्यादा जंवा बनने के चक्कर में मेरा ज्यादा सेवन ना करें।

आखिर में तो मैं यही कहूंगा, इधर-उधर भागना बंद करें और मेरा सेवन शुरू करें। बीमारियां अपने आप आपसे दूर भागेंगी।

यह भी पढ़ें- हल्दी का दुख

 

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