क्या आप एक पैरेंट के रूप में भावनात्मक रूप से थक चुके हैं

मोनिका अग्रवाल

16th August 2020

भावनात्मक स्वास्थ्य वह है जिसमे आप अपनी मानसिक स्थिति, विचार, भावनाएं और व्यवहार आपके नियंत्रण में होते हैं। या यूँ कह सकते है कि मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य आपकी संपूर्ण मनोवैज्ञानिकता को दर्शाता है। भावनात्मक स्वास्थ्य में वह सारी चीज़ें शामिल है जैसे कि किस तरह से आप अपने बारे में सोचते हैं, अपने रिश्तों की गुणवत्ता और अपने भावनाओं को नियंत्रित करने की क्षमता और साथ ही साथ कठिनाइयों से कैसे निपटा जाए। लेकिन यदि भावनात्मक रूप से थक जाते हैं तो नियंत्रण खो बैठते हैं।

क्या आप एक पैरेंट के रूप में भावनात्मक रूप से थक चुके हैं

पैरेंट के रूप में भावनात्मक रूप से थक चुके हैं

यदि आप भी एक पैरेंट हैं तो आप जानते होंगे कि बच्चो को पालना पोसना व उनको बड़ा करना कितना मुश्किल काम होता है। हर माता पिता अपने बच्चे को अच्छी परवरिश देना चाहते हैं इसलिए वे इसके लिए अपने बच्चो पर उनकी गलतियों पर भी गुस्सा करने की बजाए उनको प्यार से समझाते हैं जोकि हमारे धैर्य की एक कठिन परीक्षा होती है। और अब जब महामारी के कारण सब कुछ बन्द है तो बच्चो के साथ साथ अपने घर के काम व अपने ऑफिस के काम को संभालना बहुत मुश्किल हो जाता है। कई बार आप को गुस्सा भी आता होगा। यह कुछ लक्षण आप को बताते हैं कि आप भावनात्मक रूप से थक चुके हैं।

  • ज्यादा चिड़चिड़ा हो ना : यदि आप को हर छोटी से छोटी बात भी बहुत बड़ी परेशानी लगती है और आप उससे चिड जाती हैं तो यह आपका भावनात्मक रूप से टूटने की पहली निशानी होती है। इसे अपने ऊपर हावी न होने दे। अपने लिए थोड़ा समय निकालें। थोड़ी देर बाद सब कुछ ठीक हो जाएगा। खुद को खुद ही परेशान न करें। जिस समय आप ऐसा महसूस करते हैं उस समय सभी कामों को छोड़ कर अकेले बैठें ताकि आप नॉर्मल हो जाएं। 

  • बहुत व्याकुल होना : यदि आप शांत रह रह कर परेशान हो चुकी हैं और अब आप से और शांति नहीं दिखाई जा रही अर्थात् आप अपने कामों व बच्चो की गलतियों से परेशान हो रही हैं तो हो सकता है यह आपका कुछ देर के लिए इमोशनल ब्रेक डाउन हो जोकि स्वाभाविक होता है। अपनी व्याकुलता को स्वयं पर हावी बिल्कुल न होने दें। 

  • गुस्से में होना : यदि आप बात बात पर गुस्सा हो जाती हैं तो यह भी आपके भावनात्मक रूप से टूटने का एक लक्षण होता है। हो सकता है आप अपने बच्चो पर कभी कभार बिना गलती के भी गुस्सा करती हों। इसमें आप को अपना ख्याल रखना होगा। आप को अपनी स्थिति के बारे में ध्यान से सोचना होगा नहीं तो इससे आप को कुछ स्वास्थ्य रिस्क भी हो सकते हैं।

  • स्वयं को बाकी सब से अलग रखना : यदि आप सब कामों से थक चुकी हैं तो हो सकता है आप स्वयं को अपने प्रिय जनो से अलग रखने कि कोशिश कर रही हों ताकि उनकी वजह से अब आप को और परेशानियां न झेलनी पड़ें। यह भी संभव है कि आप उनसे बिल्कुल बात ही न कर रही हों और एक अलग कमरे में खुद को बन्द करके बैठी हों।

  • बहुत जल्दी स्ट्रेस में आना : हो सकता है आप बहुत जल्दी स्वयं को स्ट्रेस में ला कर परेशान कर रही हो जोकि बिल्कुल भी सही नहीं है। इससे हो सकता है आप का मूड हर समय बदलता रहता हो। यह भी आप के इमोशनली टूटने की एक निशानी होती है। आप को अधिक से अधिक खुश रहने की कोशिश करनी चाहिए।

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