एंटी रैगिंग- भाग 1

संजीव जायसवाल

10th February 2020

देश में शिक्षण संस्थानों में रैंगिंग की रोकथाम के लिए कठोर नियम बनाए गए हैं, पर इसके बावजूद कई संस्थानों में रैंगिंग की घटनाएं होती रहती हैं। असल में रैंगिंग पर पूरी तरह लगाम तभी लग सकता है, जब विद्यालय प्रशासन और छात्रों में स्वयं इससे निपटने की दृढ़ इच्छा शक्ति हो।

एंटी रैगिंग- भाग 1
आसमान में लालिमा छाने लगी थी। उत्साह से भरे पंक्षी अनंत आकाश के विस्तार को नाप लेने के लिए अपने पंखों को फैला कर उड़ान भरने लगे थे। फर्राटा भरते वाहनों ने सड़कों के सूनेपन को मिटाना शुरू कर दिया था। सोया हुआ शहर जाग उठा था। मंजिल तक पहुंचने की आस में भीड़ सड़कों पर उमडऩे लगी थी। ताजगी और उत्साह से भरे लोग एक और दिवस को अपने अनुभव के खाते में गूंथने के लिए अपनी मंजिल की ओर कदम बढ़ाने लगे थे।नमिता का भी मन उत्साह से भरा हुआ था, लेकिन उसके दिल के किसी कोने में एक अज्ञात सा भय भी समाया हुआ था। हर बीतते पल के साथ वह भय उसके उत्साह पर हावी होता जा रहा था। वह अपने मन को समझाने की कोशिश करती लेकिन उसकी घबराहट बढ़ती ही जा रही थी।'हैलो, हिमानी वो... दरअसल मैं सोच रही थी... कुछ सोच कर उसने हिमानी को फोन मिलाया पर अपनी बात पूरी न कर सकी। 
'नमिता, क्या बात है? इतनी परेशान क्यूं हो?हिमानी ने पूछा।'मैंन सुना है कि इंजीनियरिंग कालेज में नए स्टूडेंट्स की बहुत तगड़ी रैगिंग की जाती है। मुझे तो बहुत डर लग रहा है। मैं आज कालेज नहीं जा पाऊंगी। नमिता ने अपने अंदर का डर बाहर निकाला।'यह सब पुराने जमाने की बातें हैं। आजकल तो रैंगिंग को अपराध माना जाता है। बहुत सख्त कानून बन गए हैं जिन्हें तोडऩे वालों को तगड़ी सजा दी जाती है।हिमानी ने समझाया फिर बोली, 'घबरा मत। मैं तुम्हारे घर आ जाती हूं, फिर साथ ही कालेज चलेंगे।ठीक है नमिता ने कहा।
नमिता और हिमानी पक्की सहेलियां थीं। संयोग से दोनों का एक ही इंजीनियरिंग कालेज में एडमिशन हुआ था। आज उनका कालेज जाने का पहला दिन था। नमिता ने कुछ दोस्तों से इंजीनियरिंग कालेज में होने वाली तगड़ी रैगिंग के बारे में सुन रखा, जिससे वह काफी घबरा रही थी।हिमानी की बात सुन उसे कुछ राहत मिली। उसने कबर्ड से हरे रंग का कढ़ाई वाला कुर्ता और सफेद शलवार निकाली। यह सूट उसने कुछ दिनों पहले ही सिलवाया था जिसे सभी ने बहुत पसंद किया था। थोड़ी ही देर में हिमानी आ गई। उसने काले रंग की शर्ट और खाकी ट्राउजर पहन रखा था, जिसमें बहुत स्मार्ट दिख रही थी।दोनों कालेज की ओर चल दीं। हिमानी रास्ते भर नमिता को समझाती रही जिससे धीरे-धीरे उसका डर दूर हो गया। कालेज के भीतर पहुंच कर वे अपने ब्लाक की ओर चल दीं।
