रिश्ते के कंधों पर है मर्यादा का बोझ - PROJECT SAAS

मोनिका अग्रवाल

15th April 2021

अगर ससुर को बहू के लिए ससुराल का जेल कहा जाए तो काफी हद तक ठीक बैठेगा।

रिश्ते के कंधों पर है मर्यादा का बोझ - PROJECT SAAS

ससुराल गेंदा फूल में एक रिश्ता ऐसा होता है जिससे बहु का सीधा साबका तो नहीं पड़ता पर उसके नाम भर से बहु के इर्द-गिर्द ढेरों बातें, पाबंदियां, लिहाज की रेखाएं खींच दी जाती हैं। वह नाम है पति के पिता यानी बहु के ससुर जी का। जिनके आस-पास होने भर से बहु को चौकन्ना रहना होता है कि कहीं बहु की किसी बात से बात मर्यादा पार न हो जाए। अगर ससुर को बहू के लिए ससुराल का जेल कहा जाए तो काफी हद तक ठीक बैठेगा। इस कहे-अनकहे अनुशासन के चलते बहु को ढेरों समस्याओं का सामना करना पड़ जाती है। 

मर्यादा पार न हो जाए 

बहु नई नवेली हो या फिर उसे ससुराल पहुंचे वक्त गुजर चुका हो मर्यादा के मामले में नियम सबके लिए लिए एक से ही होते हैं। बहु के बोलने से लेकर उठने-बैठने, खाने-पीने तक हर चीज में उसके ससुर जी के नाम की आड़ में नसीहत दी जाती है। जरा, धीरे हंसों ससुर खड़े हैं तुम्हारे, आगे कमरे में मत जाना पापा बैठे हैं, वहां सरीखी कई बातें हैं जो कोई बड़ी बात नहीं है पर ससुर जी की मौजूदगी में उसे गुनाह की तौर पर पेश किया जाता है। या यूं कहें बहु को हर वक्त खौफ रहता है कि कहीं मर्यादा न पार हो जाए।  

नहीं पहुंच पाती बातें 

बहु और ससुर की बीच पर्दे का रिश्ता है। ससुर जी तक अपनी बात पहुंचाने के लिए बहु को मध्यस्थ की आवश्यकता होती है। कुछ यही तरीका ससुर जी की ओर से भी अख्तियार किया जाता है। ऐसे में न तो ससुर जी की बात बहु तक सीधे पहुंचती है और न ही उसका प्रतिउत्तर। मध्यस्थ की मौजूदगी के चलते कई बार संदेश का अर्थ ही बदल जाता है तो कई बार अर्थ का अनर्थ ही  हो जाता है। 

ड्रेस कोड हो जाता है निर्धारित 

घर में मौजूद महिला घर की बहू है या बेटी इसका निर्धारण उसके ड्रेस कोड से होता है। अब आप कहेंगे कि समय बदल गया है यह बात पुरानी हो गई है। माना, जमाना बदला है पर बहु के लिए अभी भी ससुर जी की मौजूदगी ड्रेस कोड निर्धारित करती है। बहु की साड़ी का पल्ला सिर पर रहना चाहिए, अगर सूट पहना है तो उसकी चुन्नी सिर पर जाएगी कि कंधों पर यह भी उनकी मौजूदगी ही तय करती है। इतने पर ही बस नहीं होता बहु की वॉर्डरोब में कई पिरधान ऐसे भी होते हैं जिनको ससुरज जी की मौजूदगी में पहने की इजाजत नहीं होती। 

क्यूं की बहु बेटी नहीं होती

बेटी गई तो बहु आई। अब वह घर सम्भाल लेगी। बहु से उम्मीद बहुत होती हैं लेकिन उसे बेटी सा अपनापन नहीं दिया जाता। बहु अपने पिता को मायके में छोड़ के आती है पर ससुर के तौर पर पिता नहीं मिलता। ससुर तो सिर्फ पति के पिता होते हैं। ऐसा इसलिए क्यूंकि बहु बेटी नहीं है।

यह भी पढ़ें-

एक महिला की मृत्यु के बाद उसकी संपत्ति पर किसका अधिकार है?

अपने बॉस से कभी ना कहे यह बातें

कमेंट करें

blog comments powered by Disqus

संबंधित आलेख

जानिए वो 4 व...

जानिए वो 4 वजहें सास-बहू के रिश्ते में दूरी...

प्रोजेक्ट सा...

प्रोजेक्ट सास- बनें हेल्पिंग सासू मां

कभी-कभी क्यो...

कभी-कभी क्यों बिगड़ जाते हैं अपनी मम्मी से...

माता पिता सि...

माता पिता सिर्फ़ बेटे की ज़िम्मेदारी नहीं...

पोल

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाने की शुरुआत किस देश से हुई थी ?

वोट करने क लिए धन्यवाद

इंग्लैण्ड

जर्मनी

गृहलक्ष्मी गपशप

वापसी - गृहल...

वापसी - गृहलक्ष्मी...

 बीस साल पहले जब वह पहली बार स्कूल आया था ,तब से लेकर...

7 ऐसे योग आस...

7 ऐसे योग आसन जो...

स्ट्रेस, देर से सोना, देर से जागना, जंक फूड खाना, पौष्टिक...

संपादक की पसंद

हस्त रेखा की...

हस्त रेखा की उत्पत्ति...

जिन मनुष्यों ने हस्त विज्ञान की खोज की उसे समझा और...

अक्सर पैसे ब...

अक्सर पैसे बढ़ाने...

बाई काम पर आती रहे, काम अच्छा करे और पैसे बढ़ाने की...

सदस्यता लें

Magazine-Subscription