नई शादी में सेक्स संबंधित समस्याएं

Spardha Rani

20th April 2021

सेक्स संबंधी परेशानी कई नई शादी वाले जोड़ों को भुगतनी पड़ती है। कई बार एक को तो कई बार दोनों को समझ नहीं आता कि उनके बीच क्या गलत या गड़बड़ है।

नई शादी में सेक्स संबंधित समस्याएं

मेघना की नई- नई शादी हुई थी। शुरू में तो वह और उसका हसबैंड रजत बहुत एक्साइटेड रहते थे लेकिन अभी शादी को मुश्किल से एक महीना ही बीता था कि रजत मेघा से थोड़ी दूरी बनाकर रहने लगा। मेघना को कुछ समझ नहीं आया, उसने रजत से बात करने की कोशिश भी की लेकिन रजत तो मानो कुछ बोलना ही नहीं चाहता हो। ऐसे में मेघना ने अपनी ननद से बात की, जो शादी से पहेल से उसकी दोस्त थी। और तब बातों- बातों में मेघना को दो- तीन संभावनाएं समझ में आयीं कि शायद इन वजहों से रजत उससे दूर रहता हो। सेक्स संबंधी ऐसी परेशानी सिर्फ मेघना और रजत को ही नहीं बल्कि कई नई शादी वाले जोड़ों को भुगतनी पड़ती है। और दिक्कत तो यह है कि कई बार एक को तो कई बार दोनों को समझ नहीं आता कि उनके बीच क्या गलत या गड़बड़ है।

नव विवाहित जोड़े में सेक्स संबंधी समस्याएं

हम में से अधिकतर लोगों का यही सोचना रहता है कि नव विवाहित जोड़ों की सेक्स लाइफ बेस्ट रहती है लेकिन ऐसा हमेशा नहीं होता। कई नव विवाहित जोड़ों के बीच फिजिकल कम्पैटिबिलिटी में दिक्कतें आती हैं, जो उनकी शादी में व्यवधान पैदा करती हैं। हम में से कई लोग इमोशनल और फिजिकल अटैचमेंट की बातें करते हैं लेकिन किसी भी रिश्ते में सेक्स भी उतना ही जरूरी है। अमूमन नव विवाहित जोड़ों को सेक्स संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

कितनी बार करें सेक्स

नव विवाहित जोड़े अमूमन अपने सेक्सुअल डिजायर के चरम पर होते हैं। उन्हें दिन में कुछेक बार सेक्स करना अच्छा लगता है। लेकिन यह भी सम्भव है कि वे यह सोचकर अनकम्फर्टेबल हो जाएं कि उन दोनों के लिए एक दिन में कितनी बार सेक्स करना सही है। किसी को कम तो किसी को ज्यादा, यह अंतर दोनों के बीच खाई पैदा कर सकता है।

कॉन्ट्रासेप्टिव का इस्तेमाल

अमूमन पुरुषों को पता नहीं होता कि उन्हें कंडोम का प्रयोग कैसे करना चाहिए। ऐसे में वे इम्बैरेस्ड हो जाते हैं और उनका इरेक्शन खत्म हो जाता है। पत्नी को समझ नहीं आता कि वह इस समय कैसे रिएक्ट करे तो यह स्थिति बहुत खराब हो जाती है।

पैशन की कमी

यदि हसबैंड समय से पहले इजैकुलेट कर लेता है या वाइफ को और्गैज्म नहीं होता तो अमूमन जोड़े सोच लेते हैं कि उनकी सेक्स लाइफ बेकार है। बिना पैशन के यह नीरस हो जाती है और फिर नव विवाहित जोड़े इंटिमेट होने से दूर होने लगते हैं। ऐसे मामलों में, यह याद रखना चाहिए कि बढ़िया सेक्स समय और प्रैक्टिस के साथ ही होता है।

पुरानी सोच पर भरोसा

पुरानी सोच यह कहती है कि अगर सुहाग रात को पत्नी ब्लीडिंग करती है तो इसका मतलब यह है कि वह वर्जिन है। और यदि नहीं करती है तो उसका हसबैंड तुरंत उसे रिजेक्ट कर सकता है। इस तरह से उनकी शादी में दिक्कतें आने लगती हैं। इसी तरह यदि हसबैंड अपनी वाइफ को संतुष्ट नहीं कर पाता है तो वह खुद में मजाक का केन्द्र बन जाता है। उस पर बहुत दबाव आ जाता है।