तोता मैडम, जरा सुनिएगा तभी एक शरारत भरी आवाज सुनाई पड़ी।वे दोनों अपने रास्ते पर चलती रहीं। तभी एक कड़कती हुई आवाज सुनाई आई, 'ऐ ब्लैक कैट, उर्फ बिल्लो मौसी, हम आप दोनों को ही बुला रहे हैं।अब तो शक की कोई गुंजाइश ही न थी। यह आवाजें उन दोनों के लिए ही थीं। उन्होंने अपनी चाल कुछ और तेज कर दी।अचानक दो लड़कों ने उनका रास्ता रोक लिया। एक लड़के ने कड़कते हुए कहा, 'बॉस, आप दोनों को आवाज लगा रहे हैं। सुनती क्यूं नहीं।
'लेकिन वे तो किसी तोता मैडम और ब्लैक-कैट को बुला रहे थे हिमानी ने हिम्मत जुटाते हुए कहा।'हरे कपड़ों में इनको तोता मैडम और काले 
में आपको ब्लैक कैट उर्फ बिल्लो मौसी न कहा जाए तो क्या हंसनी और मैना कहा जाएगा। वह लड़का बेशर्मी से हंसा फिर बोला, 'उधर चलिए 
राजेश सर आप दोनों को बुला रहे हैं।अपनी तुलना तोता और बिल्ली से सुन दोनों की आंखें भर आईं मगर मजबूरी में न चाहते हुए भी 
उन्हें उन लड़कों के साथ जाना पड़ा।थोड़ी ही दूरी पर राजेश दो और लड़कों के साथ बहुत अकड़ कर एक बेंच पर बैठा था। उन दोनों 
को देख उसने कड़कते हुए पूछा, 'आज कालेज में पहला दिन है? 'यस सरहिमानी ने सिर हिलाया।'क्या आप लोगों को इतनी भी तमीज नहीं है कि 
सीनियर्स को नमस्ते करें राजेश ने जोर से डपटा।
सॉरी सरहिमानी ने कहा फिर हाथ जोड़ दिए। उसकी देखा-देखी नमिता ने भी दोनों हाथ जोड़ कर सभी को नमस्ते की।'देखिए इस कालेज में रैंगिंग करना मना है इसलिए हम आप लोगों को छोड़े दे रहे हैं राजेश ने कहा।'थैंक्यू सर नमिता ने जल्दी से कहते हुए राहत की सांस ली वरना वह इतने में ही बुरी तरह घबरा गई थी।'आपके कोरे थैंक्यू का क्या हम अचार डालेंगे तोता मैडम? राजेश ने टोका।'जी नमिता अचकचा उठी।'आपकी रैगिंग नहीं होगी बस आप एक बार तोते की तरह टें टें टें... और आपकी सहेली साहिबा बिल्ली की तरह म्याऊं...म्याऊं करके दिखा दें। राजेश के साथ बैठे सुनील ने हुक्म सुनाया। 
नमिता और हिमानी हड़बड़ा कर रह गईं। उनकी समझ में ही नहीं आ रहा था कि क्या करें।'देखिये न तो हम कोई बदतमीजी करना चाहते हैं और न ही हमारे पास फालतू का टाइम है। अगर आप लोग यहां से जाना चाहती हं तो जो कहा गया है फटाफट करके दिखा दीजिए।Ó राजेश ने खड़े हो कर उन्हें घूरते हुए कहा।नमिता और हिमानी चुपचाप खड़ी रहीं। इस तरह सभी के सामने टें...टें... और म्याऊं...म्याऊं... करना आसान न था।'अगर आप लोगों ने हुक्म का पालन नहीं किया तो आप दोनों से तोते की तरह उडऩे और बिल्ली की तरह उछल-कूद करने का आईटम भी करवाया जाएगा। राजेश ने काट खाने वाले अंदाज में कहा।मरता क्या न करा। न चाहते हुए भी हिमानी को 'म्याऊं...म्याऊं और नमिता को टें...टें... करना पड़ा।
वेरी गुड, राजेश ने ताली बजाई फिर बोला, 'अब आप लोग जा सकती हैं। वे दोनों जाने के लिए मुड़ी ही थीं कि राजेश ने कहा, 'एक मिनट ठहरिये।दोनों ठिठक कर रुक गईं तो उसने पूछा, लगता है आप दोनों इस कालेज में आने से पहले ही एक दूसरे से परीचित हैं।जी, हम लोगों ने इंटर तक की पढ़ाई एक साथ की है हिमानी ने बताया। 