खुला आकाश - गृहलक्ष्मी कहानियां

मधु गोयल

2nd December 2020

ट्रिन-- ट्रिन हेलो कौन? - नमस्ते भाईसाहब कैसे हैं? ठीक हूं। तुम सुनाओ।

खुला आकाश - गृहलक्ष्मी कहानियां

बस सब ठीक ही है।  मैं कह रहा था परसो सुबह 11 बजे घर पर हवन  हैं ।आप और भाभी जी को  आना है।

- कोई खास बात?

- नहीं भाईसाहब ! बस जरा ये आपका चहेता भतीजा मान  ही नहीं रहा। वर्ना अब तक खुशखबरी ...!. 

कोई लड़की वड़की की बात है क्या?

काश होती ! अच्छी नौकरी लगी हुई है,दस- पन्द्रा लाख का पैकेज भी है, शादी की उम्र हो गई है पर दिमाग में क्या फितूर है पता नहीं. हम कहते हैं तो शादी के लिए मना कर देता है बस एक ही भूत सवार है अमेरिका रिसर्च के लिए जाना है.

तो दिक्कत क्या है?

यह बात क्या दिक्कत से कम है? 

 मैं जनम पत्री लेकर पंडित जी के पास ही चला गया ।बस पंडित जी के  मशवरे से ही कुछ पूजा पाठ  और हवन है.

- हाहाहा! माने हवन का धुआं, सुशांत के दिमाग पर छा जायेगा और उसकी न को हां में बदल देेेगा?  उफफ यार किस चक्कर में उलझे हो?किस ज़माने जी रहा है भाई?करने दे जो चाहता है । क््योों तुम  पंडिििित के चक्कर में पड़े हो. खैर हम लोग समय से पहुँच जाएंगे.

फोन पर बात खत्म  हो चुकी थी लेकिन मन पर कुछ यादों के बादल मंडरा रहे थे।

विभा कितनी खुश है, उसका बेटा प्रेम ,"दिल्ली कॉलेज आफ इंजीनियरिंग "से इंजीनियर बन कर निकला है, वह मात्र अभी 22 वर्ष का ही हुआ है।                   

इतनी छोटी उम्र में इतनी तरक्की और साथ ही साथ  डुएट टेक्नोलॉजी नोएडा से जॉब भी मिल गई उसकी खुशी का ठिकाना नहीं। उसने पति विवेक से कहा ,"हम कितने खुशनसीब हैं ।"प्रेम का सब कुछ क्लियर होता चला गया,"  कहीं कोई परेशानी नहीं हुई।" विवेक खुश होते हुए - - - हमारा प्रेम है ही इतना अच्छा- -  मैं ना कहता था ,"यह मेरा बेटा है ,  एक ना एक दिन मेरा नाम रोशन करेगा ।विवेक की आंखों में आंसू छलक आए, आज वो विवेक जो बच्चों की पढ़ाई के मामले में बहुत स्ट्रिक्ट थे ,भावुक हो गए थे ।उनका सपना जो पूरा हो रहा था ।           अभी ऑफिस गए हुए प्रेम को एक महीना भी नहीं हुआ ,उसको कंपनी की तरफ से किसी प्रोजेक्ट के लिए यू- एस-ए जाने का ऑफर था प्रेम  खुश तो था, लेकिन  इतनी दूर जाने का मन में थोड़ा डर था ।अपनी तरक्की की खुशी में ऐसा कुछ नहीं कहा,  इतनी छोटी उम्र में बेटे को दूर भेजने के लिए विभा और विवेक ने अपना दिल पक्का कर लिया ।बेटे के साथ मिलकर पैकिंग में जुट गए।' विभा , विवेक से - - 'सुनो जी ' - - "क्यों ना हम भी चले वही कहीं किसी होटल में रह लेंगे ।"विवेक पागल हो गई हो क्या ?बेटा कंपनी के खर्चे पर जा रहा है हम अपनी सारी जमा पूंजी भी लगा देंगे ,फिर भी नहीं रह पाएंगे ।होटल का खाने -  पीने का और टिकट का खर्चा इतना है ,हम अपना सब कुछ- खत्म कर देंगे फिर भी पूरा नहीं पड़ेगा। इन बातों को सोचना बंद करो और बेटे की सात समुंदर पार जाने की तैयारी करो।" मैं प्रेम के लिए कुछ डॉलर का इंतजाम कर देता हूं ।"

