बहू बनने वाली है मां, सासू मां बन जाएं असली दोस्त

चयनिका निगम

5th January 2021

बहू प्रेग्नेंट है तो इस वक्त उनको आपके साथ की जरूरत है ताकि वो इस दौरान होने वाले मानसिक दबाव का सामना कर सकें।

बहू बनने वाली है मां, सासू मां बन जाएं असली दोस्त

अरे अब तो आप दादी बनने वाली हैं।'

पोता चाहिए या पोती?'

अब बहू से घर के काम थोड़े कम ही कराइए।'

आप दादी बनने की तैयारियां कर रही होंगी तो जरूर ही आपको इस तरह की बातें सुनने को मिलती होंगी। लेकिन आपको जो सुनने को नहीं मिलता, वो है बहू का मानसिक और शारीरिक ख्याल रखने की सलाह। जी हां, दादी बनने की प्रक्रिया में आप खुशी तो खूब महसूस करती हैं, लेकिन क्या कभी ये जानने की कोशिश की है कि प्रेग्नेंसी में ढेरों तरह के मानसिक बदलाव भी होते हैं। वो बदलाव, जो उनके लिए ये 9 महीने बहुत कठिन बना देते हैं। ये आमतौर पर सभी महिलाएं महसूस करती ही हैं। गर्भावस्था में सिर्फ शारीरिक नहीं बल्कि मानसिक बदलाव भी कई होते हैं। इन मानसिक बदलावों का व्यवहार में अंतर भी काफी दिखता है। लेकिन इस दौरान अगर सासू मां का साथ मिल जाए तो 9 महीने का ये सफर कुछ आसान हो जाएगा। इसके लिए सासू मां को क्या करना होगा, चलिए जान लेते हैं-

 

पहले तो मानें-

बहू को गर्भावस्था के दौरान मानसिक दिक्कतें होंगी, पहले तो इस बात को मानना पड़ेगा। मानना पड़ेगा कि हां, ऐसा होता है। ‘हमारे जमाने में तो...' वाले जुमले आपको बहू के सामने न आजमाते हुए, उसे समझने की कोशिश करनी होगी। आपको मानना होगा कि प्रेग्नेंसी में मानसिक बदलाव होते हैं। इतना ही नहीं आपको ये भी मानना होगा कि जरूरी नहीं अगर किसी को मेंटल प्रोब्लम नहीं हुई हैं तो किसी दूसरे को भी ये परेशानी नहीं होगी। किसी एक को ऐसा महसूस होगा तो किसी को नहीं भी। इसलिए आपकी बहू किस कैटेगरी में आती है, पहले इसका निर्णय लें। 

व्यवहार देखें-

आपकी बहू का व्यवहार कैसा है, इस बार पर ध्यान दें। पहले के मुकाबले अब वो ज्यादा सोचती है। या अब कम बोलती है या फिर अब छोटी-छोटी बात पर वो चिढ़ जाती है। अगर व्यवहार में इतने बदलवा महसूस हो रहे हैं तो समझ लीजिए कि बहू कुछ तो मानसिक परेशानी का सामना कर ही रही है। वो शारीरिक बदलावों की वजह से बदलते शरीर के आकार को लेकर भी परेशान हो सकती है। 

ऐसे रखें ध्यान-

बहू अगर मानसिक बदलाव महसूस कर रही है तो उन्हें मानसिक शांति देने की भरसक कोशिश कीजिए। उनके लिए ऐसा माहौल बनाइए कि उन्हें ज्यादा सोचना ही ना पड़े। वो अपनी मानसिक बीमारियों को भूल जाएं। इसके लिए सबसे पहले तो बहू का साथ कभी ना छोड़ें। मतलब बहू को ये एहसास कराएं कि आप उनकी सहायता के लिए हमेशा मौजूद रहेंगी। इसलिए वो किसी भी भी तरह की परेशानी का साथ छोड़ दें। शुरू में शायद आपकी बहू इस बात का मतलब ना समझें लेकिन एक दिन वो आपकी सहायता को आसानी से समझ जाएंगी। समझ पाएंगी कि कैसे परेशानी के दिनों में आपने उनका साथ दिया था। 

लड़का-लड़की, कोई अंतर नहीं-

बहुत सी सासू मां बहू पर सिर्फ लड़का पैदा होने की बात कह देती हैं। जबकि ये सबलुच होने वाली मां के हाथों में तो होता नहीं है। इसलिए बहू पर होने वाले बच्चे के लिंग को लेकर कोई भी दबाव डालने से बचें। उनसे कहें कि तुम खुश रहो और स्वस्थ्य बच्चे को जन्म दो, लड़का हो या लड़की पूरा परिवार उसे बहुत प्यार देगा, इस बात की गारंटी लीजिए बहू को कभी भी बच्चे के साथ भेदभाव नहीं होगा। ये एक बात आपकी बहू के दिल से बड़ा बोझ उतार देगी। वो रिलेक्स हो जाएंगी कि उनके बच्चे को लड़का-लड़की के तराजू में नहीं तौला जाएगा। वो तो पूरे परिवार के प्यार और दुलार के बीच पढे-बढ़ेंगे। 

काम का दबाव-

होने वाली मां को खुश रखना है तो सबसे पहले उस पर से घर के काम का दबाव कम कर दें। कम से कम इन्हें करने का दबाव तो उन पर ना ही हो। वो खुद इन कामों को खुशी-खुशी कर रही हैं तो बात बिलकुल अलग है लेकिन अगर ऐसा नहीं है तो उनसे कहिए कि ‘अरे अब तुम कम काम किया करो, मैं हूं मिलकर पूरा काम निपटा लेंगे।' इसके साथ उन्हें एहसास होगा कि उनकी दिक्कत कोई तो समझ रहा है। आप दोनों का बॉन्ड भी मजबूत होगा और वो खुश भी रहेंगी। 

टोका-टोकी... हो-

किसी भी इंसान को टोका-टोकी बिलकुल अच्छी नहीं लगती है। इसलिए जरूरी है कि आप भी बहू को हर बात पर टोकना बिलकुल बंद कर दें। परिवार में वो लंबे समय से रह रही हैं तो उन्हें भी नियम कायदे पता हैं, ऐसे में अगर आप बार-बार टोका-टोकी करेंगी तो उन्हें मानसिकतौर पर परेशान ही करेंगी। 

हॉबी को दें समय-

आप अपनी बहू को हॉबी को समय देने कि भी सलाह दे सकती हैं। उनसे कहिए कि वो उस काम का चुनाव करें, जो उन्हें बहुत खुशी देता है। जिसे करके वो बहुत खुशी महसूस करती हैं। ये काम पेंटिंग भी हो सकती है तो ऑफिस का काम भी। ऐसा करते हुए जरूर ही आपकी बहू प्रेग्नेंसी के समय होने वाले मानसिक दबाव को याद ही नहीं कर पाएंगी। 

ये भी पढ़ें- आईवीएफ का फैसला

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