'अरे वाह, पक्की सहेलियां हैं राजेश ने कहा फिर अपने एक साथी की ओर मुड़ते हुए बोला, 'कुछ ऐसा करो जिससे पूरे कालेज को इनके दोस्ताना के बारे में पता चल जाए। 'जो हुक्म बॉस विनोद ने सिर झुकाया फिर बोला, 'आप दोनों अपना एक-एक हाथ रूमाल से बांध लीजिए और दूसरे हाथ से लेफ्ट-राइट, लेफ्ट-राइट करते हुए अपनी क्लास की तरफ जाइएयह सुन नमिता की तो हालत खराब हो गई, लेकिन हिमानी ने किसी तरह हिम्मत जुटाते हुए कहा, 'हम ऐसा कैसे कर सकते हैं? लोग क्या कहेंगे।
'अगर आपने यह नहीं किया तो जरा सोचिए जब लेफ्ट-राइट के बजाय आपको कुकडू-कूं करके जाने का हुक्म दिया जाएगा तब लोग क्या कहेंगे? राजेश बेशर्मी से हंसा फिर बोला, 'जल्दी कीजिए वरना हर बीतने वाले मिनट के साथ आप लोगों का टास्क बढ़ता जाएगा।मजबूरी थी। नमिता और हिमानी ने अपने-अपने रूमाल को आपस में बांध कर उसे लंबा किया फिर उससे अपने एक-एक हाथ को बांधा और लेफ्ट-राइट करती हुई चल दीं। शर्म के कारण दोनों की आंखें गड़ी जा रही थी। राजेश और उसेदोस्तों के ठहाके काफी देर तक उनका पीछा करती रहे।किसी तरह दोनों अपने ब्लाक में पहुंची। वहां से राजेश और उसके साथी दिखाई नहीं पड़ रहे थे। हिमानी ने जल्दी से अपने हाथों में बंधा रूमाल खोला और दांत पीसती हुई बोली, 'रैगिंग करना अब पूरी तरह से प्रतिबंधित है। मैं इन सबकी शिकायत प्रिंसिपल से जरूर करूंगी।'रहने दो। हमारी रैगिंग हो गई और किस्सा 
खत्म। हमें अब इसी कालेज में रहना है। सीनियर्स से पंगा लेने से कोई फायदा नहीं नमिता ने समझाया।
हिमानी उन सबकी शिकायत करना चाहती थी लेकिन नमिता ने किसी तरह समझा-बुझा कर उसे शांत कर लिया। दोनों अपनी क्लास की ओर जा ही रही थीं कि तभी एक लड़की दौड़ती हुई आई। वह बुरी तरह घबराई हुई थी और उसकी सांस धौकनी की तरह फूल रही थी।'क्या हुआ? तुम इतनी घबराई हुई क्यूं हो? हिमानी ने पूछा।'वे लोग रैंगिंग के नाम पर मुझसे डांस करने के लिए कह रहे थे। मैंने मना किया तो उन्होंने मेरा कुर्ता फाड़ दिया वह लड़की अपना दुपट्टा हटा फटा हुआ कुर्ता दिखा फफक पड़ी।'यह तो मर्यादा का अतिक्रमण है। इन्हें सबक सिखाना जरूरी है नमिता का शांत चेहरा अचानक ही तमतमा उठा और वह अपनी मुठ्ठियां भींचते हुए बोली।मैं तो पहले ही प्रिंसिपल से शिकायत करने के लिए कह रही थी लेकिन तुम ही मना कर रही थी हिमानी ने कहा। 'मना कर रही थी लेकिन अब पानी सिर से गुजरने लगा है। लगता है इन लोगों की नजरों में हम लड़कियों की कीमत किसी खिलौने से ज्यादा नहीं है, जिससे जब चाहा, जैसा चाहा खेल लिया। आज उन्होंने एक लड़की का कुर्ता फाड़ा है अगर इन्हें रोका नहीं गया तो कल ये कुछ और कर सकते हैं नमिता ने एक-एक शब्द पर जोर देते हुए कहा। अब तब घबराए हुए उसके चेहरे पर कुछ कर गुजरने के चिह्नï नजर आने लगे थे। उसके चेहरे का भय पूरी तरह से सम्पात हो गया था।उस लड़की का नाम इंद्राणी था। तीनों प्रिंसिपल के कक्ष की ओर चल दीं। 

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