बहस का कोई हल नहीं

मोनिका अग्रवाल

7th June 2020

लंबे समय से रिश्‍ते में रहने के बाद एक ठहराव सा आ जाता है, जिन्दगी एक ढ़र्रे पर चलने लगती है। लेकिन यह कोई बुरी बात नहीं। रिश्ते में इस तरह की सुरक्षा सुकून देती है, लेकिन कुछ दंपति मिली हुई चीज़ों का महत्व नहीं समझते और उसकी अनदेखी करने लगते हैं।

बहस का कोई हल नहीं

साथी से फालतू की बहस क्यों

कई बार पति पत्नी या गर्लफ़्रेंड-बॉय फ़्रेंड के बीच बहस इस क़दर बढ़ जाती है कि उसका कोई हल नहीं निकल पाता है. बहस के दौरान एक दूसरे को ग़लत ठहराना,आरोप लगाना सामान्य सी बात है,लेकिन क्या आपने सोचा है कि इस बहस से हासिल क्या होता है? कुछ नहीं..सिवाय इसके कि दूरियाँ बढ़ जाती हैं और वातावरण कलुषित हो जाता है सो अलग.

प्रस्तुत हैं कुछ सुझाव.यदि बहस करते समय आप ये ग़लतियाँ न करें तो निश्चित रूप से आप किसी न किसी निष्कर्ष पर तो पहुँचेंगे ही आपके रिश्ते में भी दूरियाँ नहीं आएँगी-

१-समझदारी से काम लें- हर बहस का हल लड़ाई नहीं होती.यदि आपका पार्ट्नर ग़ुस्सैल है तो ज़ाहिर सी बात है कि आपको उसे समझदारी से हैंडल करना होगा.आप उसे प्यार से अपनी बात समझाएँ. निश्चय ही वो आपकी बात समझेगा.

२-तेज़ आवाज़ में बात न करें- बात करते समय तेज़ आवाज़ में बात न करें.इससे आप की बहस असल मुद्दे से हटकर स्वतः ही झगड़े का रूप ले लेगी. न ही गड़े मुर्दे उखाड़ें.पुरानी बातों को भूलकर नई बात पर ध्यान दें.अपनी बहस में किसी तीसरे को न लाएँ.रात को सोते समय इन बातों को न छेड़ें,उसका कोई समाधान नहीं निकलेगा.

३-बात को दूसरी तरफ़ मोड़ दें- जब आपको लगे कि बात किसी और दिशा में मुड़ रही है जो,बेवजह बहस को और बढ़ा देगी तो आप आगे बढ़ते हुए बात का रूख दूसरी तरफ़ मोड़ दें.कोई हल्की -फुल्की बात करने लगें,जिससे आप दोनो का  मूड लाईंट हो जाए और बहस का मुद्दा भी बदल जाए.

४-दूसरे की बात ध्यान से सुनें- जब आप दोनों के बीच किसी मुद्दे पर बहस हो रही है तो ऐग़्रेसिव होने के बजाय अपने पार्ट्नर की बात ध्यान से सुनें उसके बाद अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करें.ज़ाहिर है बहस बढ़ने की आशंका कम रहेगी.अन्यथा आपकी बातें या तो दीवारें सुनेंगी या आपके पड़ोसी.जगहँसाईं होगी सो अलग.

 

५-विजयेता बनने का प्रयास न करें- पार्ट्नर के साथ बहस शुरू करते समय इस बात का ध्यान ज़रूर रखें कि आप किसी युद्ध स्थल पर नहीं ,बल्कि अपने पार्ट्नर के सामने खड़े हैं.आपके हाथ में भाला और तलवार नहीं,बल्कि मुखारविंद में कुछ शब्द हैं जिन्हें ,समझदारी से इस्तेमाल करके आपको अपना पक्ष रखना है,न कि युद्ध जीतना है.वैसे भी अपने निकटस्थ प्रियजन के साथ कैसी हार कैसी जीत.जब ज़िंदगी में साथ साथ चलना है तो वाद-विवाद तो चलते ही रहेंगे.और रहने भी चाहिएँ,वरना ज़िंदगी में उबाऊपन आ जाएगा.

६-ग़लती मानने में कोई बुराई नहीं है- बहस के दौरान यदि आपको लगता है कि आपकी ग़लती है तो इसे सही साबित करने के बजाय तुरंत 'सारी' कह दें,इससे आप,आपसी बहस से तो बचेंगे ही ,आपके पार्ट्नर के दिल में भी आपके लिए प्यार और इज़्ज़त बढ़ जाए

आप किसी रिश्ते को शुरू करने जा रहे हैं,विवाह बंधन मे बँधने जा रहे हैं या शादी शुदा हैं,याद रखें ये छोटी छोटी लड़ाईयां तो चलती रहेंगी ,इन्हें कैसे सुलझाना है या इनसे कैसे उबरना है , ये आपकी समझ पर निर्भर करता है. यदि हालत बेक़ाबू हो रहे हों तो अपने किसी बड़े बुज़ुर्ग से सलाह ले या किसी कौनस्लर से मिलकर भी अपनी समस्या का समाधान ढूँढ सकते हैं.

 

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