बातचीत में कमी

अधिकतर नव विवाहित जोड़े बातचीत नहीं कर पाते हैं, खासकर अपनी सेक्सुअल जरूरतों और चाह को लेकर। वे अपने पार्टनर से यह नहीं कह पाते हैं कि उन्हें सेक्स में क्या चाहिए। जब तक दोनों पार्टनर एक - दूसरे से अपनी सेक्सुअल जरूरतों और चाह को नहीं कहेंगे, तब तक दूसरे को पता कैसे चलेगा कि उनके पार्टनर को क्या पसंद है और क्या नहीं। इसलिए एक- दूसरे से सेक्स संबंधी डिजायर भी वैसे ही शेयर करना चाहिए, जैसे अन्य बातें शेयर करते हैं।

सेक्सुअल बॉन्ड के लिए क्या करें नव विवाहित जोड़े

नव विवाहित जोड़ों को अपने बीच के सेक्सुअल बॉन्ड को बनने के लिए थोड़ी मेहनत करनी पड़ सकती है। जरूरी नहीं है कि सबके बीच की बॉन्डिंग शुरू से अपने आप बन जाए। इसके लिए आप इस तरह की कोशिशें कर सकती हैं।

शुरुआत कोई भी

जरूरी नहीं है कि शुरुआत हमेशा हसबैंड ही करे! शुरुआत वाइफ भी कर सकती है। अगर इसको लेकर झिझक है तो इस बारे में भी बात कर लेना बेहतर है कि मेरा मन भी करेगा तो मैं भी शुरुआत करूंगी। क्योंकि मान लीजिए वाइफ का मन कर रहा है और वह इन्तजार में है कि हसबैंड शुरू करेगा और हसबैंड ने इस बारे में सोचा ही नहीं तो यह नहीं होगा। इसके बजाय वाइफ शुरुआत करके अपने प्यार को जता सकती है। यह भी तो प्यार जताने का एक तरीका है!

फोरप्ले

अगर दोनों में से किसी एक का मन बहुत है और सामने वाले को समझ नहीं आ रहा है कि किस पॉइंट पर उसकी वाइफ या हसबैंड को अच्छा लगेगा तो वह इस बारे में इशारे से या उसका हाथ पकड़ कर बता सकता/ सकती है।

सेक्सी लॉन्जरी

यह बात भले ही कुछ लोगों को समझ ना आए लेकिन यह सच है कि सेक्सी लॉन्जरी एक बढ़िया सेक्स की शुरुआत कर सकती है। अगर आपके पास यह है तो इसे जरूर पहन कीजिए। और अगर नहीं है तो खरीद लीजिए। अगर बाहर नहीं जा सकती हैं तो ऑनलाइन मंगवा लीजिए, ऑनलाइन बहुत ऑप्शंस हैं।

टच भी है जरूरी

जरूरी नहीं है जब सेक्स करने का मन हो तभी टच करें। बिना सेक्स की उम्मीद के एक- दूसरे को टच करना भी एक- दूसरे की बॉडी और जरूरतों को एक्सप्लोर करना ही है। यह बेहद जरूरी है, इससे दोनों को यह समझ आता है कि देने वाले और लेने वाले को क्या अच्छा लगता है। खुशी और दुलार, आप दोनों को तब भी पास रखेगा, जब आपको सेक्स करने का मन नहीं भी होगा।

शुरू के एक- दो साल

शुरुआत के कुछ महीने आप दोनों एक- दूसरे को एक्सप्लोर कर रहे होते हैं, जिसमें टच, शेयर्ड खुशी और गहरी इंटिमेसी शामिल है। सेक्स के लिए सिर्फ खानापूर्ति नहीं बल्कि उपरोक्त तीन चीजों अपर ध्यान देना चाहिए। वरना सेक्स समस्याएं आपकी लाइफ का फोकस बन जाएंगी। प्यार से टच करने के मतलब हमेशा सेक्स ही नहीं होता, यह बात भी दोनों को समझनी होगी। जब एक कपल एक- दूसरे को रूम के अंदर और बाहर टच करने में कम्फर्टेबल होगा, तब वे दोनों मिलकर अधिक सॉलिड, सेंसुअल औए सेक्सुअल बॉन्ड डेवलप कर पाएंगे।

 

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