              एक महीने की ही बात है ,सफर जरूर लंबा है लेकिन सब ठीक हो जाएगा ।बेटा सब एडजस्ट कर लेगा। 

        सब तैयारी हो, गई धीरे धीरे जाने की तारीख भी नजदीक आ गई।बेटे को हिदायतें दीजाने लगी  ।विभा नें सब कुछ प्रेम की पसंद का बनाया, साथ में कूटू की पकौड़ी बनाना नहीं भूली, कूटू की पकौड़ी प्रेम को बहुत पसंद है ।साथ में थोड़ी पूरी और सब्जी रखने के लिए पैक कर दिए। लेकिन आज विभा को  खाने में स्वाद नहीं आया, अंदर ही अंदर आंसू पी गई ।प्रेम "क्या हुआ मां ?एक महीने की ही तो बात है ।"अच्छा बताओ, मैंआपके लिए क्या लाऊं?  पापा के लिए तो ले आऊंगा ,वहां साड़ियां नहीं मिलती हैं ।अच्छा ऐसा करो मां ,जींस और शर्ट पहनना शुरू कर दो ,मैं आऊंगा तो कुछ चेंज भी लगेगा। प्रेम की इस बात पर तीनों हंसते हैं और खाना खाते हैं 1:00 बजे की फ्लाइट थी 3 घंटे पहले रिर्पोटिंग समय था ।1 घंटे का समय एयरपोर्ट पहुंचने में लगता है, इसलिए तीनों 9:00 बजे टैक्सी से निकल गए।सारे  रास्ते में विभा प्रेम को समझाती रही, प्रेम माँ आप परेशान मत होना ,मैं अब छोटा बच्चा नहीं हूं ,सात समुंदर पार जा रहा हूँ,सब ठीक होगा ।वहां पहुंच कर आपको फोन करूंगा ।आप दोनों चिंता मत करना ।

             एयरपोर्ट आ गया ,समय बातों बातों में निकल गया। लगेज ट्रॉली में रखने के बाद तीनों आपस में गले मिलते हैं ,और भरे मन से विदा लेते हैं ।विभा और विवेक को प्रेम को छोड़ने पर ऐसा लगा जैसेहमारी कोई चीज छूट गई है ।दोनों फिर वापसी के लिए टैक्सी में बैठ कर घर की ओर चल देते हैं। बीच रास्ते में प्रेम का फोन आता है ,पापा मेरा चेक इन हो गया है अब मैं बोर्डिंग  के लिए जा रहा हूं, मेरी पहली फ्लाइट साडे 8 घंटे की है ।एम्सटर्डम पहुँच  कर फोन करूंगा ,आप चिंता मत करना ?आप दोनों परेशान रहोगे तो मेरा भी वहां मन नहीं लगेगा। मेरी दूसरी फ्लाइट 10 घंटे की है,"ओके गुड नाइट ।"

            विभा और विवेक कुछ समय बाद घर पहुंच जाते हैं। रात में दोनों ठीक से सो नहीं पाते हैं ।सुबह उठकर चाय पीने में भी दिल नहीं लगता है ।यह सोचकर एक महीने की ही तो बात है ,अपने - अपने काम में लग जाते हैं ।

                करीब 11:00 बजे प्रेम का फोन आता है ,और कहता है ,"मां मैं यहां ठीक पहुंच गया हूं "करीब करीब आधा सफर तय हो गया है ,आप लोग अपना ख्याल रखना ,और फोन कट जाता है।

