GREHLAKSHMI

FREE - On Google Play
OPEN

बिंदी से होने वाली एलर्जी के बारे में जानें ,आइए

मोनिका अग्रवाल

17th May 2020

इस बिंदी में इस्तेमाल की जाने वाली ग्लू त्वचा को नहीं सुहाती, जो कई महिलाओं में एलर्जी का कारण बन सकती है।

बिंदी से होने वाली एलर्जी के बारे में जानें ,आइए

बिंदी, जिसे कुमकुम भी कहा जाता है, यह भारतीय महिला के श्रृंगार का अभिन्न हिस्सा है। युगों से, माना जाता है कि महिला बिंदी के बिना महिला का लुक अधूरा रहता है। कुछ परिवारों में, महिलाएं हर समय चेहरे पर बिंदी लगाए रखती हैं, जिससे त्वचा पर खुजली और लाली हो सकती है। कुछ महिलाओं में तो खुजली बहुत ज़्यादा बढ़ जाती है। अगर एलर्जी न भी हो तो, कभी कभी लगातार बिंदी लगाए रखने से उस हिस्से की त्वचा पर हल्के रंग का एक धब्बा सा बन जाता है। 

 

बिंदी से पहले कुमकुम का इस्तेमाल किया जाता था। कुमकुम को हल्दी और चूने में रंग मिलाकर बनाया जाता है। यह आमतौर पर पाउडर और लिक्विड के रूप में उपलब्ध होती है। इसे पुरूष और महिलाएं अपने माथे पर लगा सकते हैं। लेकिन बदलते समय के साथ, पारम्परिक बिंदी की जगह स्टिकर बिंदी ने ले ली, जो आज कई रंगों, आकारों और स्टाइल्स में उपलब्ध है। इस बिंदी में इस्तेमाल की जाने वाली ग्लू त्वचा को नहीं सुहाती, जो कई महिलाओं में एलर्जी का कारण बन सकती है। 

null
bindi allergy

बिंदी से होने वाली एलर्जी के कारण

बिंदी से होने वाली एलर्जी को चिकित्सा की भाषा में बिंदी डर्मेटाइटिस कहा जाता है। आमतौर पर यह बिंदी के इस्तेमाल के कारण होती है। बिंदी में आमतौर पर पैरा टर्शरी ब्यूटाईल प्लेनोल का इस्तेमाल होता है, जो संवेदनशील त्वचा के लिए नुकसानदायक है। लम्बे समय तक इसका इस्तेमाल करते रहने से त्वचा को बहुत ज़्यादा नुकसान हो सकता है। कुछ मामलों में कैंसर तक भी हो सकता है। लेकिन उचित देखभाल और प्रबंधन के द्वारा इस समस्या का समाधान संभव है।

बिंदी एलर्जी के लक्षण

महिलाएं अक्सर शुरूआती लक्षणों पर ध्यान नहीं देतीं और बिंदी लगाना जारी रखती हैं। लेकिन ऐसा नहीं करना चाहिए। अगर आपको इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई दें तो आपको तुरंत डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।

काला या सफेद धब्बा

अगर लम्बे समय तक इलाज न किया जाए तो इस हिस्से से खून बहना भी शुरू हो सकता है।

उपचार

सबसे पहले अगर आपको कोई लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत बिंदी का इस्तेमाल बंद कर दें। हालांकि भारतीय समाज और संस्कृति में ऐसा हमेशा संभव नहीं होता। इसलिए बिंदी के स्थान पर अन्य प्रोडक्ट इस्तेमाल करें। आप बी वैक्स और तिल के तेल का मिश्रण लगाकर इसके उपर भी बिंदी चिपका सकती हैं। 

इस तरह की एलर्जी के इलाज में हल्का स्टेरॉयड भी इस्तेमाल किया जाता है। आमतौर पर टॉपिकल ऐप्लीकेशन या क्रीम के द्वारा इसका इलाज किया जाता है। लेकिन कुछ मामलों में ओरल स्टेरॉयड का इस्तेमाल भी किया जा सकता है। एंटीस्टैमिनिक्स जैसे लीवोसेट्रीज़ाइन और हाइड्राक्सीज़ाइन के द्वारा भी मरीज़ को खुजली एवं असहजता से राहत मिलती है।

कभी कभी, सांस्कृतिक एवं सामाजिक धार्मिक प्रभाव का स्वास्थ्य पर बुरा असर हो सकता है। बिंदी डर्मेटाइटिस भारतीय महिलाओं में आम समस्या है, लेकिन अगर हम चिकित्सा विज्ञान की अनदेखी कर पुरानी अवधारणाओं पर टिकें रहें तो कभी कभी छोटी सी समस्या गंभीर रूप ले सकती है। इसलिए डॉक्टर के पास जाने से हिचकिचाएं नहीं, तुरंत डॉक्टर की सलाह लें। याद रखें, सही देखभाल और प्रबंधन से आप इस समस्या का इलाज कर सकती हैं।  

null
treatment

 

यह भी पढ़ें-

  1. फेशियल एक्सरसाइज जिससे आप पा सकती है सुन्दर एवं स्वस्थ त्वचा

  2. कैलोरी इनटेक पर कंट्रोल करने के टिप्स

  3. सैनिटाइज करें अपना बेडरूम

  4. वर्क फ्रॉम होम के दौरान ऐसे रखें अपने इम्‍यून सिस्‍टम का ख्‍याल

  5. लॉकडाउन यानी बड़े-बुजुर्गों से संबंध संवारने का सबसे बेहतर समय, जानिए क्यों 

input-डॉ नंदिनी बरुआ, डर्मो, पारस हॉस्पिटल गुड़गांव 

 

कमेंट करें

blog comments powered by Disqus

संबंधित आलेख

default

कैसे चुने अपना SPF

default

शिशु की त्वचा की देखभाल

default

त्वचा की नमी को बरकरार रखने के लिए प्रभावी...

default

Secret Parts: कैसे करें अपने प्राइवेट पार्ट...

पोल

सबसे अछि दाल कौन सी है

गृहलक्ष्मी गपशप

अच्छे शारीरि...

अच्छे शारीरिक, मानसिक...

इलाज के लिए हर तरह के माध्यम के बाद अब लोग हीलिंग थेरेपी...

आसान बजट पर ...

आसान बजट पर पूरा...

आपकी शादी अगले कुछ दिनों में होने वाली है। आपने इसके...

संपादक की पसंद

आध्यात्म ऐसे...

आध्यात्म ऐसे रखेगा...

आध्यात्म को कई सारी दिक्कतों का हल माना जाता है। ये...

बच्चों को हा...

बच्चों को हाइड्रेटेड...

बच्चों के लिए गर्मी का मौसम डिहाइड्रेशन का कारण बन...

सदस्यता लें

Magazine-Subscription