              विवेक ऑफिस चले जाते हैं ,और विभा घर के काम में लग जाती है ।कमरे में जाने पर देखती क्या  है एक पेपर फोल्ड किया हुआ रखा है ।खोल कर देखती है और पढती है ,प्रेम ने लिखा था ,"हैप्पी बर्थडे मॉम "मैं तो नहीं होंऊँगा ,दो दिन बादआपका जन्मदिन है ,मेरी तरफ से आपको यह गिफ्ट है ,"आने के बाद सेलिब्रेट करेंगे ।"आपके लिए गिफ्ट वहीं से लेकर आऊंगा वह पत्र पढ़कर पढ़ रही रही होती है कि विवेक ऑफिस से लौट आते हैं वह विवेक को देख कर सका जाती है और कहती है अरे आप- -  विवेक मैंने सोचा था तुम अकेली होंगी ,एक जरूरी काम था इसलिए ऑफिस जानाजरूरीथा,इसलिए आफिस चला गया था ।अरे वह तो मैं - - रोज ही अकेली होती थी। विवेक लेकिन आज दिल से अकेली हो ।अच्छा यह क्या पढ़ रही हो देखूं तो सही जरा अरे कुछ नहीं प्रेम पत्र लिखकर गया है, वह पढ़ रही थी विवेक पत्र पढ़कर हंसता है और कहता है, चलो इसी बात पर कुछ खिलाओ भूख लग रही है। इसी तरह दिन बीत जाता है अगले दिन प्रेम का फोन आता है ,पापा मैं ठीक-ठाक पहुंच गया हूं । चलो बेटा बहुत अच्छा है तबीयत तो ठीक है ना ,हां पापा लेअपनी मम्मी से बात करले विवेक फोन विभा  को दे देता है। विभा कुशल मंगल पूछती है ,प्रेम बताता है हां मां जर्नी बहुत लंबी है इसीलिए माँ यू यस को सात-समुंदर पार कहते हैं एक तो यात्रा लंबी और-ऊपरसे-रात दिन का फर्क ।

               ,आप चिंता मत करना सब ठीक हो जाएगा आप अपना और पापा का ख्याल रखना और फोन रख देता है ।विभा  इसी दिन से उसके आने के दिन गिनने लगती है, हर रोज एक दिन घटाती है विभा  विवेक से कहती है कि प्रेम के आने के बाद कोई अच्छी सी लड़की देख कर प्रेम की शादी कर देंगे ।विवेक प्रेम अभी छोटा है उसकी मर्जी के बिना हम अपना फैसला उसके ऊपर नहीं थोपेंगें ।

1 दिन प्रेम का पत्र आता है पत्र देखकर दोनों बहुत खुश होते हैं ,लिखता है - - माँ मैं यहाँ आकर बहुत कुछ सीख गया हूँ, खाने मैं भी बहुत कुछ बनाने लगा हूँ , और कहता है, चलो अच्छा है, मेरी शादी के बाद मेरी बीवी काम नहीं करेगी, तो कम से कम मैं आपकी मदद कर दूँगा ।पत्र पढ़कर हंसते हैं , और हाँ पापा यहाँ पर इंटेल कंपनी में जॉब के लिए इंटरव्यू दिये थे ।मेरे 9 इंटरव्यू लिये गये, सब क्लियर हो गए, पापा वो मुझे जाब दे रहे हैं, आप दोनो की क्या राय है? जाब मुझे यूएस में ही करनी है ।दोनो पत्र पढ़कर सोच में पड़ गए कि बेटा दूर हो जाएगा ।लेकिन उसके भविष्य का सवाल हैवैसे भी विभा और मेरी उम्र बढ रही है ।

तभी विभा आती है क्या हुआ कहां पहुंच गए?

कहीं नहीं बस अमेरिका । उसको सारी बात बताई।

क्या हुआ अगर हमसे दूर है तो।आज देखो बच्चे कितने खुश हैं ।साथ में रहकर मन से दूर हों, उससे तो अच्छा दूर रहकर मन के पास। विभा ने मुस्कुराते हुए कहा।हवन वाले दिन जब हम विजय के घर पहुंचे तो पंडित जी हवन का सामान सजा रहे थे. 

कुछ मेहमान आने थे कुछ आ गये थे . 11 बजे शुरू होने वाला हवन 12:00 बजे शुरू हुआ . 

इधर पंडित जी ने सुशांत और उसके मम्मी पापा के हाथों में पानी डाला और उच्चारण शुरू कर दिया - ॐ केशवाय नम:, ॐ नारायणाय नम: ... उधर बड़ी भाभी ने विभा के कान में धीरे से पूछा,

- बड़ा सुंदर हार है  कहां से लिया?

- सुशाांत ने दिलवाया   था. अबकी बार आया था तब? 

- मजे हैं भ ई ! विदेशी बेेेटे का फायदाा  उठा रहे हो   !

जब हवन कुंड में से धुंआ निकलने लगा तो आँखों में लगने लगा. लोग थोड़ा बहुत कसमसाने लगे. पड़़ोस वाले मिश्रा ने गुप्ता को इशारा किया और दोनों बाहर निकल लिए. मिश्ररा बोले,

- यार ये धुआं ना आँखों को तंग करता है. बाई द वे ये हवन है किसलिए?

- अरे यार हवन है इसमें तो बैठ जाया कर बेचैन आत्मा. दो अक्खर कान में पड़ गए तो कोई हर्ज नहीं. खैर कोई मन्नत शन्नत मांगी होगी इन्होंने मुझे नहीं पता. तू बता तेरा शेयर बाज़ार कैसा रहा? कुछ प्राप्ति हुई के नहीं?

-  कमाई हो गई थी यार.

हवन के धुंए से छोटी जीीजी की आँखों में पानी आने लगा तो उन्होंने बड़ी दीीीदी को हिलाकर बताया की मैं बाहर जा रही हूँ. बड़ी दीदी भी पीछे पीछे बाहर आ गई और बोली,

- तेरे बच्चे  नहीं आये?

- कहाँ आते हैं बच्चे ऐसे कामों में? किसी को पढ़ने जाना है तो किसी ने खेलने जाना है. दोनों को बोल आई हूँ कि खाने के वक़्त जरूर आ जाना और पिज़्ज़ा विज्ज़ा मत मंगवाना.

- सच ज़रा सा खाना मनपसंद ना हो बाज़ार से मंगाने के लिए तैयार रहते हैं. अमरीका में ये सब घट रहा है और यहाँ बढ़ रहा है. और सब ठीक है ना?

खाना शुरू हो गया तो हमने भी अपनी प्लेट लगाई और सुशांत को पकड़ा,

- अरे तेरी अकल पर पत्थर डालने के लिए हवन हो रहा है ?

- हाहाहा! अंकल ये मम्मी पापा के काम हैं. आप उन्हीं से पूछो.

- अरे तू मुझे बता तेरा चक्कर क्या है.

- अंकल मम्मी की सहेली की एक लड़की है मम्मी चाहतीी है मैं उससे शादी करूं लेकिन मैं अमेरिकाााा जाना चाहता  2 साल काा प्रोग्राम है और मम्मी पापा  जाने नहीं दे रहे। 

- अरे नौकरी पेशाा होकर भी अपनी समस्या नहींीं सुलझा सका ।

 नौकरी  क्या करेंगी?वही तो समस्या का कारण है।

कारण नहीं बुद्धू निवारण। तू नौकरी करता है ,वह ठीक है। लेकिन कंपनी वाले बाहर भी तो भेज सकते हैं, ना ।समझ फिर देख मज़ा!

- वाह अंकल । यह आईडिया तो मेरे दिमाग में आया ही नहीं  । फंसवा तो नहीं दोगे आप.

- फिकरनॉट. कंपनी भेजे ना भेजें तू तो अपनी रिसर्च की एप्लीकेशन दाखिल करवा दे ।तेरा बाप कौन साा कंपनी पूछताछ करने जाएगा ?अगले महीने की टिििििकट बुक करवा दे!  बेफिक्र होकर जा !

तभी राकेश वंहा आ जाता है ..." चाचा भतीजे में क्या बात चल रही है"?

" कुछ नहीं आप दोनों बातें करें , मैं अभी आता हूं ,कंपनी से काॅल आ रही है । 

राकेश  यह क्यारियां देख रहा है ना। जरा बता तो इन सब में हर पौधे के बीच में समान दूरी क्यों है? उन्हें पास पास क्यों नहीं लगा दिया?

" कैसे बातें करते हो आप भी !अगर पौधे पास पास लगेंगे तो पनप नहीं पाएंगे। उनको उचित हवा , पानी और रोशनी की जरूरत है जो  थोड़ी दूरी पर लगाने पर ही मिलेगी।हमम।। तो तू यह बात मानता है कि पौधों के पनपने के लिए स्पेस जरूरी है ।तो यही तो मानव जीवन का भी उसूल है। बच्चों को पनपने के लिए भी स्पेस जरूरी है। उन्हें तरक्की के लिए खुला आसमान दो उन्हें थोड़ी आजादी दो।

ये भी पढ़ें:उम्मीद - गृहलक्ष्मी कहानियां

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